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जज पर निराधार आरोप लगाना न्याय की धारा प्रदूषित करने जैसा: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पत्नी के भाई के प्रभाव में काम करने का जिला जज पर आरोप लगाते हुए मामला स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए इसे न्याय की धारा को प्रदूषित करने वाला करार दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पति ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब के फाजिल्का में 2017 में उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ परेशान करने और मारपीट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। याची ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि मामले को फाजिल्का से या तो चंडीगढ़ या हरियाणा के किसी जिले में स्थानांतरित किया जाए। याचिका में बताया गया कि जिस जिले में यह केस चल रहा है वहां उसकी पत्नी के भाई बार के सक्रिय सदस्य हैं और पीठासीन अधिकारी और सत्र न्यायाधीश उससे प्रभावित हैं।
याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि जब याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट से जमानत मिली, तो उसे धमकी दी गई कि पत्नी के परिवार वाले मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाएगे और याचिकाकर्ता के पूरे परिवार को बख्शा नहीं जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते समय उसके साले के प्रभाव में काम किया, यह दलील पूरी तरह से गलत है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की दलील कानून और न्यायालय की गरिमा के विरुद्ध हैं। याची के साले की साख, उसका वकील होना और राजनीतिक दल की युवा शाखा का पूर्व अध्यक्ष होना किसी भी तरह से मामले की जांच और सुनवाई को प्रभावित नहीं करता है। याचिकाकर्ता के आचरण से यह भी पता चलता है कि उसने अनुचित लाभ प्राप्त करने के इरादे से जानबूझकर झूठी दलीलें दी हैं। याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों में न्याय की धारा को प्रदूषित करने की प्रवृत्ति है। याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप बिना किसी सामग्री के हैं जो स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण हैं। यह इस मुद्दे को गैरकानूनी रूप से सनसनीखेज बनाने के इरादे से है।
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याचिका दाखिल करते हुए पति ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब के फाजिल्का में 2017 में उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ परेशान करने और मारपीट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। याची ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि मामले को फाजिल्का से या तो चंडीगढ़ या हरियाणा के किसी जिले में स्थानांतरित किया जाए। याचिका में बताया गया कि जिस जिले में यह केस चल रहा है वहां उसकी पत्नी के भाई बार के सक्रिय सदस्य हैं और पीठासीन अधिकारी और सत्र न्यायाधीश उससे प्रभावित हैं।
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याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि जब याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट से जमानत मिली, तो उसे धमकी दी गई कि पत्नी के परिवार वाले मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाएगे और याचिकाकर्ता के पूरे परिवार को बख्शा नहीं जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते समय उसके साले के प्रभाव में काम किया, यह दलील पूरी तरह से गलत है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की दलील कानून और न्यायालय की गरिमा के विरुद्ध हैं। याची के साले की साख, उसका वकील होना और राजनीतिक दल की युवा शाखा का पूर्व अध्यक्ष होना किसी भी तरह से मामले की जांच और सुनवाई को प्रभावित नहीं करता है। याचिकाकर्ता के आचरण से यह भी पता चलता है कि उसने अनुचित लाभ प्राप्त करने के इरादे से जानबूझकर झूठी दलीलें दी हैं। याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों में न्याय की धारा को प्रदूषित करने की प्रवृत्ति है। याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप बिना किसी सामग्री के हैं जो स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण हैं। यह इस मुद्दे को गैरकानूनी रूप से सनसनीखेज बनाने के इरादे से है।