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न इतिहास से सीखा न भविष्य पर विचार, मनमाने तरीके से प्रशासन ने तय की हमारी जरूरत: हाईकोर्ट

Fri, 02 Feb 2024 09:15 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Feb 2024 09:15 PM IST
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Neither learned from history nor thought about future, administration decided our needs arbitrarily: High Court
केंद्र को भेजे गए 8.5 एकड़ भूमि के अलॉटमेंट प्रस्ताव पर हाईकोर्ट ने प्रशासन को लगाई फटकार
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कहा कि केंद्र सरकार को प्रशासन के पत्र के साथ ही हाईकोर्ट की जरूरत पर विचार करना चाहिए

केंद्र के मांगे गए स्पष्टीकरण पर प्रशासन को जल्द से जल्द जवाब का हाईकोर्ट ने दिया आदेश

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। हाईकोर्ट को 14.82 एकड़ भूमि की अलॉटमेंट के आदेश के बाद यूटी प्रशासन के गृह मंत्रालय को लिखे पत्र पर हाईकोर्ट ने आपत्ति जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि इसकी इमारत के लिए केवल 8.5 एकड़ भूमि को पर्याप्त बताते हुए न तो 1954 से अब तक के इतिहास पर गौर किया गया और न ही आने वाले 50 साल की जरूरत पर। जरूरत तय करते हुए न तो कोई गणना की गई है और न ही कोई ठोस आधार बनाया गया है। हाईकोर्ट की इमारत पर भार को लेकर लंबित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की है।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी संघ के सचिव विनोद धत्तरवाल और अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में हाईकोर्ट की इमारत पर बढ़ते बोझ का मुद्दा उठाया गया था। याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट की इमारत वर्तमान बोझ नहीं झेल पा रही है। हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रशासन को 14.2 एकड़ भूमि अलॉट करने का आदेश दिया था। इसके बाद प्रशासन ने हाईकोर्ट में एक पत्र सौंपा था और बताया था कि प्रोजेक्ट बहुत महंगा है और केंद्र सरकार के स्तर पर मंजूरी जरूरी है।
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शुक्रवार को मामले पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि प्रशासन ने केंद्र सरकार को जो प्रस्ताव भेजा था उस पर कुछ स्पष्टीकरण प्रशासन से मांगे गए हैं। इस दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन ने प्रस्ताव भेजते हुए सही गणना नहीं की है और न ही आंकड़ों की समीक्षा की गई थी। हाईकोर्ट की जरूरत केवल 8.5 एकड़ बताई गई है जो सही नहीं है।
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हाईकोर्ट 1954 में 9 जजों के साथ शुरू हुआ था और आज मंजूर पद 85 हैं। जितनी जमीन की जरूरत प्रशासन ने केंद्र को बताई है वह आज के लिए ही काफी नहीं है, जबकि हमें आने वाले 50 साल के लिए खुद को तैयार करना होगा। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को स्पष्ट कर दिया कि हाईकोर्ट के लिए भूमि तय करते हुए केवल प्रशासन के लिखे पत्र को आधार न बनाया जाए बल्कि हमारी असल जरूरत को देखा जाए।

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने बताया कि प्रशासन का पत्र मिलने के बाद उनसे हाईकोर्ट की भविष्य की जरूरतों को लेकर ही स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस पर हाईकोर्ट की ओर से बताया गया कि 2014 में हाईकोर्ट को 2 लाख 90 हजार स्क्वेयर फीट अतिरिक्त भूमि की जरूरत थी जो 2018 में बढ़ कर 3 लाख 10 हजार स्क्वेयर फीट हो गई। इसके बाद 6 साल बीत गए हैं और समय बीतने के साथ ही बोझ और बढ़ गया है। प्रशासन ने 8.5 एकड़ भूमि की आवश्यकता 2018 के अनुसार तय कर दी है जबकि इन 6 साल और आने वाले 50 साल के बारे में विचार ही नहीं किया।


किसी अन्य को अलॉट न हों प्लॉट

हाईकोर्ट ने कहा कि जोनल प्लान के अनुसार फिलहाल केवल तीन प्लॉट सारंगपुर में बाकी हैं और फिलहाल इन्हें किसी अन्य संस्थान को अलॉट नहीं किया गया है। ऐसे में फिलहाल इन्हें किसी अन्य संस्थान को अलॉट करने की दिशा में कोई कदम न उठाया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि यूटी प्रशासन से स्पष्टीकरण मिलने के बाद भी केंद्र सरकार हाईकोर्ट की जरूरत का ध्यान रखते हुए निर्णय ले।
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