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लापरवाही : बिना सर्वे मशीन जमीन की पैमाइश करने पहुंची अधिकारियों की ज्वाइंट कमेटी, गांव देवी नगर जमीन विवाद मामला
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पंचकूला। गांव देवी नगर की 20 एकड़ जमीन के विवाद को सुलझाने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक के आदेश पर गठित अधिकारियों की ज्वाइंट कमेटी वीरवार को जमीन का सर्वे करने पहुंची, लेकिन सर्वे मशीन न होने के कारण ज्वाइंट कमेटी में शामिल अधिकारियों को बैरंग लौटना पड़ा। अधिकारियों की इस लापरवाही पर गांव के निवासियों ने रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि विभागीय अधिकारी इस मामले को एक सोची समझी साजिश के तहत लटकाने का काम कर रहे हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि करीब 17 दिन बाद ज्वाइंट कमेटी पैमाइश करने के लिए गांव देवी नगर में पहुंची, जबकि 14 जून को मुख्य प्रशासक ने आश्वासन दिया था कि दो दिन के भीतर अधिकारियों की एक ज्वाइंट कमेटी बनेगी और एक सप्ताह के अंदर सर्वे करके रिपोर्ट देगी।
ज्वाइंट कमेटी के अधिकारियों ने बताया कि वह बहुत जल्द जीपीएस सर्वे मशीन के जरिए बहुत जल्द गांव देवी नगर की जमीन की पैमाइश करेंगे। इस कार्य के लिए पहले वह सर्वे मशीन की व्यवस्था करेंगे। हालांकि आज की कार्रवाई की रिपोर्ट वह हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की इस्टेट ऑफिसर ममता शर्मा को सौंपेंगे। इसके बाद वह जैसा आदेश करेंगी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उधर, गांव देवी नगर के निवासी रघुबीर चौधरी ने कहा कि जमीन का जीपीएस के जरिए दो बार सर्वे हो चुका है। पहला सर्वे गांव के लोगों द्वारा करवाया गया, जिसकी रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सेक्टर-22 के आईटी पार्क में प्लॉट नंबर-1 में आईटी कंपनी की आधी से ज्यादा बिल्डिंग गांव वासियों की जमीन पर बनी है। जबकि दूसरा सर्वे वन विभाग ने करवाया, जिसकी रिपोर्ट में सामने आया कि कंपनी का आगे का आधा हिस्सा उनकी जमीन में है। इस मौके पर गांव के रघुबीर चौधरी, सोहन चौधरी, सुभाष चौधरी, गीता राम चौधरी, निर्मल चौधरी, गुरदीप चौधरी, कुलवंत चौधरी, जगदीप चौधरी, पारस चौधरी, भाग सिंह चौधरी मौजूद थे।
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के प्रशासक ने बुधवार को जिला प्रशासन, एचएसआईआईडीसी और एचएचएसवीपी के संपत्ति विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त मीटिंग की। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों ने पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पहले की निशानदेही को नामंजूर कर तीनों विभागों के अधिकारियों की एक संयुक्त कमेटी गठित करने का आदेश दिया। प्रशासक ने यह भी आदेश दिया कि संयुक्त अधिकारियों की टीम दोबारा से मौके पर जाकर जमीन की पैमाइश और निशानदेही करेगी। इसके बाद वह आगे की कार्रवाई के लिए फैसला लेंगे। बुधवार को प्रशासक के साथ हुई मीटिंग में एचएसवीपी की संपदा अधिकारी ममता शर्मा, एचएसआईआईडीसी के एक्सईएन रोहित कंवर, जिला प्रशासन के कानूनगो हरनेक, नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह, पटवारी गुरजिंद्र समेत अन्य कई अधिकारी शामिल थे।
