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आरोपी को भाषा की समझ नहीं तो ट्रायल को नहीं माना जा सकता निष्पक्ष: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस के मामले में 10 साल की सजा काट रही केन्या की नागरिक को इस आधार पर बरी कर दिया कि वह हिंदी, अंग्रेजी व पंजाबी नहीं जानती थी और पंजाब पुलिस केन्या की भाषा। हाईकोर्ट ने कहा कि संवाद के अभाव में ट्रायल को निष्पक्ष नहीं माना जा सकता। ऐसे में संवाद के अभाव में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर का कोई औचित्य नहीं है।
केन्या की नागरिक सूसी अचायो ने याचिका दाखिल करते हुए जालंधर की अदालत द्वारा उसे एनडीपीएस मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा व एक लाख रुपये जुर्माना भरने के आदेश को चुनौती दी थी। अभियोजन के अनुसार याची पर एक बैग में प्रतिबंधित पदार्थ ले जाने का संदेह था। पंजाब पुलिस ने जांच में उसके पास से 800 ग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया था। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची केन्या की स्थायी निवासी है।
जांच अधिकारी इंस्पेक्टर ओंकार सिंह के बयान के अनुसार वह पंजाबी, हिंदी या अंग्रेजी भाषा नहीं जानती केवल केन्याई भाषा जानती है। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 50 का पूरी तरह से गैर-अनुपालन हुआ है, क्योंकि इसके तहत याची को उसके अधिकार बताने जरूरी हैं। महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए हैं, जिससे मामले की सत्यता के बारे में संदेह पैदा होता है। जब जांच एजेंसी व याची के बीच संवाद ही नहीं हुआ तो यह नहीं कहा जा सकता कि निष्पक्ष सुनवाई हुई है।
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आरोपी की ओर से पुलिस पक्ष द्वारा किए गए किसी भी संचार को न समझ पाने के कारण पूरी जांच को दूषित माना जाता है। रिकॉर्ड से यह पता नहीं चलता कि वह हिंदी, पंजाबी या अंग्रेजी भाषा जानती थी, जबकि सभी सामग्री दस्तावेज या तो पंजाबी या अंग्रेजी में तैयार किए गए हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने उसे दोष मुक्त करार दे दिया।
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केन्या की नागरिक सूसी अचायो ने याचिका दाखिल करते हुए जालंधर की अदालत द्वारा उसे एनडीपीएस मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा व एक लाख रुपये जुर्माना भरने के आदेश को चुनौती दी थी। अभियोजन के अनुसार याची पर एक बैग में प्रतिबंधित पदार्थ ले जाने का संदेह था। पंजाब पुलिस ने जांच में उसके पास से 800 ग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया था। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची केन्या की स्थायी निवासी है।
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जांच अधिकारी इंस्पेक्टर ओंकार सिंह के बयान के अनुसार वह पंजाबी, हिंदी या अंग्रेजी भाषा नहीं जानती केवल केन्याई भाषा जानती है। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 50 का पूरी तरह से गैर-अनुपालन हुआ है, क्योंकि इसके तहत याची को उसके अधिकार बताने जरूरी हैं। महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए हैं, जिससे मामले की सत्यता के बारे में संदेह पैदा होता है। जब जांच एजेंसी व याची के बीच संवाद ही नहीं हुआ तो यह नहीं कहा जा सकता कि निष्पक्ष सुनवाई हुई है।
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आरोपी की ओर से पुलिस पक्ष द्वारा किए गए किसी भी संचार को न समझ पाने के कारण पूरी जांच को दूषित माना जाता है। रिकॉर्ड से यह पता नहीं चलता कि वह हिंदी, पंजाबी या अंग्रेजी भाषा जानती थी, जबकि सभी सामग्री दस्तावेज या तो पंजाबी या अंग्रेजी में तैयार किए गए हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने उसे दोष मुक्त करार दे दिया।