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Panchkula News: डिजिटल अरेस्ट कर लाखों ठगने वाला हैदराबाद से गिरफ्तार

Tue, 05 May 2026 02:28 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 05 May 2026 02:28 AM IST
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Man who duped people of lakhs through digital arrest arrested from Hyderabad
पंचकूला। साइबर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए पिंजौर के एक 70 वर्षीय रिटायर्ड सुपरवाइजर से 80 लाख रुपये से अधिक की ठगी करने वाले गिरोह के दूसरे सदस्य को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी पाथुकर मुरली कृष्ण ने ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए बाकायदा एक फर्जी कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम पर बैंक खाते खुलवाए थे। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि एक अन्य आरोपी सौरभ कुमार पहले ही सलाखों के पीछे है।
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आधार कार्ड और मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर जाल में फंसाया
ठगों ने पीड़ित को कॉल कर खुद को टीआरएआई, सीबीआई और महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताया। उन्होंने बुजुर्ग को डराया कि उनके आधार कार्ड से जुड़े सिम कार्ड के जरिए भारी वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का खौफ पैदा कर ठगों ने बुजुर्ग को व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। डर के मारे पीड़ित ने ठगों के झांसे में आकर अलग-अलग किस्तों में कुल 80,09,500 रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगी का अहसास होने पर 19 जनवरी 2026 को साइबर थाना में मामला दर्ज कराया गया।
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फर्जी रेंट एग्रीमेंट से बनाई कंपनी, 62 लाख एक ही खाते में पहुंचे
थाना प्रभारी युद्धवीर सिंह और जांच अधिकारी एएसआई रविंदर की टीम ने जब तकनीकी और बैंक खातों का विश्लेषण किया, तो हैदराबाद की जीएसआर कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर नामक कंपनी का संदिग्ध खाता सामने आया। पुलिस को पता चला कि ठगी की पहली बड़ी किस्त के 62 लाख रुपये इसी खाते में गए थे। हैदराबाद में छापेमारी के दौरान पकड़ा गया मुरली कृष्ण इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड निकला। उसने पुलिस पूछताछ में कबूला कि उसने फर्जी रेंट एग्रीमेंट और पार्टनरशिप डीड तैयार कर यह कंपनी सिर्फ अवैध लेनदेन को वैध दिखाने के लिए बनाई थी। पुलिस ने मौके से फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए हैं।
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पुलिस कभी वीडियो कॉल पर नहीं करती गिरफ्तार-डीसीपी क्राइम
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह ने आम जनता से अपील की है कि वे इस नए तरह के साइबर अपराध से सावधान रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस विभाग व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करता और न ही कभी पैसों की मांग की जाती है। डीसीपी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को ऐसा कोई संदिग्ध कॉल आता है, तो वे घबराने के बजाय तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है ताकि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।
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