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राजस्व विभाग के अधिकारियों को वास्तव में प्रशिक्षण दिया या नहीं, बताएं मुख्य सचिव: हाईकोर्ट

Sun, 08 Feb 2026 01:56 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Feb 2026 01:56 AM IST
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High Court asks Chief Secretary to tell whether the officers of the Revenue Department were actually trained or not
चंडीगढ़। राजस्व अधिकारियों द्वारा बिना ठोस कारण दिए जा रहे आदेशों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी बढ़ रही है। अदालत ने पंजाब के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करें कि क्या राजस्व विभाग के अधिकारियों को वास्तव में वह प्रशिक्षण दिया गया था, जिसका विश्वास पहले अदालत को दिया गया था।
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जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने यह निर्देश एक 15 साल पुराने विवाद की सुनवाई के दौरान जारी किया। इसमें अपीलीय प्राधिकरण ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों और मुद्दों पर चर्चा किए बिना एक झटके में अपील खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा कि राज्य के हित में है कि मुकदमों का अंत हो इस सिद्धांत के बावजूद, क्रिप्टिक और बिना कारण वाले आदेश यह दर्शाते हैं कि अनावश्यक मुकदमेबाजी प्रथम दृष्टया राज्य की वजह से उत्पन्न हो रही है। बिना तर्क दिए गए आदेश, विशेष रूप से स्टांप ड्यूटी से जुड़े मामले बार-बार सामने आ रहे हैं, जबकि राज्य सरकार पहले ही अधिकारियों को वैधानिक शक्तियों के उचित प्रयोग के लिए प्रशिक्षित करने का विश्वास दिला चुकी थी।
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अदालत ने मुख्य सचिव से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या पहले दिए गए निर्देशों के बाद सभी अधिकारियों, विशेषकर राजस्व विभाग के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया? क्या वर्तमान मामले में गैर-तर्कसंगत आदेश पारित करने वाले अधिकारी को कोई प्रशिक्षण मिला था? यदि मिला था तो किसने प्रशिक्षण दिया और किस विषय पर दिया गया?
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मामला वर्ष 2010 से जुड़ा है जब एक बिक्री विलेख (सेल डीड) को उप-पंजीयक द्वारा इंपाउंड किया गया था। बाद में आयुक्त ने स्थल निरीक्षण न होने के कारण मामला वापस भेजा। हाईकोर्ट ने भी कलेक्टर को मामला दोबारा तय करने का निर्देश दिया था लेकिन कलेक्टर ने फिर वही त्रुटि दोहरा दी। इसके बाद अपीलीय प्राधिकरण ने बिना किसी ठोस चर्चा के अपील खारिज कर दी। अदालत ने व्यापक संस्थागत संदर्भ में कहा कि कलेक्टरों और आयुक्तों द्वारा कई मामलों में भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना आदेश पारित किए जा रहे हैं। इससे न्यायिक समय की बर्बादी और नागरिकों को अनावश्यक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
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