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यमुनानगर की एडीसी के खिलाफ हाईकोर्ट ने सेशन जज को सौंपी जांच

Sun, 26 Sep 2021 02:44 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 26 Sep 2021 02:44 AM IST
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High Court handed over investigation to Sessions Judge against ADC of Yamunanagar
चंडीगढ़। एक पक्ष को फायदा देने के लिए हाईकोर्ट के आदेश को बाईपास करने और दस्तावेजों से छेड़छाड़ के मामले में एडीसी के खिलाफ जांच की जिम्मेदारी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यमुनानगर के सेशन जज को सौंप दी है। साथ ही एडीसी पर लगे गंभीर आरोपों के चलते उन्हें नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए सीमा ने एडवोकेेट अतुल गोयल के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उसके परिवार में संपत्ति का बटवारा 2013 में आपसी सहमति से हुआ था और घर याची व उसके पति के हिस्से में आया था। 2014 में उसके पति की मौत हो गई थी जिसके बाद उसने परिवार के सदस्यों को घर खाली करने को कहा। खाली नहीं होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया। सिविल कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि सेटलमेंट का रजिस्टर्ड दस्तावेज मौजूद नहीं है। याची ने अपील दाखिल की जो अभी लंबित है और यथास्थिति का आदेश है। इस बीच लंबित अपील के बारे में जानकारी छुपाते हुए याची के ससुर ने मैंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट में एडीसी के पास याचिका दाखिल कर दी। एडीसी ने कहा कि वह इस मामले में बिना दलीलें सुने याची के ससुर के पक्ष में फैसला देंगी। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई और एडीसी पर अविश्वास जताया गया।
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हाईकोर्ट ने एडीसी के अंतिम फैसला सुनाने पर रोक लगा दी थी। 14 सितंबर को एडीसी के पास भी सुनवाई होनी थी और उसी दिन हाईकोर्ट का यह आदेश आया जिसके बारे में एडीसी को सूचित किया गया। याची को हैरानी हुई जब उन्हें बताया गया कि 10 सितंबर को ही फैसला याची के खिलाफ सुना दिया गया। याची ने सबूत पेश किए जिससे दस्तावेजों से छेड़छाड़ की बात सामने आई। हाईकोर्ट ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीसी रंजीत कौर के खिलाफ जांच का यमुनानगर के सेशन जज को आदेश दिया है। साथ ही उन्हें इस मामले में पक्ष बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही एडीसी द्वारा जारी आदेश पर भी रोक लगा दी है जिसमें याची को 30 दिन में घर खाली करने का आदेश दिया गया था।
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