{"_id":"68bc9b2c79477eb8040d0ae2","slug":"in-some-cases-the-long-and-difficult-trial-process-itself-becomes-the-punishment-the-situation-is-extremely-serious-panchkula-news-c-16-1-pkl1098-811890-2025-09-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: कहीं- मुकदमे की लंबी और कठिन प्रक्रिया ही सजा बन जाए, स्थिति बेहद गंभीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: कहीं- मुकदमे की लंबी और कठिन प्रक्रिया ही सजा बन जाए, स्थिति बेहद गंभीर
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार आरोपी को 5 साल जेल में बिताने के बाद जमानत देते हुए कहा है कि हम नहीं चाहते कि मुकदमे की लंबी और कठिन प्रक्रिया ही सजा बन जाए, स्थिति बेहद गंभीर दी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य यह अनुमान लगाने में असमर्थ है कि आपराधिक मुकदमा कब समाप्त होने की संभावना है। इसमें सुधार जरूरी है। कपूरथला निवासी सुखजिंदर सिंह पर आरोप है कि उसके कब्जे से एक पिस्तौल और 50,000 रुपये की ड्रग मनी की बरामदगी हुई थी। उस पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी सुखजिंदर ने 5 साल और 2 महीने से ज्यादा जेल में बिताए और 2021 में आरोप पत्र दायर होने के बावजूद मुकदमे के दौरान सभी 36 गवाहों से पूछताछ होनी बाकी है।
अदालत ने कहा कि राज्य के रवैए के कारण अदालत के पास अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वह ऐसी स्थिति को रोकना चाहती है जहां मुकदमे की लंबी और कठिन प्रक्रिया ही सजा बन जाए। संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के मौलिक अधिकार को सुनिश्चित करता है जिसमें शीघ्र सुनवाई का अधिकार भी शामिल है। सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णय लंबी हिरासत अपने आप में यूएपीए के तहत अभियुक्त को संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देकर जमानत का हकदार बनाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य यह अनुमान लगाने में असमर्थ है कि आपराधिक मुकदमा कब समाप्त होने की संभावना है। इसमें सुधार जरूरी है। कपूरथला निवासी सुखजिंदर सिंह पर आरोप है कि उसके कब्जे से एक पिस्तौल और 50,000 रुपये की ड्रग मनी की बरामदगी हुई थी। उस पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी सुखजिंदर ने 5 साल और 2 महीने से ज्यादा जेल में बिताए और 2021 में आरोप पत्र दायर होने के बावजूद मुकदमे के दौरान सभी 36 गवाहों से पूछताछ होनी बाकी है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि राज्य के रवैए के कारण अदालत के पास अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वह ऐसी स्थिति को रोकना चाहती है जहां मुकदमे की लंबी और कठिन प्रक्रिया ही सजा बन जाए। संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के मौलिक अधिकार को सुनिश्चित करता है जिसमें शीघ्र सुनवाई का अधिकार भी शामिल है। सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णय लंबी हिरासत अपने आप में यूएपीए के तहत अभियुक्त को संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देकर जमानत का हकदार बनाती है।
विज्ञापन