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मिलीभगत से बिजली चोरी कराने का मामला : संदेह के घेरे में बिजली निगमों के 100 से अधिक अधिकारी
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चंडीगढ़। मिलीभगत से बिजली चोरी कराने में शामिल बिजली निगम के करीब 100 अधिकारियों और कर्मचारियों की लिस्ट तैयार कर ली गई है। इनमें कंप्यूटर आपरेटर से लेकर शिफ्ट अटेंडेंट, सहायक लाइनमैन, लाइनमैन, जेई, एसडीओ, एक्सईएन और एसई स्तर के अधिकारियों के नाम शामिल हैं। सभी की कुंडली खंगालने के बाद अब बिजली मंत्री रणजीत सिंह ने ऐसे सभी संदिग्ध अधिकारियों को नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। नोटिस के बाद सभी के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई हो सकती है। इसके बाद से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। प्रदेश में इस साल दो बार बड़े स्तर पर बिजली चोरी पकड़ने का अभियान चलाया जा चुका है। फरवरी में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा राज्य के औद्योगिक और अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई थी। उस समय निगम की टीमों ने 4295 कनेक्शन चेक किए, जिनमें से 1411 बिजली चोरों के मामले सामने आए थे। इस दौरान 3037 किलोवाट बिजली चोरी पाई गई। इन पर 5.59 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया। वहीं, जुलाई में पूरे प्रदेश में दो दिन चली चेकिंग में 13985 किलोवाट से अधिक बिजली चोरी के मामलों में लगभग 25.6 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। दोनों निगम की कुल 482 टीमों ने 29948 बिजली के कनेक्शन जांचे और 6015 बिजली चोरी के मामले पकड़े थे।
जांच में सामने आई मिलीभगत
बिजली चोरी की चेकिंग के बाद जांच में कई ऐसे मामले मिले, जिन उपभोक्तों पर लाखों या फिर करोड़ों रुपये का बकाया था और उनके कनेक्शन कटे हुए थे। अधिकारियों ने मिलीभगत करके अवैध तरीके से उनके कनेक्शन चालू कर दिए। साथ ही गुरुग्राम समेत अन्य जिलों में डेवलपर्स को मानकों के खिलाफ जाकर सिंगल प्वाइंट कनेक्शन दिये जाने में भी काफी घोर लापरवाही सामने आई है। अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आने के बाद विभाग के मंत्री रणजीत सिंह ने बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास दोनों निगमों के प्रबंध निदेशकों (एमडी) को विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
एनसीआर में अधिक चोरी
जांच का एक पहलू यह भी है सबसे अधिक बिजली चोरी एनसीआर के इलाके में हो रही है। औद्योगिक कलस्टर के रूप में उभरकर सामने आए गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर, धारूहेड़ा व रेवाड़ी एरिया में चोरी के अधिक मामले सामने आए हैं। यहां पर कई बड़े उद्योग भी हैं। जांच में सामने आया है कि इंडस्ट्रीज में अधिकारियों की मिलीभगत से चोरी कराई गई। इसलिए इसको रोकने के लिए सरकार बड़े एक्शन की तैयारी में है।
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प्रदेश में दो बार की गई चेकिंग में 8 हजार से अधिक प्रतिष्ठानों में बिजली चोरी पकड़ी गई। हमारे पास ऐसी शिकायतें आई थी कि चोरी मिलीभगत से की जा रही है। जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध रही है, उन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। - रणजीत सिंह, बिजली मंत्री।
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जांच में सामने आई मिलीभगत
बिजली चोरी की चेकिंग के बाद जांच में कई ऐसे मामले मिले, जिन उपभोक्तों पर लाखों या फिर करोड़ों रुपये का बकाया था और उनके कनेक्शन कटे हुए थे। अधिकारियों ने मिलीभगत करके अवैध तरीके से उनके कनेक्शन चालू कर दिए। साथ ही गुरुग्राम समेत अन्य जिलों में डेवलपर्स को मानकों के खिलाफ जाकर सिंगल प्वाइंट कनेक्शन दिये जाने में भी काफी घोर लापरवाही सामने आई है। अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आने के बाद विभाग के मंत्री रणजीत सिंह ने बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास दोनों निगमों के प्रबंध निदेशकों (एमडी) को विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
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एनसीआर में अधिक चोरी
जांच का एक पहलू यह भी है सबसे अधिक बिजली चोरी एनसीआर के इलाके में हो रही है। औद्योगिक कलस्टर के रूप में उभरकर सामने आए गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर, धारूहेड़ा व रेवाड़ी एरिया में चोरी के अधिक मामले सामने आए हैं। यहां पर कई बड़े उद्योग भी हैं। जांच में सामने आया है कि इंडस्ट्रीज में अधिकारियों की मिलीभगत से चोरी कराई गई। इसलिए इसको रोकने के लिए सरकार बड़े एक्शन की तैयारी में है।
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प्रदेश में दो बार की गई चेकिंग में 8 हजार से अधिक प्रतिष्ठानों में बिजली चोरी पकड़ी गई। हमारे पास ऐसी शिकायतें आई थी कि चोरी मिलीभगत से की जा रही है। जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध रही है, उन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। - रणजीत सिंह, बिजली मंत्री।