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14 जून को जमीन का मालिकाना हक दिलाने पहुंची थे अधिकारी
एचएसआईआईडीसी ने सेक्टर-22 में इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी पार्क विकसित करते हुए जमीन को आगे आईटी इंडस्ट्री को अलॉट कर दिया, जो उसकी थी ही नहीं। अब इस जगह आईटी पार्क की सबसे ऊंची बिल्डिंग बनी है। यहां बनी 12 मंजिला बिल्डिंग पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं, क्योंकि कोर्ट ने जमीन पर गांव देवीनगर के निवासियों के मालिकाना हक को सही बताया है। इनमें कालका के विधायक प्रदीप चौधरी की भी यहां जमीन है। कोर्ट के निर्देश पर 14 जून को तहसीलदार पुण्यदीप शर्मा के नेतृत्व में पंचकूला प्रशासन की टीम गांव देवीनगर के निवासियों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने के लिए पहुंची थी।
ज्वाइंट कमेटी में इस विभाग के अधिकारी शामिल
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक के आदेश पर गठित ज्वाइंट कमेटी में इस्टेट ऑफिसर, एलएओ पंचकूला, डीटीपी पंचकूला, तहसीलदार पंचकूला, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एचएसवीपी डिविजन नंबर-2 पंचकूला, सीनियर मैनेजर (इंजीनियरिंग) एचएसआईआईडीसी, आईई बरवाला, नायब तहसीलदार हरियाणा फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, बच्चा राम और अन्य याचिकाकर्ता शामिल हैं।
कोर्ट ने फैसले में माना कि बिल्डिंग की कुछ जमीन गांव की
साल 2015 में कोर्ट ने दिए अपने फैसले में माना कि जिस जगह पर आईटी कंपनी की बिल्डिंग बनी हैं, वह जगह देवीनगर गांव के निवासियों की हैं। राजस्व रिकॉर्ड में भी आज तक जमीन का अधिग्रहण करने पर किसी को मुआवजा नहीं दिया गया है। आईटी कंपनी की बिल्डिंग वाली जमीन के अलावा गोल्फ क्लब, पंचकूला भी उनकी ही जमीन पर बना है। किसी ने उनकी जमीन पर कब्जा कर मंदिर भी बनाया हुआ है। कोर्ट का गांववासियों के पक्ष में फैसला आने के बाद देवीनगर के निवासियों ने साल 2015 में जमीन का कब्जा लेने के लिए केस डाला था। कोर्ट से जमीन खाली कराने की मांग की गई। कोर्ट ने 23 नवंबर 2019 को पंचकूला के तहसीलदार को जमीन खाली कराने और उन्हें मालिकाना हक देने के आदेश दिए थे। इसके बाद से ही गांव देवी नगर निवासियों को जमीन का कब्जा देने की प्रक्रिया चल रही थी।
कब्जा अब तक
- 2003: एचएसवीपी ने जमीन एचएसआईआईडीसी को आईटी पार्क विकसित करने के लिए दी थी।
- 2010: देवीनगर के निवासियों ने अपनी जमीन की सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर निशानदेही कराई थी। इसके बाद से वह अपनी जमीन वापस लेने के लिए पंचकूला कोर्ट में केस लड़ रहे थे।
- 2014: एचएसआईआईडीसी ने यहां आईटी कंपनियों को प्लॉट अलॉट कर दिए।
2015: गांववालों ने अपने हक के लिए कोर्ट में केस डाला। कोर्ट ने माना था कि जिस जगह पर आईटी कंपनी की बिल्डिंग बनी है, वह जगह देवीनगर गांव के निवासियों की है।
- 23 नवंबर 2019: कोर्ट ने पंचकूला के तहसीलदार को गांववासियों की जमीन खाली कराने और उन्हें कब्जा देने के निर्देश दिए।
बिल्डिंग गिरेगी या मुआवजा मिलेगा?
