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हरियाणा : प्रदेश में बेकार पड़ी भूमि की बाजार दर होगी निर्धारित, सरकार ने जारी की अधिसूचना
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चंडीगढ़। हरियाणा में अब सभी विभागों, बोर्ड, निगमों, पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों की बेकार पड़ी भूमि की बाजार दर निर्धारित हो सकेगी। सरकार ने इसके लिए नई नीति लागू की है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने सोमवार को इसे अधिसूचित कर दिया।
विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि सरकार ने भूमि की दर निर्धारित करने के लिए समितियों का गठन किया हुआ है। इनके अलग-अलग मापदंड होने के कारण कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा था।
इसलिए भूमि का बाजार भाव तय करने में एकरूपता लाने को नीति बनाई है। कई विभाग और इकाइयां अपनी अप्रयुक्त भूमि को हस्तांतरित नहीं कर पा रहे थे। ये भूमि निजी निकायों की परियोजनाओं की जमीनों के बीच बेकार पड़ी हुई हैं। इससे निजी निकायों की परियोजनाओं के तीव्र विकास में भी बाधा आ रही है। जिससे राजस्व काफी हद तक प्रभावित हो रहा है। ऐसी भूमियों व अचल संपतियों पर कब्जा या अनधिकृत स्वामित्व है।
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उन्होंने बताया कि राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग राज्य से संबंधित आयकर विभाग, भारतीय स्टेट बैंक और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों के पंजीकृत मूल्यांकन कर्ताओं को सूचीबद्ध करेगा। इनसे संपत्तियों के बाजार भाव का मूल्यांकन कराया जाएगा। इनके लिए आचार संहिता बनेगी। उल्लंघन की स्थिति में उन्हें पैनल से हटाया जा सकेगा। सबसे पहले समिति में तीन मूल्यांकनकर्ताओं में से एक को संबंधित प्रशासनिक विभाग नामित करेगा। दूसरे मूल्यांकनकर्ता को विपरीत पक्ष का पैनल चुनेगा। तीसरे को दोनों की सहमति के अनुसार चुना जाएगा। यदि तीसरे मूल्यांकनकर्ता पर कोई सहमति नहीं है, तो उसे प्रशासनिक विभाग ही नामित करेगा। इन्हें मूल्यांकन रिपोर्ट अनुरोध किए जाने की तारीख से 10 दिनों के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। तीनों मूल्यांकन कर्ताओं के मूल्यांकन के औसत का आकलन मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। कौशल ने बताया कि स्थायी समिति भूमि के बाजार मूल्य का निर्धारण करेगी, बशर्ते वह कलेक्टर दरों से कम न हो।
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विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि सरकार ने भूमि की दर निर्धारित करने के लिए समितियों का गठन किया हुआ है। इनके अलग-अलग मापदंड होने के कारण कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा था।
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इसलिए भूमि का बाजार भाव तय करने में एकरूपता लाने को नीति बनाई है। कई विभाग और इकाइयां अपनी अप्रयुक्त भूमि को हस्तांतरित नहीं कर पा रहे थे। ये भूमि निजी निकायों की परियोजनाओं की जमीनों के बीच बेकार पड़ी हुई हैं। इससे निजी निकायों की परियोजनाओं के तीव्र विकास में भी बाधा आ रही है। जिससे राजस्व काफी हद तक प्रभावित हो रहा है। ऐसी भूमियों व अचल संपतियों पर कब्जा या अनधिकृत स्वामित्व है।
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उन्होंने बताया कि राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग राज्य से संबंधित आयकर विभाग, भारतीय स्टेट बैंक और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों के पंजीकृत मूल्यांकन कर्ताओं को सूचीबद्ध करेगा। इनसे संपत्तियों के बाजार भाव का मूल्यांकन कराया जाएगा। इनके लिए आचार संहिता बनेगी। उल्लंघन की स्थिति में उन्हें पैनल से हटाया जा सकेगा। सबसे पहले समिति में तीन मूल्यांकनकर्ताओं में से एक को संबंधित प्रशासनिक विभाग नामित करेगा। दूसरे मूल्यांकनकर्ता को विपरीत पक्ष का पैनल चुनेगा। तीसरे को दोनों की सहमति के अनुसार चुना जाएगा। यदि तीसरे मूल्यांकनकर्ता पर कोई सहमति नहीं है, तो उसे प्रशासनिक विभाग ही नामित करेगा। इन्हें मूल्यांकन रिपोर्ट अनुरोध किए जाने की तारीख से 10 दिनों के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। तीनों मूल्यांकन कर्ताओं के मूल्यांकन के औसत का आकलन मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। कौशल ने बताया कि स्थायी समिति भूमि के बाजार मूल्य का निर्धारण करेगी, बशर्ते वह कलेक्टर दरों से कम न हो।