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परिवार में अमूल्य योगदान देती है गृहिणी, नौकरानी के वेतन से तुलना नहीं की जा सकती: हाईकोर्ट
Sat, 11 Apr 2020 01:34 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Apr 2020 01:34 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
यदि किसी गृहिणी की मौत के चलते मुआवजे हेतू उसकी आय का आंकलन किया जा रहा है तो परिवार को दी गई उसकी सेवाओं को जोड़ना जरूरी है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाते हुए ट्रिब्यूनल द्वारा आंकी गई महिला की आमदनी को तीन गुना करते हुए मुआवजा निर्धारित किया है। करनाल निवासी रमेश ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए मोटर एक्सीडेंट में हुई पत्नी की मौत का मुआवजा बढ़ाने की अपील की थी।
याचिका में बताया गया कि वह अपनी पत्नी कमलेश के साथ लुधियाना से संगरूर जा रहा था कि अचानक एक ट्रक ने उसके स्कूटर को टक्कर मार दी। टक्कर से वह दूर जाकर गिरा जबकि पीछे बैठी पत्नी ट्रक के नीचे आ गई और उसकी मौत हो गई। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल लुधियाना ने कमलेश की मौत के चलते मुआवजा निर्धारित करते हुए सिलाई कार्य के लिए आमदनी 2000 रुपये मानी और इसमें से 500 निर्भरता दिखाते हुए इसे 1500 कर दिया।
मुआवजा बढ़ाने के लिए दाखिल याचिका का विरोध करते हुए बीमा कंपनी ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने आय का आंकलन सही किया है क्योंकि इससे ज्यादा होने पर यह न्यूनतम मजदूरी से ज्यादा हो जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि गृहिणी का घर में योगदान अमूल्य होता है और उसकी तुलना नौकरानी से नहीं की जा सकती। मृतक गृहिणी की आय निर्धारित करते हुए उसके साथ भद्दा मजाक किया गया है। गृहिणी की भूमिका की तुलना किसी नौकरानी से नहीं की जा सकती है।
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गृहिणी पति, बच्चे और पूरे परिवार का ध्यान रखती है और 24 घंटे घर के लिए समर्पित रहती है। अपनी सेवाओं के दौरान वह अपना भी ध्यान नहीं रख पाती लेकिन पूरे परिवार के लिए घर के सभी कार्यों को अंजाम देती है। ऐसे में हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा आंकलित की गई 1500 की राशि को बढ़ाकर 3 गुना यानी 4500 रुपये प्रतिमाह कर दिया। आय बढऩे से मुआवजा राशि 117500 से बढ़ाकर 556000 कर दी।
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याचिका में बताया गया कि वह अपनी पत्नी कमलेश के साथ लुधियाना से संगरूर जा रहा था कि अचानक एक ट्रक ने उसके स्कूटर को टक्कर मार दी। टक्कर से वह दूर जाकर गिरा जबकि पीछे बैठी पत्नी ट्रक के नीचे आ गई और उसकी मौत हो गई। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल लुधियाना ने कमलेश की मौत के चलते मुआवजा निर्धारित करते हुए सिलाई कार्य के लिए आमदनी 2000 रुपये मानी और इसमें से 500 निर्भरता दिखाते हुए इसे 1500 कर दिया।
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मुआवजा बढ़ाने के लिए दाखिल याचिका का विरोध करते हुए बीमा कंपनी ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने आय का आंकलन सही किया है क्योंकि इससे ज्यादा होने पर यह न्यूनतम मजदूरी से ज्यादा हो जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि गृहिणी का घर में योगदान अमूल्य होता है और उसकी तुलना नौकरानी से नहीं की जा सकती। मृतक गृहिणी की आय निर्धारित करते हुए उसके साथ भद्दा मजाक किया गया है। गृहिणी की भूमिका की तुलना किसी नौकरानी से नहीं की जा सकती है।
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गृहिणी पति, बच्चे और पूरे परिवार का ध्यान रखती है और 24 घंटे घर के लिए समर्पित रहती है। अपनी सेवाओं के दौरान वह अपना भी ध्यान नहीं रख पाती लेकिन पूरे परिवार के लिए घर के सभी कार्यों को अंजाम देती है। ऐसे में हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा आंकलित की गई 1500 की राशि को बढ़ाकर 3 गुना यानी 4500 रुपये प्रतिमाह कर दिया। आय बढऩे से मुआवजा राशि 117500 से बढ़ाकर 556000 कर दी।