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Panchkula News: पिता की शहादत के 20 साल बाद बेटी इनायत सेना में बनेंगी अफसर
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माई सिटी रिपोर्टर पंचकूला। पिता की शहादत के वक्त ढाई साल की रहीं इनायत वत्स अब 20 साल बाद सेना में अफसर बनेंगी। पिता के नक्शे-कदम पर चलकर उन्होंने भी देश सेवा के लिए सेना को चुना। मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित मेजर नवनीत वत्स की बेटी अप्रैल में ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) चेन्नई प्रशिक्षण के लिए जाएंगी। पंचकूला निवासी इनायत अपने मां-बाप की इकलौती बेटी हैं।
इनायत वत्स की मां शिवानी ने बताया कि वह अपनी बेटी के फैसले से खुश हैं। अब उनकी बेटी सेना में जाकर अपने पिता के सपने को पूरा करेगी। इनायत वत्स की उम्र तीन साल की भी नहीं थी, जब उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। इनायत वत्स के पिता मेजर नवनीत वत्स देश की सुरक्षा के लिए कश्मीर में शहीद हो गए थे। इनायत जब बड़ी हुईं तो उसे पता चला कि देश की सुरक्षा करते उनके पिता ने शहादत को गले लगाया तो उन्होंने भी ठान लिया कि वह भी अपने पिता के नक्शे-कदम पर चलेगी और राष्ट्र सेवा करेगी। अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए इनायत वत्स ने जी तोड़ मेहनत की और अब पिता की शहीदी के 20 साल बाद वह भी देश सेवा के लिए तैयार है। इनायत के नाना भी आर्मी में कर्नल थे। इनायत अपनी तीसरी पीढ़ी के तौर पर सेना में सेवा देने जा रही हैं।
साल 2003 में शहीद हुए थे मेजर नवनीत वत्स
मेजर नवनीत वत्स साल 2003 में आतंकियों के खिलाफ एक ऑपरेशन के दौरान शहीद हो गए थे। उस समय इनायत की उम्र 2.5 साल थी। श्रीनगर की एक इमारत में आतंकियों से लड़ते मेजर नवनीत वत्स शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। इनायत ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद दिल्ली के हिंदू कॉलेज में राजनीतिशास्त्र से मास्टर्स कर रही हैं। इनायत को हरियाणा सरकार की तरफ से भी गजेटेड ऑफिसर बनाने का ऑफर दिया गया था। इसके बाद उसने इसे स्वीकार नहीं किया और सेना में जाने का फैसला किया।
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इनायत वत्स की मां शिवानी ने बताया कि वह अपनी बेटी के फैसले से खुश हैं। अब उनकी बेटी सेना में जाकर अपने पिता के सपने को पूरा करेगी। इनायत वत्स की उम्र तीन साल की भी नहीं थी, जब उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। इनायत वत्स के पिता मेजर नवनीत वत्स देश की सुरक्षा के लिए कश्मीर में शहीद हो गए थे। इनायत जब बड़ी हुईं तो उसे पता चला कि देश की सुरक्षा करते उनके पिता ने शहादत को गले लगाया तो उन्होंने भी ठान लिया कि वह भी अपने पिता के नक्शे-कदम पर चलेगी और राष्ट्र सेवा करेगी। अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए इनायत वत्स ने जी तोड़ मेहनत की और अब पिता की शहीदी के 20 साल बाद वह भी देश सेवा के लिए तैयार है। इनायत के नाना भी आर्मी में कर्नल थे। इनायत अपनी तीसरी पीढ़ी के तौर पर सेना में सेवा देने जा रही हैं।
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साल 2003 में शहीद हुए थे मेजर नवनीत वत्स
मेजर नवनीत वत्स साल 2003 में आतंकियों के खिलाफ एक ऑपरेशन के दौरान शहीद हो गए थे। उस समय इनायत की उम्र 2.5 साल थी। श्रीनगर की एक इमारत में आतंकियों से लड़ते मेजर नवनीत वत्स शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। इनायत ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद दिल्ली के हिंदू कॉलेज में राजनीतिशास्त्र से मास्टर्स कर रही हैं। इनायत को हरियाणा सरकार की तरफ से भी गजेटेड ऑफिसर बनाने का ऑफर दिया गया था। इसके बाद उसने इसे स्वीकार नहीं किया और सेना में जाने का फैसला किया।
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