शिरोमणि अकाली दल सहित आठ दलों ने वीरवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से आठ पार्टियों की अगुवाई करते हुए मांग की कि वह संसद में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के इस दावे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय कमेटी (जेपीसी) का गठन करें, जिसमें कहा है कि केंद्र के पास चल रहे किसान आंदोलन में किसानों की मौतों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इस संबंध में शनिवार को सभी दल राष्ट्रपति से मिलने जाएंगे। कांग्रेस से भी इसमें शामिल होने की अपील की गई है।
इस संबंध में शिरोमणि अकाली दल, बसपा, एनसीपी, सीपीआई, सीपीआई-एम, आरएलपी, जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस तथा शिवसेवा ने लोकसभा अध्यक्ष को एक विरोध पत्र सौंपा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे शनिवार को राष्ट्रपति से मिलने वाले सांसदों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल हों, ताकि केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की जा सके और संसद में तीनों खेती कानूनों को निरस्त करने की चर्चा की जाए। हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि सांसदों ने बताया कि कृषि मंत्री ने यह कहकर गंभीर चूक की है कि केंद्र सरकार के पास किसान आंदोलन के दौरान किसानों की मौतों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। यह अन्नदाता के बलिदानों को भूलाने वाली बात है, जो आठ माह से तीनों काले कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री की ओर से किसान आंदोलन के दौरान मारे गए 537 किसानों के शहीद होने का स्पष्ट सबूत होने के बावजूद यह दावा हैरान करने वाला है।