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Panchkula News: जालंधर के गांधी वनिता आश्रम में नाबालिग की संदिग्ध हालात में मौत, स्टेटस रिपोर्ट तलब
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चंडीगढ़। नाबालिग लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में जालंधर स्थित सरकारी संरक्षण गृह गांधी वनिता आश्रम में हुई मौत के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
पंचकूला निवासी राजीव कावटरा ने याचिका में आरोप लगाया गया है कि मामले को हादसा बताकर दबाने की कोशिश की गई जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई गंभीर चोटों का जिक्र सामने आया है। 19 नवंबर 2020 को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, फिरोजपुर ने नाबालिग को राज्य के संरक्षण में रखने का आदेश दिया था।
इसके बाद उसे जालंधर के गांधी वनिता आश्रम में रखा गया। 21 नवंबर 2025 की रात को आश्रम परिसर के अंदर ही नाबालिग की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अगले दिन डीडीआर दर्ज की गई जिसमें मौत का कारण बाथरूम में फिसलकर गिरना बताया गया। हालांकि याचिका में कहा गया है कि यह स्पष्टीकरण कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
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याचिकाकर्ता का दावा है कि पोस्टमार्टम जांच के दौरान नाबालिग के शरीर पर 21 चोटें पाई गईं जो साधारण गिरने की घटना से मेल नहीं खातीं। इसके बावजूद पुलिस ने किसी संज्ञेय अपराध के तहत एफआईआर दर्ज नहीं की और न ही स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित किया गया। यदि किसी संस्थान के भीतर ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है तो यह पूरे बाल संरक्षण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि मामले में उचित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से भी जांच कराने का आदेश दिया जाए ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सके।
साथ ही हाईकोर्ट को बताया गया कि याचिका लंबित रहते एक और मौत का मामला सामने आया है। कोर्ट ने अब पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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पंचकूला निवासी राजीव कावटरा ने याचिका में आरोप लगाया गया है कि मामले को हादसा बताकर दबाने की कोशिश की गई जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई गंभीर चोटों का जिक्र सामने आया है। 19 नवंबर 2020 को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, फिरोजपुर ने नाबालिग को राज्य के संरक्षण में रखने का आदेश दिया था।
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इसके बाद उसे जालंधर के गांधी वनिता आश्रम में रखा गया। 21 नवंबर 2025 की रात को आश्रम परिसर के अंदर ही नाबालिग की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अगले दिन डीडीआर दर्ज की गई जिसमें मौत का कारण बाथरूम में फिसलकर गिरना बताया गया। हालांकि याचिका में कहा गया है कि यह स्पष्टीकरण कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
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याचिकाकर्ता का दावा है कि पोस्टमार्टम जांच के दौरान नाबालिग के शरीर पर 21 चोटें पाई गईं जो साधारण गिरने की घटना से मेल नहीं खातीं। इसके बावजूद पुलिस ने किसी संज्ञेय अपराध के तहत एफआईआर दर्ज नहीं की और न ही स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित किया गया। यदि किसी संस्थान के भीतर ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है तो यह पूरे बाल संरक्षण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि मामले में उचित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से भी जांच कराने का आदेश दिया जाए ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सके।
साथ ही हाईकोर्ट को बताया गया कि याचिका लंबित रहते एक और मौत का मामला सामने आया है। कोर्ट ने अब पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।