{"_id":"62f4198f46aa5f53546bd46d","slug":"identification-of-133-lumpy-disease-suspect-animals-in-panchkula-and-kalka-pkl-office-news-pkl459222367","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंचकूला और कालका में 133 लंपी बीमारी संदिग्ध पशुओं की पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचकूला और कालका में 133 लंपी बीमारी संदिग्ध पशुओं की पहचान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंचकूला। जिले के पशुओं में लंपी बीमारी का खतरा बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु भी इस बीमारी की चपेट में आने लगे हैं। इन पशुओं के जरिये बीमारी एक से दूसरे पशु में फैलने का खतरा और ज्यादा बढ़ता जा रहा है। पंचकूला में बुधवार को लंपी बीमारी के 47 नए संदिग्ध पशु पाए गए हैं और इसके साथ ही अकेले पंचकूला सब डिवीजन में इनकी संख्या 94 पहुंच गई है। जबकि कालका सब डिवीजन में 39 संदिग्ध पशु सामने आए हैं। इस तरह कालका और पंचकूला को मिलाकर लंपी बीमारी के लक्षण वाले पशुओं की कुल संख्या 133 पहुंच गई है। इनके अलावा पूरे जिले से 17 गायों के सैंपल जांच के लिए भोपाल के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज डायग्नोस्टिक लैब में भेजे गए हैं। इसकी पुष्टि हरियाणा पशुपालन विभाग के उप निदेशक अनिल भनवाला ने की है। उन्होंने बताया कि पांच से सात दिनों के अंदर इन सैंपलों की रिपोर्ट आ जाएगी।
शहरी क्षेत्र के तीन पशुओं में दिखे लंपी वायरस के लक्षण
हरियाणा पशुपालन विभाग के उप निदेशक अनिल भनवाला ने बताया कि पंचकूला शहरी क्षेत्र के तीन मरीजों में लंपी के लक्षण दिखे हैं। इनमें एक देवी नगर, एक सकेतड़ी और एक चौकी गांव का पशु शामिल है। इन्हें एहतियात के तौर पर अलग जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया है। ताकि दूसरे पशु इसकी चपेट में न आएं। इसके अलावा रामगढ़ के दो पशुओं में लंपी के लक्षण मिले हैं।
पशुपालन विभाग ने जारी की एडवाइजरी
पंचकूला के पशुपालन विभाग ने विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। यह बीमारी संक्रमित पशु के संपर्क में आने या किलनी, मच्छर एवं मक्खी से दूसरे पशुओं में फैलती है। लंपी स्कीन बीमारी कोरोना वायरस की तरह पशुओं में फैल रही है। बीमारी की अभी तक वैक्सीन नहीं आई है। पशुओं को संक्रमित पशुओं से दूर रखकर ही या समय पर उपचार से ही बचाव किया जा सकता है। विभाग ने बीमारी को फैलने से रोकने के लिए पशुपालकों से अपील की है कि स्वस्थ व बीमारी पशुओं को अलग-अलग कर दें।
विज्ञापन
ध्यान नहीं दिया तो पशुपालकों को होगा भारी नुकसान
पशुपालकों ने बचाव को लेकर ध्यान नहीं दिया तो एक-दूसरे मवेशी के संपर्क में आने से फैलने वाली वायरस यह बीमारी पूरे जिले में फैल सकती है। इससे मवेशियों की दिक्कत तो बढ़ेगी ही, रोग की जद में आने वाले दुधारू मवेशियों के चलते दुध उत्पादन पर असर पड़ेगा। इससे पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
इस तरह फैलता है संक्रमण
यह ढेलेदार त्वचा रोग गाय में पॉक्स विषाणु (कैप्रीपॉक्स वायरस) के संक्रमण से होता है। संक्रमण हस्तांतरण विषाणु के वाहक जैसे किलनी, मच्छर एवं मक्खी से फैलता है। संक्रमित पशु के शरीर पर बैठने वाली किलनी, मच्छर व मवेशी जब स्वस्थ पशु के शरीर पर पहुंचते हैं तो संक्रमण उनके अंदर भी पहुंच जाता है। बीमार पशुओं को एक से दूसरे जगह ले जाने या उसके संपर्क में आने वाले पशु भी संक्रमित हो जाते हैं। पशु चिकित्सकों की मानें तो इस बीमारी का खतरा गर्म और आर्द्र नमी वाले मौसम में अधिक होता है। मौजूदा समय में जिस तरह से गर्मी और उमस बढ़ी है, इससे रोग के फैलने का खतरा भी बढ़ चुका है।
विज्ञापन
शहरी क्षेत्र के तीन पशुओं में दिखे लंपी वायरस के लक्षण
हरियाणा पशुपालन विभाग के उप निदेशक अनिल भनवाला ने बताया कि पंचकूला शहरी क्षेत्र के तीन मरीजों में लंपी के लक्षण दिखे हैं। इनमें एक देवी नगर, एक सकेतड़ी और एक चौकी गांव का पशु शामिल है। इन्हें एहतियात के तौर पर अलग जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया है। ताकि दूसरे पशु इसकी चपेट में न आएं। इसके अलावा रामगढ़ के दो पशुओं में लंपी के लक्षण मिले हैं।
विज्ञापन
पशुपालन विभाग ने जारी की एडवाइजरी
पंचकूला के पशुपालन विभाग ने विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। यह बीमारी संक्रमित पशु के संपर्क में आने या किलनी, मच्छर एवं मक्खी से दूसरे पशुओं में फैलती है। लंपी स्कीन बीमारी कोरोना वायरस की तरह पशुओं में फैल रही है। बीमारी की अभी तक वैक्सीन नहीं आई है। पशुओं को संक्रमित पशुओं से दूर रखकर ही या समय पर उपचार से ही बचाव किया जा सकता है। विभाग ने बीमारी को फैलने से रोकने के लिए पशुपालकों से अपील की है कि स्वस्थ व बीमारी पशुओं को अलग-अलग कर दें।
विज्ञापन
ध्यान नहीं दिया तो पशुपालकों को होगा भारी नुकसान
पशुपालकों ने बचाव को लेकर ध्यान नहीं दिया तो एक-दूसरे मवेशी के संपर्क में आने से फैलने वाली वायरस यह बीमारी पूरे जिले में फैल सकती है। इससे मवेशियों की दिक्कत तो बढ़ेगी ही, रोग की जद में आने वाले दुधारू मवेशियों के चलते दुध उत्पादन पर असर पड़ेगा। इससे पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
इस तरह फैलता है संक्रमण
यह ढेलेदार त्वचा रोग गाय में पॉक्स विषाणु (कैप्रीपॉक्स वायरस) के संक्रमण से होता है। संक्रमण हस्तांतरण विषाणु के वाहक जैसे किलनी, मच्छर एवं मक्खी से फैलता है। संक्रमित पशु के शरीर पर बैठने वाली किलनी, मच्छर व मवेशी जब स्वस्थ पशु के शरीर पर पहुंचते हैं तो संक्रमण उनके अंदर भी पहुंच जाता है। बीमार पशुओं को एक से दूसरे जगह ले जाने या उसके संपर्क में आने वाले पशु भी संक्रमित हो जाते हैं। पशु चिकित्सकों की मानें तो इस बीमारी का खतरा गर्म और आर्द्र नमी वाले मौसम में अधिक होता है। मौजूदा समय में जिस तरह से गर्मी और उमस बढ़ी है, इससे रोग के फैलने का खतरा भी बढ़ चुका है।