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कोरोना का असर.. अब तक रफ्तार नहीं पकड़ सका उद्योग
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पंचकूला। जिले का उद्योग कोरोना काल में ऐसे चौपट हुआ कि अब तक उबर नहीं सका है। इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के अनुसार औसतन चार सौ करोड़ रुपये का धंधा चौपट हो गया है। आटो मोबाइल इंडस्ट्री हो या पोल्ट्री, फर्नीचर इंडस्ट्री सभी उद्योग कोरोना के कारण जमीन पर आ गिरे। मार्च 2020 के मध्य से उद्योग पर अवरोध लगा तो सप्लाई चेन टूट गई। इसके साथ ही बाहर से आने वाला माल भी बंद हो गया। इतना ही नहीं, कारीगरों का पलायन भी हो गया।
नतीजा यह हुआ कि जब दोबारा से इंडस्ट्री खुली तो हालात एकदम बदल गए। जिले के उद्यमियों ने बताया कि पंचकूला में मार्च के मध्य से लॉकडाउन लग गया था। ऐसे में इंडस्ट्री भी बंद हो गई। जो पुराने आर्डर थे वह नहीं पूरे हो सके और जो नए आर्डर कैंसल हो गए। जो जमा पूंजी थी उससे कर्मचारियों को वेतन दिया गया, किसी तरह से काम चलाया गया। इसके बाद जब लॉकडाउन खत्म हुआ तो फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर तक नहीं मिले।
पोल्ट्री को सौ करोड़ से ज्यादा का नुकसान
पंचकूला में पोल्ट्री इंडस्ट्री एक बड़ी इंडस्ट्री है। लॉकडाउन लगा तो उस समय बर्ड को खाने की फीड तक नहीं मिली। इस वजह से काफी बर्ड मर गईं। पोल्ट्री उद्योग से जुड़े एक उद्यमी के अनुसार कोरोना की वजह से करीब अस्सी फीसदी काम चौपट हो गया था। जिससे करीब सौ करोड़ का नुकसान हो गया।
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पंचकूला के फर्नीचर उद्योग को कोरोना काल की वजह से काफी ज्यादा घाटा उठाना पड़ा। जब लॉकडाउन लगा तो काम काफी ज्यादा था। सारा काम बंद करना पड़ा। जो पुराने आर्डर पड़े थे उनको पूरा नहीं किया जा सका। इसके साथ ही नए आर्डर नहीं आए। लॉकडाउन हटा तो मजदूरों की समस्या हो गई। - राकेश गर्ग, उद्यमी
पंचकूला में हमारा ग्लास का काम है। हमारा सारा काम ज्यादातर क्रिएटिव होता है। इसके साथ ही माल बाहर से आता है। जैसे ही लॉकडाउन लगा तो बाहर से आने वाला आयात बंद हो गया। इस वजह से सारी सप्लाई चेन टूट गई। अब तक यह ठीक नहीं हो सकी है। - दिनेश कुमार
उद्यमी
कोरोना काल के दौरान चार माह काम प्रभावित रहा। मार्च के मध्य से लेकर जुलाई के मध्य तक सारा काम बंद रहा। अगस्त के माह में काम ने थोड़ी रफ्तार पकड़ी लेकिन उसके बाद समस्या मजदूरों की आ गई। इसके साथ ही आयात भी बंद हो गया। अब कोरोना के मामले दोबारा बढ़ रहे हैं तो स्थिति ठीक नहीं लग रही है। - विवेक गुप्ता, उद्यमी
पोल्ट्री इंडस्ट्री पर कोरोना का काफी ज्यादा असर रहा। करीब अस्सी फीसदी इंडस्ट्री खत्म हो गई। उस समय गाड़ियां बंद हो गईं थीं, ट्रक चल नहीं रहे थे। क्या करते, बर्ड को फीड नहीं मिली तो काफी बर्ड खत्म हो गईं। जो भूखी रहीं उनको पालने में काफी ज्यादा खर्च आया। मेरे अनुमान से पोल्ट्री इंडस्ट्री को सौ करोड़ का घाटा हुआ। - दर्शन सिंगला, प्रधान
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नतीजा यह हुआ कि जब दोबारा से इंडस्ट्री खुली तो हालात एकदम बदल गए। जिले के उद्यमियों ने बताया कि पंचकूला में मार्च के मध्य से लॉकडाउन लग गया था। ऐसे में इंडस्ट्री भी बंद हो गई। जो पुराने आर्डर थे वह नहीं पूरे हो सके और जो नए आर्डर कैंसल हो गए। जो जमा पूंजी थी उससे कर्मचारियों को वेतन दिया गया, किसी तरह से काम चलाया गया। इसके बाद जब लॉकडाउन खत्म हुआ तो फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर तक नहीं मिले।
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पोल्ट्री को सौ करोड़ से ज्यादा का नुकसान
पंचकूला में पोल्ट्री इंडस्ट्री एक बड़ी इंडस्ट्री है। लॉकडाउन लगा तो उस समय बर्ड को खाने की फीड तक नहीं मिली। इस वजह से काफी बर्ड मर गईं। पोल्ट्री उद्योग से जुड़े एक उद्यमी के अनुसार कोरोना की वजह से करीब अस्सी फीसदी काम चौपट हो गया था। जिससे करीब सौ करोड़ का नुकसान हो गया।
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पंचकूला के फर्नीचर उद्योग को कोरोना काल की वजह से काफी ज्यादा घाटा उठाना पड़ा। जब लॉकडाउन लगा तो काम काफी ज्यादा था। सारा काम बंद करना पड़ा। जो पुराने आर्डर पड़े थे उनको पूरा नहीं किया जा सका। इसके साथ ही नए आर्डर नहीं आए। लॉकडाउन हटा तो मजदूरों की समस्या हो गई। - राकेश गर्ग, उद्यमी
पंचकूला में हमारा ग्लास का काम है। हमारा सारा काम ज्यादातर क्रिएटिव होता है। इसके साथ ही माल बाहर से आता है। जैसे ही लॉकडाउन लगा तो बाहर से आने वाला आयात बंद हो गया। इस वजह से सारी सप्लाई चेन टूट गई। अब तक यह ठीक नहीं हो सकी है। - दिनेश कुमार
उद्यमी
कोरोना काल के दौरान चार माह काम प्रभावित रहा। मार्च के मध्य से लेकर जुलाई के मध्य तक सारा काम बंद रहा। अगस्त के माह में काम ने थोड़ी रफ्तार पकड़ी लेकिन उसके बाद समस्या मजदूरों की आ गई। इसके साथ ही आयात भी बंद हो गया। अब कोरोना के मामले दोबारा बढ़ रहे हैं तो स्थिति ठीक नहीं लग रही है। - विवेक गुप्ता, उद्यमी
पोल्ट्री इंडस्ट्री पर कोरोना का काफी ज्यादा असर रहा। करीब अस्सी फीसदी इंडस्ट्री खत्म हो गई। उस समय गाड़ियां बंद हो गईं थीं, ट्रक चल नहीं रहे थे। क्या करते, बर्ड को फीड नहीं मिली तो काफी बर्ड खत्म हो गईं। जो भूखी रहीं उनको पालने में काफी ज्यादा खर्च आया। मेरे अनुमान से पोल्ट्री इंडस्ट्री को सौ करोड़ का घाटा हुआ। - दर्शन सिंगला, प्रधान