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हाईकोर्ट से गुहार: पंजाब पुलिस को जज की सुरक्षा से हटाने का आदेश वापस लें... प्रतिष्ठा को लग जाएगा बट्टा

Wed, 02 Oct 2024 09:28 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Wed, 02 Oct 2024 09:28 PM IST
सार

पंजाब पुलिस के खिलाफ कई सख्त आदेश पारित कर चुके जस्टिस एनएस शेखावत की सुरक्षा में चूक को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया था। इसके बाद कोर्ट ने उनकी सुरक्षा से पंजाब पुलिस को हटाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने हरियाणा व चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा जस्टिस शेखावत के लिए तय की है। 

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Govt reaches High Court demanding withdrawal of order to remove Punjab Police from judge security
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 27 सितंबर को पारित किए गए उस आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए पंजाब सरकार ने आवेदन दायर किया है, जिसमें पंजाब पुलिस को वर्तमान जज की सुरक्षा के लिए तैनात न करने का निर्देश दिया गया था। 

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जज ने पंजाब की जांच एजेंसियों की बड़े पैमाने पर चूक को उजागर किया था और उनकी सुरक्षा हाल ही में एक घटना में खतरे में पड़ गई थी। एक अक्तूबर को सुनवाई के दौरान एडवोकेट जरनल गुरमिंदर सिंह ने खंडपीठ को बताया कि आदेश में टिप्पणियां करते हुए हाईकोर्ट ने न्यायाधीश की सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस के अलावा किसी अन्य पुलिस बल को तैनात करने का निर्देश दिया था। सुरक्षा में चूक की जांच के लिए केवल यूटी चंडीगढ़ और हरियाणा से अधिकारियों के नामों का अनुरोध किया गया था। गुरमिंदर सिंह ने कहा कि ऐसा करना पंजाब पुलिस की दक्षता को कम आंकने के बराबर है।
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एजी ने कहा कि अदालत द्वारा जारी इस तरह के निर्देश का पंजाब राज्य के पुलिस बलों पर बहुत निराशाजनक प्रभाव पड़ता है। यह पुलिस कर्मियों की प्रतिबद्धता और समर्पण की ईमानदारी पर सवाल उठाता है जो अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी के हिस्से के रूप में रोजाना खुद को खतरे में डालते हैं, ताकि उन लोगों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके जिनकी सेवा करने के लिए उन्हें नियुक्त किया गया है।
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रिकॉर्ड में या अन्यथा ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह दर्शाता हो कि मौजूदा न्यायाधीश को सौंपे गए सुरक्षाकर्मी अपने कर्तव्य का पालन करने में विफल रहे हैं या किसी भी तरह से सुरक्षा से समझौता किया है। यदि इन टिप्पणियों को हटाया नहीं गया या आदेश वापस नहीं लिया गया तो यह पीढ़ियों के लिए न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाएंगे और पंजाब पुलिस बल की छवि और प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाएंगे। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि आवेदन पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा, जो दशहरा की छुट्टियों के बाद होने की संभावना है।

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