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नार्को आतंकवाद देश की एकता, अखंडता व सुरक्षा के लिए खतरा, आरोपी को जमानत नहीं: हाईकोर्ट

Thu, 08 Jan 2026 02:01 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jan 2026 02:01 AM IST
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Narco-terrorism is a threat to the unity, integrity, and security of the country; the accused is not entitled to bail: High Court
चंडीगढ़। गंभीर नार्को-आतंकवाद के मामले में आरोपी अमित गंभीर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत से इन्कार करते हुए कहा कि याची की भूमिका केवल मादक पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं थी बल्कि वह ऐसे कृत्यों की श्रृंखला में शामिल रहा जिनसे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को गंभीर खतरा पहुंचा।
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यह मामला जून 2019 का है जब अमृतसर स्थित अटारी पर कस्टम अधिकारियों ने पाकिस्तान से आए एक ट्रक को रोका था। कागजों में खेप को राॅक साॅल्ट (सेंधा नमक) बताया गया था लेकिन जांच के दौरान बोरियों में छिपाकर रखी गई 532 किलोग्राम हेरोइन और 52 किलोग्राम मिश्रित मादक पदार्थ बरामद हुए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब हजारों करोड़ रुपये आंकी गई।
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इतनी बड़ी बरामदगी के बाद गृह मंत्रालय ने जांच को एनआईए को सौंप दिया। एनआईए ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। जांच में पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जुड़ी एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा हुआ। इसमें नशीले पदार्थों की कमाई को अवैध हवाला चैनलों के जरिये विदेश भेजा जा रहा था।
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हाईकोर्ट ने मामले में जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आए साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन याची की हवाला नेटवर्क के जरिये करोड़ों रुपये विदेश भेजने में सक्रिय भूमिका की ओर इशारा करते हैं। मामला साधारण आर्थिक अपराध का नहीं, बल्कि नार्को-टेररिज्म का है जहां नशीले पदार्थों से अर्जित धन का इस्तेमाल सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को पोषित करने के लिए किया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार अमित गंभीर ने सह-आरोपी शेरा के कहने पर चार करोड़ रुपये से अधिक के हवाला लेन-देन को अंजाम दिया। रुपयों को दिरहम में बदल कर दुबई स्थित मनी एक्सचेंज एजेंसियों तक पहुंचाया गया। एनआईए द्वारा आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच में हवाला लेनदेन से जुड़ी ठोस सामग्री सामने आई है।
हालांकि हाईकोर्ट ने मामले में धीमी गति पर चिंता भी जताई। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा सूचीबद्ध 248 गवाहों में से अब तक केवल 11 गवाहों के बयान दर्ज हो सके हैं, जबकि 237 गवाहों का परीक्षण अभी शेष है। इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मामले की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित की जाए।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत की मांग को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि आरोपी की भूमिका, उपलब्ध साक्ष्य और अपराध की प्रकृति को देखते हुए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और नरमी बरतना न्याय के हित में नहीं होगा।
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