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जमीन की फर्जी तरीके से एनओसी जारी करने वाले दो कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज
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पंचकूला। जमीन की फर्जी तरीके से एनओसी जारी करने के आरोप में एक ठेका कर्मचारी और दूसरे क्लर्क के खिलाफ सेक्टर-7 थाना पुलिस में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की पहचान उदेश पाल, डाटा एंट्री ऑपरेटर (कांट्रेक्ट कर्मचारी) और राज कुमार क्लर्क कार्यालय डीटीपी के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक एचडीआर अधिनियम के प्रावधान के मुताबिक शहरी क्षेत्र पंचकूला में किसी भी जमीन की बिक्री विलेख के पंजीकरण के लिए एनओसी की आवश्यकता होती है। एनओसी प्रदान करने के लिए आवेदन के साथ भूमि के शीर्षक की प्रति, पंजीकरण डीड की ड्राफ्ट कॉपी और आवेदक का आधार कार्ड की कॉपी लगती है। एनओसी को मंजूरी मिलने की स्थिति में प्रमाणपत्र की प्रति अपलोड की जाती है और संबंधित सब-रजिस्ट्रार को वेब हैलरिस के पोर्टल पर भेजी जाती है। कुछ समय पहले अधिकारियों के संज्ञान में यह आया है कि कुछ जाली एनओसी जारी की गई है। जिस जमीन पर एनओसीएस जारी नहीं की सकी, उसके लिए विभाग के पोर्टल पर कार्यालय की ओर से एनओसी जारी की जा रही है। विभाग की ओर से मामले की जांच की गई तो पता चला कि एनओसी के कुल मामलों में से 19 अलग-अलग तारीखों पर फर्जी एनओसी जारी की गई हैं।
यह भी सामने आया है कि संबंधित अधिकारी के जाली/स्कैन किए गए हस्ताक्षरों के साथ पोर्टल के माध्यम से कार्यालय की ओर से दस्तावेजों/साइट की स्थिति की किसी भी जांच के बिना जारी किए गए थे। यानी पटवारी, जेई या जिला टाउन प्लानर। इसके अलावा, एचडीआर अधिनियम की धारा-7ए एनओसी जारी करने के लिए अधिकतम 30 दिनों की अवधि प्रदान करती है। आम तौर पर कार्यालय द्वारा संबंधित दस्तावेजों की जांच करने और फिर एनओसी जारी करने में एक से दो सप्ताह लगते हैं। हालांकि सूची से पता चला है कि आवेदन प्राप्त होने के 10 मिनट से 30 मिनट की अवधि के भीतर एनओसी जारी की गई है और वह भी कार्यालय समय के बाद।
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वहीं, कुछ मामलों में आवेदन प्राप्त होने के सात मिनट के भीतर एनओसी जारी की गई थी। इस मामले की आगे जांच की गई और यह पाया गया कि आरोपियों ने आधिकारिक ई-मेल आईडी का धोखाधड़ी से इस्तेमाल किया था। उदेश पाल ने राजकुमार के साथ मिलकर फर्जी एनओसी जारी करने और हस्ताक्षर को स्कैन करके जारी करने में संलिप्तता को लिखित रूप में भी स्वीकार किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पुलिस के मुताबिक एचडीआर अधिनियम के प्रावधान के मुताबिक शहरी क्षेत्र पंचकूला में किसी भी जमीन की बिक्री विलेख के पंजीकरण के लिए एनओसी की आवश्यकता होती है। एनओसी प्रदान करने के लिए आवेदन के साथ भूमि के शीर्षक की प्रति, पंजीकरण डीड की ड्राफ्ट कॉपी और आवेदक का आधार कार्ड की कॉपी लगती है। एनओसी को मंजूरी मिलने की स्थिति में प्रमाणपत्र की प्रति अपलोड की जाती है और संबंधित सब-रजिस्ट्रार को वेब हैलरिस के पोर्टल पर भेजी जाती है। कुछ समय पहले अधिकारियों के संज्ञान में यह आया है कि कुछ जाली एनओसी जारी की गई है। जिस जमीन पर एनओसीएस जारी नहीं की सकी, उसके लिए विभाग के पोर्टल पर कार्यालय की ओर से एनओसी जारी की जा रही है। विभाग की ओर से मामले की जांच की गई तो पता चला कि एनओसी के कुल मामलों में से 19 अलग-अलग तारीखों पर फर्जी एनओसी जारी की गई हैं।
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यह भी सामने आया है कि संबंधित अधिकारी के जाली/स्कैन किए गए हस्ताक्षरों के साथ पोर्टल के माध्यम से कार्यालय की ओर से दस्तावेजों/साइट की स्थिति की किसी भी जांच के बिना जारी किए गए थे। यानी पटवारी, जेई या जिला टाउन प्लानर। इसके अलावा, एचडीआर अधिनियम की धारा-7ए एनओसी जारी करने के लिए अधिकतम 30 दिनों की अवधि प्रदान करती है। आम तौर पर कार्यालय द्वारा संबंधित दस्तावेजों की जांच करने और फिर एनओसी जारी करने में एक से दो सप्ताह लगते हैं। हालांकि सूची से पता चला है कि आवेदन प्राप्त होने के 10 मिनट से 30 मिनट की अवधि के भीतर एनओसी जारी की गई है और वह भी कार्यालय समय के बाद।
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वहीं, कुछ मामलों में आवेदन प्राप्त होने के सात मिनट के भीतर एनओसी जारी की गई थी। इस मामले की आगे जांच की गई और यह पाया गया कि आरोपियों ने आधिकारिक ई-मेल आईडी का धोखाधड़ी से इस्तेमाल किया था। उदेश पाल ने राजकुमार के साथ मिलकर फर्जी एनओसी जारी करने और हस्ताक्षर को स्कैन करके जारी करने में संलिप्तता को लिखित रूप में भी स्वीकार किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।