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लोगों को राहत का फैसला बैंकों के लिए बना आफत
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चंडीगढ़। कोरोना के प्रकोप के बीच हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के लोगों के लिए राहत भरा हाईकोर्ट का फैसला बैंकों के लिए आफत बन गया है। आईएफसीआई बैंक ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर उस आदेश में संशोधन की मांग की है जिसमें फिलहाल बैंक व वित्तीय संस्थानों को 31 अगस्त तक किसी भी प्रोपर्टी को नीलाम न करने का आदेश दिया है।
कोरोना के चलते पैदा हुई गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लिया था और 28 अप्रैल को आदेश जारी कर कहा था कि फिलहाल बैंक व वित्तीय संस्थान कर्ज न लौटा पाने वालों की संपत्ति को नीलाम ना करें। इसके बाद इस आदेश को लगातार बढ़ाया गया जो अभी भी प्रभावी है। अब आईएफसीआई बैंक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि कोर्ट का आदेश मासूम लोगों को बचाने के लिए था लेकिन इसका फायदा डिफाल्टर उठा रहे हैं। इसके चलते बैंक अपने कर्ज की वसूली नहीं कर पा रहे हैं। बैंक ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस आदेश में संशोधन किया जाए ताकि बैंक दी गई राशि की वसूली कर सकें। बैंक ने कहा कि जहां यह आदेश आम लोगों के लिए राहत साबित हो रहा है वहीं यह बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गया है। हाईकोर्ट ने बैंक की अर्जी पर केंद्र सरकार सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने क ा आदेश दिया है।
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कोरोना के चलते पैदा हुई गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लिया था और 28 अप्रैल को आदेश जारी कर कहा था कि फिलहाल बैंक व वित्तीय संस्थान कर्ज न लौटा पाने वालों की संपत्ति को नीलाम ना करें। इसके बाद इस आदेश को लगातार बढ़ाया गया जो अभी भी प्रभावी है। अब आईएफसीआई बैंक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि कोर्ट का आदेश मासूम लोगों को बचाने के लिए था लेकिन इसका फायदा डिफाल्टर उठा रहे हैं। इसके चलते बैंक अपने कर्ज की वसूली नहीं कर पा रहे हैं। बैंक ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस आदेश में संशोधन किया जाए ताकि बैंक दी गई राशि की वसूली कर सकें। बैंक ने कहा कि जहां यह आदेश आम लोगों के लिए राहत साबित हो रहा है वहीं यह बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गया है। हाईकोर्ट ने बैंक की अर्जी पर केंद्र सरकार सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने क ा आदेश दिया है।
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