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माता सती ने माता सीता बनकर ली भगवान श्रीराम की परीक्षा : कथावाचक रमनीक कृष्ण

Wed, 15 May 2024 04:58 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 15 May 2024 04:58 AM IST
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Mother Sati tested Lord Shri Ram by posing as Mother Sita: Storyteller Ramnik Krishna
संवाद न्यूज एजेंसी
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पंचकूला। सेक्टर-16 के श्री सनातन धर्म मंदिर में सात दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा का आयोजन किया गया। कथावाचक डाॅ. रमनीक कृष्ण ने तीसरे दिन भक्तों को शिव विवाह का प्रसंग सुनाया। तीसरे दिन की कथा सुनाते हुए कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम सीता माता की वन में खोज कर रहे थे।
भगवान शंकर ने श्रीराम को ऊपर से मन ही मन में प्रणाम किया तो माता सती शंकित हो गईं। अरे जो स्त्री वियोग में तड़प रहा है मेरे पतिदेव उन्हें क्यों प्रणाम कर रहे हैं। तब माता सती ने भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने की ठानी और वन में आकर सीता माता का रूप बनाकर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के आगे चलने लगीं। भगवान श्रीराम से उनको पहचान लिया कि माता सीता के रूप में माता सती उनकी परीक्षा लेने आई हैं।
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प्रभु श्रीराम ने सीता रूप में आई सती माता को प्रणाम किया और पूछा मां आप वन में अकेले क्या कर रही हैं। भगवान शंकर कहां हैं। परीक्षा लेने के बाद जब माता सती भगवान शंकर के पास पहुंचीं तो उन्होंने पूछा ली परीक्षा। इस पर माता सती ने कहा कि प्रभु मैंने तो आपकी तरह भगवान राम को प्रणाम किया। इसके बाद भगवान शंकर ने ध्यान करके सारी सच्चाई जान ली। तब भगवान शिव के मन में संकल्प जागृत हुआ कि इसने मेरे स्वामी की पत्नी भगवती सीता का रूप धारण किया है।
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अब से मैं इनको पत्नी नहीं स्वीकार कर सकता। अब इनका त्याग ही श्रेष्ठ धर्म मार्ग होगा। इसके बाद भगवान शंकर 83 हजार वर्ष तक साधना में चले गए थे। पार्वती भगवान शिव के समाधि से जागृत होने की प्रतीक्षा करने लगी। इसी समय प्रजापति दक्ष ने एक यज्ञ रखा जिसमे सब देवताओं को बुलाया परंतु भगवान शिव को यज्ञ में स्थान नही दिया। पार्वती पति को आज्ञा को अवज्ञा करके यज्ञ में गई। परंतु यज्ञ में भगवान शिव का अपमान देखकर मां पार्वती ने अपने ही मन के संकल्प से यज्ञ अग्नि प्रकट की और उसी अग्नि में मां ने अपने प्राणों की आहुति दे दी।
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