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फादर्स डे पर याद आई पिता की बातें, आंखों से छलक उठे आंसु
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याद आई पिता की बातें, आंखों से छलक उठे आंसू
कोरोना ने छीन लिया कर्ण के सिर से पिता का साया, बोले
पता नहीं था कि इस बार फादर्स डे के दिन व्हाट्स एप पर पिता की डीपी नहीं लगा पाएंगे
फोटो नंबर 03 व 04
संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। पिछले वर्ष जब फादर्स डे आया तो मैने पापा की फोटो व्हाट्सएप की डीपी पर लगाई थी। पापा बहुत खुश हुए पूछा ये क्यों लगा दी तो मैंने उन्हें बताया कि आज फादर्स डे है। इसलिए आपकी फोटो लगा दी। मगर इस बार फादर्स - डे तो आएगा पर पापा अपनी डीपी नहीं देख पाएंगे। यह कहना है कि मुसनौता के कर्ण सिंह का।
कोरोना की क्रूर महामारी ने कर्ण सिंह व उसके तीन बहन भाइयों के सिर से पिता का साया छीन लिया। कर्ण सिंह बताते हैं कि उनके पिता बीएसएफ में सर्विस करते थे। सेवानिवृत्ति के बाद एक प्राइवेट कंपनी में काम करने लगे। पिता का शुरू से शौक था कि उनके बच्चे पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी में जाएं। लिहाजा जब कर्ण सिंह ने 12वीं पास की तो उसका दाखिला इंजीनियरिंग में करवा दिया। समय निकलता गया डिग्री पूरी हुई और अच्छी कंपनी में नौकरी भी मिल गई। पिता हमेशा एक ही बात कहते थे कि जिसको मदद की आवश्यकता हो उसकी मदद अवश्य करनी चाहिए। पिछले साल फादर्स डे की बात को याद करते हुए कर्ण सिंह की आंखों में आंसू छलक आते हैं। कर्ण सिंह ने बताया कि फादर्स डे पर उसने अपने पिता की फोटो व्हाट्स एप डीपी पर लगाई। पिता ने भी फोटो देखी तो बोले ये मेरी फोटो क्यों लगा दी तो मैंने बताया कि आज आपका दिन है यानि फादर्स डे, इसलिए आपकी फोटो लगा ली। वे बहुत खुश हुए और बोले तो मुझे भी अपने पिता की फोटो लगानी चाहिए और दादा की फोटो उन्होंने लगा ली। इस बार फादर्स डे पर उनकी यह बात बहुत याद आ रही है। गांव में वे हमेशा लोगों के बीच में रहते थे। सबसे सुख दुख में साझेदार रहना उनकी खूबी थी। कर्ण सिंह के चचेरे भाई राजेंद्र ने बताया कि चाचा कैलाश अपने आप में गजब व्यक्ति थे। उनके जाने से परिवार में हमेशा उनकी कमी खलती रहेगी।
कर्ण का कहना है कि पिता का 11 मई को कोरोना के कारण निधन हो गया। मगर उनकी बातें हमेशा याद रहेंगी। उन्होंने कहा था कि जरूरतमंद की मदद हमेशा सेवा करनी चाहिए व पढ़ाई से बड़ा साथी दुनिया में नहीं है।
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कोरोना ने छीन लिया कर्ण के सिर से पिता का साया, बोले
पता नहीं था कि इस बार फादर्स डे के दिन व्हाट्स एप पर पिता की डीपी नहीं लगा पाएंगे
फोटो नंबर 03 व 04
संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। पिछले वर्ष जब फादर्स डे आया तो मैने पापा की फोटो व्हाट्सएप की डीपी पर लगाई थी। पापा बहुत खुश हुए पूछा ये क्यों लगा दी तो मैंने उन्हें बताया कि आज फादर्स डे है। इसलिए आपकी फोटो लगा दी। मगर इस बार फादर्स - डे तो आएगा पर पापा अपनी डीपी नहीं देख पाएंगे। यह कहना है कि मुसनौता के कर्ण सिंह का।
कोरोना की क्रूर महामारी ने कर्ण सिंह व उसके तीन बहन भाइयों के सिर से पिता का साया छीन लिया। कर्ण सिंह बताते हैं कि उनके पिता बीएसएफ में सर्विस करते थे। सेवानिवृत्ति के बाद एक प्राइवेट कंपनी में काम करने लगे। पिता का शुरू से शौक था कि उनके बच्चे पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी में जाएं। लिहाजा जब कर्ण सिंह ने 12वीं पास की तो उसका दाखिला इंजीनियरिंग में करवा दिया। समय निकलता गया डिग्री पूरी हुई और अच्छी कंपनी में नौकरी भी मिल गई। पिता हमेशा एक ही बात कहते थे कि जिसको मदद की आवश्यकता हो उसकी मदद अवश्य करनी चाहिए। पिछले साल फादर्स डे की बात को याद करते हुए कर्ण सिंह की आंखों में आंसू छलक आते हैं। कर्ण सिंह ने बताया कि फादर्स डे पर उसने अपने पिता की फोटो व्हाट्स एप डीपी पर लगाई। पिता ने भी फोटो देखी तो बोले ये मेरी फोटो क्यों लगा दी तो मैंने बताया कि आज आपका दिन है यानि फादर्स डे, इसलिए आपकी फोटो लगा ली। वे बहुत खुश हुए और बोले तो मुझे भी अपने पिता की फोटो लगानी चाहिए और दादा की फोटो उन्होंने लगा ली। इस बार फादर्स डे पर उनकी यह बात बहुत याद आ रही है। गांव में वे हमेशा लोगों के बीच में रहते थे। सबसे सुख दुख में साझेदार रहना उनकी खूबी थी। कर्ण सिंह के चचेरे भाई राजेंद्र ने बताया कि चाचा कैलाश अपने आप में गजब व्यक्ति थे। उनके जाने से परिवार में हमेशा उनकी कमी खलती रहेगी।
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कर्ण का कहना है कि पिता का 11 मई को कोरोना के कारण निधन हो गया। मगर उनकी बातें हमेशा याद रहेंगी। उन्होंने कहा था कि जरूरतमंद की मदद हमेशा सेवा करनी चाहिए व पढ़ाई से बड़ा साथी दुनिया में नहीं है।
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