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शहीद मेजर अनुज राजपूत को अंतिम सलामी, पिता ने दी मुखाग्नि
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मुखाग्नि देते पिता।
- फोटो : PKL OFFICE
पंचकूला। जम्मू - कश्मीर के पटनीटॉप में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में शहीद हुए मेजर अनुज राजपूत का पार्थिव शरीर बुधवार दोपहर को पूरे सैनिक सम्मान के साथ पंचकूला सेक्टर-20 स्थित उनके घर लाया गया। इस बीच माहौल बेहद गमगीन हो गया। मेजर अनुज के पिता केएस आर्य और माता उषा देवी इकलौते बेटे का शव देख बिलख पड़े। पिता ने बेटे को सेक्टर-20 के श्मशानघाट में मुखाग्नि दी। सैन्य सम्मान के साथ मेजर अनुज राजपूत को अंतिम सलामी दी गई।
जम्मू से सुबह लगभग साढ़े 11 बजे मेजर अनुज राजपूत का पार्थिव शरीर पंचकूला पहुंचा। कॉलोनी के अलावा आसपास के सेक्टरों के लोग भी उनके अंतिम दर्शन के लिए भारी संख्या में वहां जमा थे। जैसे ही वैन उनका पार्थिव शरीर लेकर सेक्टर 20 की सोसायटी नंबर 104 में पहुंची, तो लोगों ने अनुज राजपूत अमर रहें के नारे लगाए। जैसे ताबूत से अनुज राजपूत के पार्थिव शरीर को निकाला गया, सभी की आंखें नम हो गईं। हर कोई अनुज की शहादत से दुखी था। अंतिम दर्शनों के बाद सेक्टर- 20 के श्मशानघाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। श्रद्धांजलि देने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि 26 वर्ष की आयु में अनुज राजपूत शहीद हो गए। माता-पिता को नमन है, जिन्होंने इकलौता बेटा देश को सौंप दिया। ऐसे जवानों पर हमें नाज है। पंचकूला के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर मेजर अनुज राजपूत के पार्थिव शरीर को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि धन्य हैं ऐसे माता-पिता जिन्होंने अनुज जैसे वीर सपूत को जन्म दिया। वे प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें।
एडवोकेट केएस आर्य घर जन्मे अनुज राजपूत अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। अनुज राजपूत की 12वीं तक पढ़ाई चंडीगढ़ में हुई। उसके बाद एनडीए की पढ़ाई करने देहरादून चले गए थे। वर्ष 2015 में वह मेजर बन गए थे। 18 सितंबर को जन्मदिन था। 26 वर्षीय 2015 में मेजर बने थे। 25 अगस्त को दिल्ली की एक लड़की के साथ सगाई हुई थी। फरवरी में उनकी शादी होने वाली थी। परिवार तैयारियों में जुटा था कि दुखों का पहाड़ा उन पर टूट पड़ा।
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जम्मू से सुबह लगभग साढ़े 11 बजे मेजर अनुज राजपूत का पार्थिव शरीर पंचकूला पहुंचा। कॉलोनी के अलावा आसपास के सेक्टरों के लोग भी उनके अंतिम दर्शन के लिए भारी संख्या में वहां जमा थे। जैसे ही वैन उनका पार्थिव शरीर लेकर सेक्टर 20 की सोसायटी नंबर 104 में पहुंची, तो लोगों ने अनुज राजपूत अमर रहें के नारे लगाए। जैसे ताबूत से अनुज राजपूत के पार्थिव शरीर को निकाला गया, सभी की आंखें नम हो गईं। हर कोई अनुज की शहादत से दुखी था। अंतिम दर्शनों के बाद सेक्टर- 20 के श्मशानघाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। श्रद्धांजलि देने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि 26 वर्ष की आयु में अनुज राजपूत शहीद हो गए। माता-पिता को नमन है, जिन्होंने इकलौता बेटा देश को सौंप दिया। ऐसे जवानों पर हमें नाज है। पंचकूला के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर मेजर अनुज राजपूत के पार्थिव शरीर को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि धन्य हैं ऐसे माता-पिता जिन्होंने अनुज जैसे वीर सपूत को जन्म दिया। वे प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें।
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एडवोकेट केएस आर्य घर जन्मे अनुज राजपूत अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। अनुज राजपूत की 12वीं तक पढ़ाई चंडीगढ़ में हुई। उसके बाद एनडीए की पढ़ाई करने देहरादून चले गए थे। वर्ष 2015 में वह मेजर बन गए थे। 18 सितंबर को जन्मदिन था। 26 वर्षीय 2015 में मेजर बने थे। 25 अगस्त को दिल्ली की एक लड़की के साथ सगाई हुई थी। फरवरी में उनकी शादी होने वाली थी। परिवार तैयारियों में जुटा था कि दुखों का पहाड़ा उन पर टूट पड़ा।
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