- 200 करोड़ से ज्यादा बनेगा मुआवजा : कोर्ट के निर्देशों पर गांववालों को जमीन का कब्जा देने के लिए या तो बिल्डिंग को गिराना होगा या जमीन अधिग्रहण का मुआवजा देना होगा। अगर मुआवजा देने का फैसला किया जाता है तो यह 200 करोड़ से ज्यादा बन सकता है। राजस्व रिकॉर्ड में भी आज तक इस जमीन का अधिग्रहण करने पर किसी को मुआवजा नहीं दिया गया है।
- 17,000 करोड़ का लोन पहले ही है एचएसवीपी पर : एचएसवीपी पहले ही कर्ज के बोझ तले दबा है। कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए एचएसवीपी पर लगभग 17 हजार करोड़ का लोन है। ऐसे में मुआवजा देना एचएसवीपी के लिए भारी पड़ सकता है।
- 60-70 करोड़ में बनी है आईटी कंपनी की बिल्डिंग : आईटी कंपनी की 14 मंजिला बिल्डिंग के निर्माण पर करीब 60-70 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसे तोड़ना भी संभव नहीं है। इस वजह से एचएसवीपी के अधिकारी कमेटियां बनाकर और दोबारा निशानदेही की बात कहकर मामले को टालने में लगे हैं।
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ज्वाइंट कमेटी के अधिकारियों ने बताया कि वह बहुत जल्द जीपीएस सर्वे मशीन के जरिए बहुत जल्द गांव देवी नगर की जमीन की पैमाइश करेंगे। इस कार्य के लिए पहले वह सर्वे मशीन की व्यवस्था करेंगे। हालांकि आज की कार्रवाई की रिपोर्ट वह हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की इस्टेट ऑफिसर ममता शर्मा को सौंपेंगे। इसके बाद वह जैसा आदेश करेंगी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उधर, गांव देवी नगर के निवासी रघुबीर चौधरी ने कहा कि जमीन का जीपीएस के जरिए दो बार सर्वे हो चुका है। पहला सर्वे गांव के लोगों द्वारा करवाया गया, जिसकी रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सेक्टर-22 के आईटी पार्क में प्लॉट नंबर-1 में आईटी कंपनी की आधी से ज्यादा बिल्डिंग गांव वासियों की जमीन पर बनी है। जबकि दूसरा सर्वे वन विभाग ने करवाया, जिसकी रिपोर्ट में सामने आया कि कंपनी का आगे का आधा हिस्सा उनकी जमीन में है। इस मौके पर गांव के रघुबीर चौधरी, सोहन चौधरी, सुभाष चौधरी, गीता राम चौधरी, निर्मल चौधरी, गुरदीप चौधरी, कुलवंत चौधरी, जगदीप चौधरी, पारस चौधरी, भाग सिंह चौधरी मौजूद थे।
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हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के प्रशासक ने बुधवार को जिला प्रशासन, एचएसआईआईडीसी और एचएचएसवीपी के संपत्ति विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त मीटिंग की। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों ने पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पहले की निशानदेही को नामंजूर कर तीनों विभागों के अधिकारियों की एक संयुक्त कमेटी गठित करने का आदेश दिया। प्रशासक ने यह भी आदेश दिया कि संयुक्त अधिकारियों की टीम दोबारा से मौके पर जाकर जमीन की पैमाइश और निशानदेही करेगी। इसके बाद वह आगे की कार्रवाई के लिए फैसला लेंगे। बुधवार को प्रशासक के साथ हुई मीटिंग में एचएसवीपी की संपदा अधिकारी ममता शर्मा, एचएसआईआईडीसी के एक्सईएन रोहित कंवर, जिला प्रशासन के कानूनगो हरनेक, नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह, पटवारी गुरजिंद्र समेत अन्य कई अधिकारी शामिल थे।
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14 जून को जमीन का मालिकाना हक दिलाने पहुंची थे अधिकारी
