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ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण महसूस हों तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं : डॉ. गौरव जैन
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पंचकूला। ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के लिए लोग अच्छी जीवनशैली अपनाएं। अगर स्ट्रोक के लक्षण महसूस हों तो मरीज 4.5 घंटे के अंदर डॉक्टर से जरूर मिल लें। इससे रोगी के जीवन को बचाया जा सकता है। यह बात डॉक्टर्स डे के उपलक्ष्य में शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में अलकेमिस्ट अस्पताल के न्यूरोलॉजी कंसलटेंट डॉ. गौरव जैन ने कही। उन्होंने अमर उजाला एक्टिविटी जागरूकता कार्यक्रम में बताया कि इससे पहले वे 11 साल पीजीआई चंडीगढ़ में बतौर एमडी डीएम न्यूरोलॉजी की सेवाएं दे चुके हैं।
उन्होंने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य लक्षण, अचानक चेहरे, बाजू या शरीर के एक हिस्से का काम न करना या कमजोर होना, बोलने में दिक्कत होना, नजर न आना या दोहरी चीजें नजर आना, सिर चकराना और अचानक सिर में दर्द होना, चलने और संतुलन बनाने में दिक्कत होना प्रमुख हैं। इन लक्षणों के नजर आने पर जल्द से जल्द चिकित्सीय मदद या परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक की मुख्य वजह उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। पौष्टिक और संतुलित आहार लें, शराब का सेवन और धूम्रपान न करें।
मिर्गी में जूता, प्याज सुंघाने का नहीं है कोई औचित्य
डॉ. गौरव जैन ने बताया कि अगर किसी को मिर्गी की शिकायत है तो मानसिक कमी भी इसका कारण हो सकती है। आमतौर पर मिर्गी आने पर रोगी बेहोश हो जाता है। यह बेहोशी चंद सेकेंड, मिनट या घंटों की हो सकती है। दौरा समाप्त होते ही मरीज सामान्य हो जाता है। किसी रोगी की बेहोशी दो-तीन मिनट से ज्यादा है, तो यह जानलेवा भी हो सकती है।
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उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कुछ लोग मिर्गी आने पर रोगी को जूता, प्याज आदि सुंघाते हैं, इसका कोई औचित्य नहीं है। अगर किसी को एक से ज्यादा दौरा पड़ता है, तो उसे मिर्गी माना जाता है। सीटी स्कैन से मस्तिष्क की जांच कर मिर्गी के कारणों का पता लगाते हैं और इसका इलाज करते हैं। अमूमन रोगी को 18 माह से तीन साल तक मिर्गी के इलाज संबंधी दवा खानी होती है। उन्होंने कहा कि शुगर, ब्लड प्रेशर के मरीजों को इसका अधिक ध्यान रखना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य लक्षण, अचानक चेहरे, बाजू या शरीर के एक हिस्से का काम न करना या कमजोर होना, बोलने में दिक्कत होना, नजर न आना या दोहरी चीजें नजर आना, सिर चकराना और अचानक सिर में दर्द होना, चलने और संतुलन बनाने में दिक्कत होना प्रमुख हैं। इन लक्षणों के नजर आने पर जल्द से जल्द चिकित्सीय मदद या परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक की मुख्य वजह उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। पौष्टिक और संतुलित आहार लें, शराब का सेवन और धूम्रपान न करें।
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मिर्गी में जूता, प्याज सुंघाने का नहीं है कोई औचित्य
डॉ. गौरव जैन ने बताया कि अगर किसी को मिर्गी की शिकायत है तो मानसिक कमी भी इसका कारण हो सकती है। आमतौर पर मिर्गी आने पर रोगी बेहोश हो जाता है। यह बेहोशी चंद सेकेंड, मिनट या घंटों की हो सकती है। दौरा समाप्त होते ही मरीज सामान्य हो जाता है। किसी रोगी की बेहोशी दो-तीन मिनट से ज्यादा है, तो यह जानलेवा भी हो सकती है।
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उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कुछ लोग मिर्गी आने पर रोगी को जूता, प्याज आदि सुंघाते हैं, इसका कोई औचित्य नहीं है। अगर किसी को एक से ज्यादा दौरा पड़ता है, तो उसे मिर्गी माना जाता है। सीटी स्कैन से मस्तिष्क की जांच कर मिर्गी के कारणों का पता लगाते हैं और इसका इलाज करते हैं। अमूमन रोगी को 18 माह से तीन साल तक मिर्गी के इलाज संबंधी दवा खानी होती है। उन्होंने कहा कि शुगर, ब्लड प्रेशर के मरीजों को इसका अधिक ध्यान रखना चाहिए।