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यूक्रेन और चीन में 15 से 20 लाख में एमबीबीएस, हरियाणा में 40 लाख फीस
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चंडीगढ़। हरियाणा में महंगी हुई एमबीबीएस की फीस का असर है कि पिछले एक साल में प्रदेश के विद्यार्थियों ने यूक्रेन और चीन का रुख किया है। अकेले यूक्रेन में ही पिछले साल यहां से 500 से अधिक बच्चे एमबीबीएस करने गए। इसी प्रकार हर साल चीन में भी युवा कोर्स के लिए जा रहे हैं। इन देशों में 16 से 25 लाख में यह डिग्री पूरी हो जाती है। जबकि प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इसकी फीस करीब 40 लाख रुपये तक पड़ती है। निजी कॉलेजों में तो 1 करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये तक वसूले जाते हैं।
पहले हरियाणा में एमबीबीएस की फीस सालाना 53 हजार रुपये होती थी। वर्ष 2020 में नई पॉलिसी तय कर मनोहर सरकार ने कई गुना बढ़ोतरी कर एक साल की फीस करीब 10 लाख रुपये तय कर दी। नई पॉलिसी लागू होने के चलते अब काफी संख्या में टॉपर बच्चे भी सस्ती पढ़ाई के लिए राज्य में दाखिला न लेकर दूसरे प्रदेशों या फिर विदेश जा रहे हैं। अकेले यूक्रेन में ही 2000 से अधिक बच्चे एमबीबीएस कर रहे थे, जो रूस के हमले के बाद यूक्रेन से लौटे हैं। बच्चों के विदेश जाने से प्रदेश का पैसा भी बाहर जा रहेा है। हालांकि, प्रदेश सरकार की ओर से एमबीबीएस कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के लिए लोन की व्यवस्था की गई है। यदि अभ्यर्थी पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी करके सरकारी नौकरी के लिए चयनित हो जाता है, तब सरकार उसके लोन की किस्तें भरेगी। इसमें मूल और ब्याज सब शामिल होगा।
‘पॉलिसी पर दोबारा विचार करे सरकार’
यूक्रेन में पढ़ने वाले अमित, रोहित ने बताया कि हरियाणा में अन्य प्रदेशों से भी अधिक फीस है। इसलिए अच्छा रैंक होने के बावजूद उनको दूसरे देश या फिर प्रदेशों में कोर्स के लिए जाना पड़ रहा है। वहीं, दूसरे राज्यों में पढ़ रहे तरुण और अमृत ने कहा कि प्रदेश सरकार को इस पॉलिसी पर दोबारा से विचार करना चाहिए। साथ ही निजी कॉलेजों की फीस पर भी नियंत्रण किया जाए। यहां पर एक करोड़ तक रुपये लिए जा रहे हैं।
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13 मेडिकल कॉलेज, 1850 सीटें
हरियाणा में 5 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। इनके अलावा, एक सरकारी सहायता प्राप्त और सात निजी मेडिकल कॉलेज हैं। प्रदेश में कुल 1850 सीटें हैं। हालांकि, प्रदेश में हर साल लाखों की संख्या में युवा नीट का पेपर देते हैं। मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञ बताते हैं कि बाहर जाने वाले अधिकतर वे विद्यार्थी होते हैं जिनकी रैंक कम होती है या फिर अच्छी रैंक होने के बावजूद अर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती।
2025 तक 3035 होंगी एमबीबीएस सीटें
हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि हर जिले में मेडिकल कॉलेज हो। इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। पहले के मुकाबले एमबीबीएस की सीटें भी बढ़ाई गई हैं। प्रधानमंत्री निजी मेडिकल कॉलेजों से फीस कम करने के लिए अपील कर चुके हैं, ताकि युवाओं को पढ़ाई के लिए बाहर न जाना पड़े। वर्ष 2025 तक 3035 एमबीबीएस सीटें होंगी। - मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा।
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पहले हरियाणा में एमबीबीएस की फीस सालाना 53 हजार रुपये होती थी। वर्ष 2020 में नई पॉलिसी तय कर मनोहर सरकार ने कई गुना बढ़ोतरी कर एक साल की फीस करीब 10 लाख रुपये तय कर दी। नई पॉलिसी लागू होने के चलते अब काफी संख्या में टॉपर बच्चे भी सस्ती पढ़ाई के लिए राज्य में दाखिला न लेकर दूसरे प्रदेशों या फिर विदेश जा रहे हैं। अकेले यूक्रेन में ही 2000 से अधिक बच्चे एमबीबीएस कर रहे थे, जो रूस के हमले के बाद यूक्रेन से लौटे हैं। बच्चों के विदेश जाने से प्रदेश का पैसा भी बाहर जा रहेा है। हालांकि, प्रदेश सरकार की ओर से एमबीबीएस कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के लिए लोन की व्यवस्था की गई है। यदि अभ्यर्थी पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी करके सरकारी नौकरी के लिए चयनित हो जाता है, तब सरकार उसके लोन की किस्तें भरेगी। इसमें मूल और ब्याज सब शामिल होगा।
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‘पॉलिसी पर दोबारा विचार करे सरकार’
यूक्रेन में पढ़ने वाले अमित, रोहित ने बताया कि हरियाणा में अन्य प्रदेशों से भी अधिक फीस है। इसलिए अच्छा रैंक होने के बावजूद उनको दूसरे देश या फिर प्रदेशों में कोर्स के लिए जाना पड़ रहा है। वहीं, दूसरे राज्यों में पढ़ रहे तरुण और अमृत ने कहा कि प्रदेश सरकार को इस पॉलिसी पर दोबारा से विचार करना चाहिए। साथ ही निजी कॉलेजों की फीस पर भी नियंत्रण किया जाए। यहां पर एक करोड़ तक रुपये लिए जा रहे हैं।
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13 मेडिकल कॉलेज, 1850 सीटें
हरियाणा में 5 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। इनके अलावा, एक सरकारी सहायता प्राप्त और सात निजी मेडिकल कॉलेज हैं। प्रदेश में कुल 1850 सीटें हैं। हालांकि, प्रदेश में हर साल लाखों की संख्या में युवा नीट का पेपर देते हैं। मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञ बताते हैं कि बाहर जाने वाले अधिकतर वे विद्यार्थी होते हैं जिनकी रैंक कम होती है या फिर अच्छी रैंक होने के बावजूद अर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती।
2025 तक 3035 होंगी एमबीबीएस सीटें
हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि हर जिले में मेडिकल कॉलेज हो। इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। पहले के मुकाबले एमबीबीएस की सीटें भी बढ़ाई गई हैं। प्रधानमंत्री निजी मेडिकल कॉलेजों से फीस कम करने के लिए अपील कर चुके हैं, ताकि युवाओं को पढ़ाई के लिए बाहर न जाना पड़े। वर्ष 2025 तक 3035 एमबीबीएस सीटें होंगी। - मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा।