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पंजाब में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी की नियुक्ति प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती
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चंडीगढ़। पंजाब सरकार द्वारा राज्य की जिला अदालतों में पंजाब की पैरवी करने के लिए निकाली गई एडिशनल डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (एडीए) की भर्ती का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। आवेदन के लिए दो वर्ष के वकालत के अनुभव को अनिवार्य करने को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए एडमिट कर ली है।
याचिका दाखिल करते हुए कैथल निवासी मनप्रीत सिंह ने एडवोकेट गनश्याम के माध्यम से बताया कि पंजाब सरकार ने एडीए के 119 पदों के लिए आवेदन मांगा था। इस विज्ञापन में यह शर्त थी कि इस पद पर आवेदन करने के लिए वकालत का दो वर्ष का अनुभव अनिवार्य है। याची ने कहा कि देश के कई राज्यों में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही यह भी बताया कि राज्य में सिविल जज बनने के लिए किसी प्रकार का अनुभव अनिवार्य नहीं है लेकिन सरकारी वकील बनने के लिए इस तरह का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया है।
याची ने कहा कि इस प्रकार की शर्त रखना नए वकीलों के साथ पूरी तरह से अन्याय है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि पंजाब सरकार को निर्देश दिया जाए कि इस शर्त का हटा कर नए सिरे से विज्ञापन जारी किया जाए ताकि युवाओं को मौका मिल सके। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में विचार करना बेहद जरूरी है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए एडमिट कर लिया।
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याचिका दाखिल करते हुए कैथल निवासी मनप्रीत सिंह ने एडवोकेट गनश्याम के माध्यम से बताया कि पंजाब सरकार ने एडीए के 119 पदों के लिए आवेदन मांगा था। इस विज्ञापन में यह शर्त थी कि इस पद पर आवेदन करने के लिए वकालत का दो वर्ष का अनुभव अनिवार्य है। याची ने कहा कि देश के कई राज्यों में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही यह भी बताया कि राज्य में सिविल जज बनने के लिए किसी प्रकार का अनुभव अनिवार्य नहीं है लेकिन सरकारी वकील बनने के लिए इस तरह का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया है।
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याची ने कहा कि इस प्रकार की शर्त रखना नए वकीलों के साथ पूरी तरह से अन्याय है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि पंजाब सरकार को निर्देश दिया जाए कि इस शर्त का हटा कर नए सिरे से विज्ञापन जारी किया जाए ताकि युवाओं को मौका मिल सके। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में विचार करना बेहद जरूरी है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए एडमिट कर लिया।
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