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निजी क्षेत्र में आरक्षण पर केंद्र सरकार से जवाब तलब

Wed, 23 Feb 2022 02:32 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 23 Feb 2022 02:32 AM IST
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High Court seeks response from Center on 75 percent reservation in private sector jobs
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की नौकरियों में हरियाणा के निवासियों को दिए गए 75 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने फिलहाल हरियाणा व केंद्र सरकार को आरक्षण के पक्ष में अपनी दलीलें रखने के लिए 7 मार्च तक मोहलत दी है।
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फरीदाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया था कि निजी क्षेत्र में योग्यता और कौशल के अनुसार लोगों का चयन किया जाता है। यदि नियोक्ताओं से कर्मचारी को चुनने का अधिकार ले लिया जाएगा तो उद्योग कैसे आगे बढ़ सकेंगे। हरियाणा सरकार का 75 प्रतिशत आरक्षण का फैसला योग्य लोगों के साथ अन्याय है। यह कानून उन युवाओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन है जो अपनी शिक्षा और योग्यता के आधार पर भारत के किसी भी हिस्से में नौकरी करने को स्वतंत्र हैं। याची ने कहा कि यह कानून योग्यता के बदले रिहायश के आधार पर निजी क्षेत्र में नौकरी पाने की पद्धति को शुरू करने का प्रयास है। ऐसा हुआ तो हरियाणा में निजी क्षेत्र में रोजगार को लेकर अराजकता की स्थिति पैदा हो जाएगी।
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यह कानून निजी क्षेत्र के विकास को भी बाधित करेगा और इसके कारण राज्य से उद्योग पलायन भी आरंभ कर सकते हैं। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ ने याचिका पर हरियाणा सरकार से जवाब तलब कर लिया था। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने जवाब दाखिल करते हुए कहा कि संविधान के जिस प्रावधान का हवाला देकर यह एसोसिएशन हाईकोर्ट पहुंची हैं वह नागरिकों के लिए है, कंपनी पर वह लागू ही नहीं होता। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अब याचिका को एडमिट करते हुए आरक्षण के प्रावधान पर रोक लगा दी थी।
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इसके बाद हरियाणा सरकार हाईकोर्ट के आदेश केखिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। हरियाणा सरकार की दलील थी कि उन्हें पक्ष रखने के लिए केवल 90 सेकेंड का समय दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर लगी रोक हटाते हुए हाईकोर्ट को आदेश दिया था कि इस याचिका का एक माह के भीतर निपटारा किया जाए। अब जब मामला सुनवाई के लिए मंगलवार को पहुंचा तो केंद्र सरकार का हलफनामा न होने के चलते हाईकोर्ट ने अब 7 मार्च को हरियाणा व केंद्र सरकार को अपनी दलीलें रखने की मोहलत दी है। हाईकोर्ट सभी पक्षों को सुन कर 17 मार्च को याचिका का निपटारा कर देगा।
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