{"_id":"69bb0c229f2c4b5d470b04a7","slug":"high-court-refuses-to-suspend-sentence-of-kathua-rape-and-murder-case-mastermind-sanji-ram-panchkula-news-c-16-1-pkl1098-973650-2026-03-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: कठुआ दुष्कर्म व हत्या मामले के मास्टरमाइंड संजी राम की सजा निलंबित करने से हाईकोर्ट का इन्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: कठुआ दुष्कर्म व हत्या मामले के मास्टरमाइंड संजी राम की सजा निलंबित करने से हाईकोर्ट का इन्कार
विज्ञापन
चंडीगढ़। वर्ष 2018 में देश को झकझोर देने वाले कठुआ दुष्कर्म व हत्या मामले में दोषी करार दिए गए मुख्य आरोपी सांजी राम को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने झटका देते हुए अपील लंबित रहते उम्रकैद की सजा को निलंबित करने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी है।
हाईकोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और ट्रायल कोर्ट के फैसले को देखते हुए यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें दोषी को सजा से अस्थायी राहत दी जा सके। प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री सजा निलंबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनाती।
याचिकाकर्ता संजी राम की ओर से दलील दी गई थी कि वह पिछले कई साल से जेल में बंद है और अपील पर अंतिम सुनवाई में समय लग सकता है। ऐसे में उसकी सजा को फिलहाल निलंबित कर जमानत पर रिहा किया जाए। यह भी कहा गया कि अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर है और उसे संदेह का लाभ मिलना चाहिए।
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर की तरफ से पेश वकीलों ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराया है और उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य मौजूद हैं। राज्य ने यह भी दलील दी कि दोषसिद्धि के बाद आरोपी को अब निर्दोषता का लाभ नहीं दिया जा सकता और सजा निलंबित करना न्यायहित में नहीं होगा।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि यह एक अत्यंत जघन्य अपराध है जिसमें एक मासूम बच्ची के साथ अमानवीय कृत्य किया गया। ऐसे मामलों में सजा निलंबन का निर्णय बेहद सावधानी से लिया जाता है। केवल लंबी अवधि तक जेल में रहना सजा निलंबन का स्वतः आधार नहीं बनता। हाईकोर्ट ने संजी राम की अपील को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए मामले की अंतिम सुनवाई इस वर्ष सितंबर में तय की है।
क्या है पूरा मामला :
जनवरी 2018 में जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में 8 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर उसे एक मंदिर में बंधक बनाकर कई दिन तक दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था। मामले की सुनवाई पठानकोट की विशेष अदालत में हुई थी। उसने 2019 में संजी राम समेत तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी जबकि अन्य को सबूत मिटाने और साजिश में शामिल होने के लिए सजा दी गई थी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और ट्रायल कोर्ट के फैसले को देखते हुए यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें दोषी को सजा से अस्थायी राहत दी जा सके। प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री सजा निलंबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनाती।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता संजी राम की ओर से दलील दी गई थी कि वह पिछले कई साल से जेल में बंद है और अपील पर अंतिम सुनवाई में समय लग सकता है। ऐसे में उसकी सजा को फिलहाल निलंबित कर जमानत पर रिहा किया जाए। यह भी कहा गया कि अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर है और उसे संदेह का लाभ मिलना चाहिए।
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर की तरफ से पेश वकीलों ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराया है और उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य मौजूद हैं। राज्य ने यह भी दलील दी कि दोषसिद्धि के बाद आरोपी को अब निर्दोषता का लाभ नहीं दिया जा सकता और सजा निलंबित करना न्यायहित में नहीं होगा।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि यह एक अत्यंत जघन्य अपराध है जिसमें एक मासूम बच्ची के साथ अमानवीय कृत्य किया गया। ऐसे मामलों में सजा निलंबन का निर्णय बेहद सावधानी से लिया जाता है। केवल लंबी अवधि तक जेल में रहना सजा निलंबन का स्वतः आधार नहीं बनता। हाईकोर्ट ने संजी राम की अपील को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए मामले की अंतिम सुनवाई इस वर्ष सितंबर में तय की है।
क्या है पूरा मामला :
जनवरी 2018 में जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में 8 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर उसे एक मंदिर में बंधक बनाकर कई दिन तक दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था। मामले की सुनवाई पठानकोट की विशेष अदालत में हुई थी। उसने 2019 में संजी राम समेत तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी जबकि अन्य को सबूत मिटाने और साजिश में शामिल होने के लिए सजा दी गई थी।