एचएसआईआईडीसी ने सेक्टर-22 में इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी पार्क विकसित करते हुए जमीन को आगे आईटी इंडस्ट्री को अलॉट कर दिया, जो उसकी थी ही नहीं। अब इस जगह आईटी पार्क की सबसे ऊंची बिल्डिंग बनी है। यहां बनी 12 मंजिला बिल्डिंग पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं, क्योंकि कोर्ट ने जमीन पर गांव देवीनगर के निवासियों के मालिकाना हक को सही बताया है। इनमें कालका के विधायक प्रदीप चौधरी की भी यहां जमीन है। कोर्ट के निर्देश पर 14 जून को तहसीलदार पुण्यदीप शर्मा के नेतृत्व में पंचकूला प्रशासन की टीम गांव देवीनगर के निवासियों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने के लिए पहुंची थी।
ज्वाइंट कमेटी में इस विभाग के अधिकारी शामिल
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक के आदेश पर गठित ज्वाइंट कमेटी में इस्टेट ऑफिसर, एलएओ पंचकूला, डीटीपी पंचकूला, तहसीलदार पंचकूला, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एचएसवीपी डिविजन नंबर-2 पंचकूला, सीनियर मैनेजर (इंजीनियरिंग) एचएसआईआईडीसी, आईई बरवाला, नायब तहसीलदार हरियाणा फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, बच्चा राम और अन्य याचिकाकर्ता शामिल हैं।
कोर्ट ने फैसले में माना कि बिल्डिंग की कुछ जमीन गांव की
साल 2015 में कोर्ट ने दिए अपने फैसले में माना कि जिस जगह पर आईटी कंपनी की बिल्डिंग बनी हैं, वह जगह देवीनगर गांव के निवासियों की हैं। राजस्व रिकॉर्ड में भी आज तक जमीन का अधिग्रहण करने पर किसी को मुआवजा नहीं दिया गया है। आईटी कंपनी की बिल्डिंग वाली जमीन के अलावा गोल्फ क्लब, पंचकूला भी उनकी ही जमीन पर बना है। किसी ने उनकी जमीन पर कब्जा कर मंदिर भी बनाया हुआ है। कोर्ट का गांववासियों के पक्ष में फैसला आने के बाद देवीनगर के निवासियों ने साल 2015 में जमीन का कब्जा लेने के लिए केस डाला था। कोर्ट से जमीन खाली कराने की मांग की गई। कोर्ट ने 23 नवंबर 2019 को पंचकूला के तहसीलदार को जमीन खाली कराने और उन्हें मालिकाना हक देने के आदेश दिए थे। इसके बाद से ही गांव देवी नगर निवासियों को जमीन का कब्जा देने की प्रक्रिया चल रही थी।
कब्जा अब तक
- 2003: एचएसवीपी ने जमीन एचएसआईआईडीसी को आईटी पार्क विकसित करने के लिए दी थी।
- 2010: देवीनगर के निवासियों ने अपनी जमीन की सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर निशानदेही कराई थी। इसके बाद से वह अपनी जमीन वापस लेने के लिए पंचकूला कोर्ट में केस लड़ रहे थे।
- 2014: एचएसआईआईडीसी ने यहां आईटी कंपनियों को प्लॉट अलॉट कर दिए।
2015: गांववालों ने अपने हक के लिए कोर्ट में केस डाला। कोर्ट ने माना था कि जिस जगह पर आईटी कंपनी की बिल्डिंग बनी है, वह जगह देवीनगर गांव के निवासियों की है।
- 23 नवंबर 2019: कोर्ट ने पंचकूला के तहसीलदार को गांववासियों की जमीन खाली कराने और उन्हें कब्जा देने के निर्देश दिए।
बिल्डिंग गिरेगी या मुआवजा मिलेगा?
- 200 करोड़ से ज्यादा बनेगा मुआवजा : कोर्ट के निर्देशों पर गांववालों को जमीन का कब्जा देने के लिए या तो बिल्डिंग को गिराना होगा या जमीन अधिग्रहण का मुआवजा देना होगा। अगर मुआवजा देने का फैसला किया जाता है तो यह 200 करोड़ से ज्यादा बन सकता है। राजस्व रिकॉर्ड में भी आज तक इस जमीन का अधिग्रहण करने पर किसी को मुआवजा नहीं दिया गया है।
- 17,000 करोड़ का लोन पहले ही है एचएसवीपी पर : एचएसवीपी पहले ही कर्ज के बोझ तले दबा है। कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए एचएसवीपी पर लगभग 17 हजार करोड़ का लोन है। ऐसे में मुआवजा देना एचएसवीपी के लिए भारी पड़ सकता है।
- 60-70 करोड़ में बनी है आईटी कंपनी की बिल्डिंग : आईटी कंपनी की 14 मंजिला बिल्डिंग के निर्माण पर करीब 60-70 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसे तोड़ना भी संभव नहीं है। इस वजह से एचएसवीपी के अधिकारी कमेटियां बनाकर और दोबारा निशानदेही की बात कहकर मामले को टालने में लगे हैं।