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भारत की वैज्ञानिक प्रगति केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे : डॉ. जितेंद्र
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पंचकूला। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को पंचकूला में चार दिवसीय इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) के 11वें संस्करण का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम तीन सी सेलिब्रेशन, कम्युनिकेशन और कॅरिअर के आधार पर तैयार किया गया है।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि नागरिकों, छात्रों और युवा पेशेवरों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। उद्घाटन समारोह में हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी भी मौजूद रहे।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि आईआईएसएफ को केवल अकादमिक सभा के रूप में नहीं बल्कि एक खुले, सार्वजनिक मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य विज्ञान को आम लोगों के और करीब लाना और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े लाभार्थियों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि यह फेस्टिवल विभिन्न विज्ञान मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग की सरकारी प्राथमिकता को भी दर्शाता है।
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डॉ. सिंह ने आईआईएसएफ को विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी देश के आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला हैं। पिछले दशक में भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में मिशन मोड में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिसमें सुधार, मजबूत बुनियादी ढांचा और प्रतिभा विकास शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज वैज्ञानिक प्रगति शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में भी सीधे योगदान दे रही है चाहे वह बेहतर मौसम पूर्वानुमान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, ध्रुवीय अनुसंधान या डिजिटल नवाचार हो।
फेस्टिवल में क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, ब्लू इकोनॉमी और डीप-टेक एंटरप्रेन्योरशिप पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। उद्घाटन समारोह में उपायुक्त सतपाल शर्मा, पुलिस उपायुक्त सृष्टि गुप्ता, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, युवा और छात्र उपस्थित थे।
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डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि नागरिकों, छात्रों और युवा पेशेवरों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। उद्घाटन समारोह में हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी भी मौजूद रहे।
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उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि आईआईएसएफ को केवल अकादमिक सभा के रूप में नहीं बल्कि एक खुले, सार्वजनिक मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य विज्ञान को आम लोगों के और करीब लाना और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े लाभार्थियों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि यह फेस्टिवल विभिन्न विज्ञान मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग की सरकारी प्राथमिकता को भी दर्शाता है।
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डॉ. सिंह ने आईआईएसएफ को विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी देश के आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला हैं। पिछले दशक में भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में मिशन मोड में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिसमें सुधार, मजबूत बुनियादी ढांचा और प्रतिभा विकास शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज वैज्ञानिक प्रगति शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में भी सीधे योगदान दे रही है चाहे वह बेहतर मौसम पूर्वानुमान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, ध्रुवीय अनुसंधान या डिजिटल नवाचार हो।
फेस्टिवल में क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, ब्लू इकोनॉमी और डीप-टेक एंटरप्रेन्योरशिप पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। उद्घाटन समारोह में उपायुक्त सतपाल शर्मा, पुलिस उपायुक्त सृष्टि गुप्ता, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, युवा और छात्र उपस्थित थे।