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गुड़िया मर्डर केसः गवाह बोली- ‘आईजी ने इतना दबाव डाला कि मैं मानसिक रूप से परेशान हो गई’
Thu, 09 Jan 2020 12:35 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jan 2020 12:35 PM IST
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फाइल फोटो
गुड़िया हत्याकांड के आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में शिमला के डीजीपी को सीबीआई कोर्ट ने बुधवार को नोटिस जारी कर दिया। नोटिस के जरिए मामले को देखने और आईजी जहूर जैदी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। आईजी के खिलाफ यह निर्देश गवाह सौम्या संबशिवन पर सुनवाई से पहले दबाव डालने की शिकायत पर दिए गए हैं।
अभियोजन पक्ष की गवाह सौम्या संबशिवन हिमाचल के मंडी पंडोह में आईपीएस कमांडेंट 3 आईआरबी के रूप में तैनात हैं। उन्होंने बुधवार को अदालत में बयान दिया कि सुनवाई से पहलेउन पर इतना दबाव डाला गया कि वह परेशान हो गईं। ऐसी स्थिति में उनके लिए काम करना मुश्किल हो गया। उन्हें मानसिक दबाव झेलना पड़ा। साथ ही उन्होंने अदालत में यह भी कहा कि प्रतिदिन परिस्थिति इतनी कठिन हो गई कि मेरे पीएसओ, स्टेनो ने फोन तक बंद कर दिया है। मैं इन परिस्थितियों में काम नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि वह आईजी जहूर जैदी को कहना चाहती हैं कि उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि ऐसा कुछ करने से वह मामले से दूर हो सकते हैं। उन्होंने सुनवाई के दौरान कुछ तथ्य भी पेश किए। कहा कि सितंबर 2019 से जहूर जैदी मुझसे मेरे मोबाइल और ऑफिशियल लैंडलाइन नंबर पर लगातार बात करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने शिमला पुलिस हेडक्वार्टर, व्हाट्सएप कॉल और सबार्डिनेटर के फोन पर भी कॉल किया। सौम्या ने कहा कि लगातार फोन कर मुझ पर बयान बदलने के लिए दबाव डाला गया।
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जैदी ने मुझ से फोन पर कहा कि मैं वकीलों की एक टीम और 30 पेज की प्रश्नावली का सामना करने के लिए तैयार हूं। मुझे उम्मीद है कि आप सीबीआई को इसकी सूचना नहीं देंगी। इससे मैं मानसिक रूप से इतनी परेशान हो गई कि मुझे धर्मशाला में 10 दिसंबर 2019 को डीजीपी को तत्काल मामले की सूचना देनी पड़ी। सूचना के बाद उनका फोन आना बंद हो गया लेकिन मेरे पीएसओ से मेरी लोकेशन रोजाना जानने की कोशिश की गई।
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अभियोजन पक्ष की गवाह सौम्या संबशिवन हिमाचल के मंडी पंडोह में आईपीएस कमांडेंट 3 आईआरबी के रूप में तैनात हैं। उन्होंने बुधवार को अदालत में बयान दिया कि सुनवाई से पहलेउन पर इतना दबाव डाला गया कि वह परेशान हो गईं। ऐसी स्थिति में उनके लिए काम करना मुश्किल हो गया। उन्हें मानसिक दबाव झेलना पड़ा। साथ ही उन्होंने अदालत में यह भी कहा कि प्रतिदिन परिस्थिति इतनी कठिन हो गई कि मेरे पीएसओ, स्टेनो ने फोन तक बंद कर दिया है। मैं इन परिस्थितियों में काम नहीं कर सकती।
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उन्होंने कहा कि वह आईजी जहूर जैदी को कहना चाहती हैं कि उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि ऐसा कुछ करने से वह मामले से दूर हो सकते हैं। उन्होंने सुनवाई के दौरान कुछ तथ्य भी पेश किए। कहा कि सितंबर 2019 से जहूर जैदी मुझसे मेरे मोबाइल और ऑफिशियल लैंडलाइन नंबर पर लगातार बात करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने शिमला पुलिस हेडक्वार्टर, व्हाट्सएप कॉल और सबार्डिनेटर के फोन पर भी कॉल किया। सौम्या ने कहा कि लगातार फोन कर मुझ पर बयान बदलने के लिए दबाव डाला गया।
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जैदी ने मुझ से फोन पर कहा कि मैं वकीलों की एक टीम और 30 पेज की प्रश्नावली का सामना करने के लिए तैयार हूं। मुझे उम्मीद है कि आप सीबीआई को इसकी सूचना नहीं देंगी। इससे मैं मानसिक रूप से इतनी परेशान हो गई कि मुझे धर्मशाला में 10 दिसंबर 2019 को डीजीपी को तत्काल मामले की सूचना देनी पड़ी। सूचना के बाद उनका फोन आना बंद हो गया लेकिन मेरे पीएसओ से मेरी लोकेशन रोजाना जानने की कोशिश की गई।
चालान के साथ आवाज के सैंपल मैच होने की रिपोर्ट भी पेश
सुनवाई के दौरान सीबीआई जज सुशील कुमार गर्ग ने कहा कि आईजी जहूर जैदी को किसी भी गवाह को प्रभावित करने या दबाव डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इस दौरान सीबीआई ने कोर्ट में दूसरा सप्लीमेंटरी चालान भी पेश कर दिया, जिसमें फोरेसिंक रिपोर्ट के अनुसार, आवाज के सैंपल का मिलान की रिपोर्ट भी पेश की गई है।
आईजी जहूर जैदी, एसएचओ राजिंदर सिंह और एसपी डीडब्ल्यू नेगी के वॉयस सैंपल लिए गए थे, जिसमें वह पुलिस हिरासत में मौत मामले का जिक्र कर रहे थे। जैदी ने इस बात को अदालत के सामने स्वीकार भी किया था फिर भी सबूत के लिए आवाज के सैंपल लिए गए थे, जो मैच हो गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी।
यह है मामला
शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की स्टूडेंट 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल से उसकी लाश बरामद हुई थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। जिनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी था। लेकिन कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से ही सूरज की मौत हुई थी।
इस केस में सीबीआई ने आईजी जहूर एच. जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, ठयोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल्स सूरत सिंह, मोहन लाल, रफिक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया। इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था। लेकिन वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ जिस कारण सुप्रीम कोर्ट ने केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।
आईजी जहूर जैदी, एसएचओ राजिंदर सिंह और एसपी डीडब्ल्यू नेगी के वॉयस सैंपल लिए गए थे, जिसमें वह पुलिस हिरासत में मौत मामले का जिक्र कर रहे थे। जैदी ने इस बात को अदालत के सामने स्वीकार भी किया था फिर भी सबूत के लिए आवाज के सैंपल लिए गए थे, जो मैच हो गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी।
यह है मामला
शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की स्टूडेंट 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल से उसकी लाश बरामद हुई थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। जिनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी था। लेकिन कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से ही सूरज की मौत हुई थी।
इस केस में सीबीआई ने आईजी जहूर एच. जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, ठयोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल्स सूरत सिंह, मोहन लाल, रफिक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया। इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था। लेकिन वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ जिस कारण सुप्रीम कोर्ट ने केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।