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जीव मिल्खा सिंह टूर्नामेंट, नाडा के रडार पर रहेंगे चंडीगढ़ के गोल्फर, 17 से 20 तक होंगे मुकाबले
Tue, 15 Oct 2019 05:06 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Oct 2019 05:06 PM IST
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प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया (पीजीटीआई) के जीव मिल्खा सिंह इनविटेशनल गोल्फ टूर्नामेंट पर इस बार नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) की नजर है। चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में 17 से 20 अक्तूबर तक खेले जाने वाले टूर्नामेंट में देश-विदेश केटॉप गोल्फर्स शिरकत कर रहे हैं। जीव मिल्खा सिंह भी टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं। टूर्नामेंट में 1.5 करोड़ की इनामी राशि है।
नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) की टीम किसी भी समय यहां पर पहुंच सकती है। नाडा टीम की नजर टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले हर गोल्फर्स पर होगी। नाडा देश में होने वाले सभी टूर्नामेंट में अपनी टीम को भेज कर वहां पर खिलाड़ियाें केसैंपल हासिल कर सकती है। इससे पहले पीजीटीआई प्लास्टिक मुक्त भारत मुहिम के तहत चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में होने वालेे जीव मिल्खा सिंह इनविटेशनल गोल्फ टूर्नामेंट प्लास्टिक मुक्त करने का ऐलान कर चुकी है।
बड़े नाम हैं गोल्फ टूर का हिस्सा
जीव मिल्खा सिंह इनविटेशनल गोल्फ टूर्नामेंट पीजीटीआई कामहत्वपूर्ण टूर्नामेंट है। इसमें देश-विदेश से टॉप सीड के132 गोल्फर्स शिरकत कर रहे हैं। इनमें 129 प्रोफेशनल और 3 एमेच्योर गोल्फर्स शामिल हैं। इनमें पिछले साल केविजेता एस चिक्कारंगप्पा के अलावा राशिद खान, अजितेश संधू, ज्योति रंधावा, कार्तिक दिग्विजय सिंह, जयवीर सिंह अटवाल, हरमीत, गौरव घई, अर्जुन बबूटा, वीर अटवाल, कपिल कुमार, हरेंद्र गुप्ता, शमीम खान, शंकर दास, प्रियांशु सिंह शामिल हैं।
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नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) की टीम किसी भी समय यहां पर पहुंच सकती है। नाडा टीम की नजर टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले हर गोल्फर्स पर होगी। नाडा देश में होने वाले सभी टूर्नामेंट में अपनी टीम को भेज कर वहां पर खिलाड़ियाें केसैंपल हासिल कर सकती है। इससे पहले पीजीटीआई प्लास्टिक मुक्त भारत मुहिम के तहत चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में होने वालेे जीव मिल्खा सिंह इनविटेशनल गोल्फ टूर्नामेंट प्लास्टिक मुक्त करने का ऐलान कर चुकी है।
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बड़े नाम हैं गोल्फ टूर का हिस्सा
जीव मिल्खा सिंह इनविटेशनल गोल्फ टूर्नामेंट पीजीटीआई कामहत्वपूर्ण टूर्नामेंट है। इसमें देश-विदेश से टॉप सीड के132 गोल्फर्स शिरकत कर रहे हैं। इनमें 129 प्रोफेशनल और 3 एमेच्योर गोल्फर्स शामिल हैं। इनमें पिछले साल केविजेता एस चिक्कारंगप्पा के अलावा राशिद खान, अजितेश संधू, ज्योति रंधावा, कार्तिक दिग्विजय सिंह, जयवीर सिंह अटवाल, हरमीत, गौरव घई, अर्जुन बबूटा, वीर अटवाल, कपिल कुमार, हरेंद्र गुप्ता, शमीम खान, शंकर दास, प्रियांशु सिंह शामिल हैं।
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ऐसे काम करती है नाडा
ताकत बढ़ाने वाली दवाओं के इस्तेमाल को पकड़ने के लिए डोप टेस्ट किया जाता है। किसी भी खिलाड़ी का किसी भी वक्त डोप टेस्ट लिया जा सकता है। किसी इवेंट से पहले या ट्रेनिंग कैंप के दौरान डोप टेस्ट में खिलाड़ियों का यूरिन लिया जाता है। यह टेस्ट नाडा (नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी) या फिर वाडा (वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी) की तरफ से कराए जाते हैं।
इसमें खिलाड़ियों के यूरिन को वाडा या नाडा की खास लैब में टेस्ट किया जाता है। नाडा की लैब दिल्ली और वाडा की लैब वर्ल्ड में कई जगहों पर हैं। इंटरनेशनल गेम्स में ड्रग्स के बढ़ते चलन को रोकने के लिए वाडा की स्थापना 10 नवंबर, 1999 को स्विट्जरलैंड में की गई थी। इसी के बाद हर देश में नाडा की स्थापना की जाने लगी। डोपिंग में 5 तरह की दवाएं आती हैं। ये हैं : स्टेरॉयड, पेप्टाइड हॉरमोन, नार्कोटिक्स, डाइयूरेटिक्स और ब्लड डोपिंग।
सजा का प्रावधान
पकड़े जाने पर इसके दोषियों को 2 या 4 साल सजा से लेकर आजीवन पाबंदी तक सजा का प्रावधान है। ‘ए’ टेस्ट में पॉजिटिव आने पर खिलाड़ी को बैन किया जा सकता है। खिलाड़ी चाहे तो ‘बी’ टेस्ट के लिए एंटी डोपिंग पैनल में अपील कर सकता है। इसके बाद फिर नमूने की जांच होती है। यदि ‘बी’ टेस्ट भी पॉजिटिव आए तो खिलाड़ी पर पाबंदी लग सकती है।
इसमें खिलाड़ियों के यूरिन को वाडा या नाडा की खास लैब में टेस्ट किया जाता है। नाडा की लैब दिल्ली और वाडा की लैब वर्ल्ड में कई जगहों पर हैं। इंटरनेशनल गेम्स में ड्रग्स के बढ़ते चलन को रोकने के लिए वाडा की स्थापना 10 नवंबर, 1999 को स्विट्जरलैंड में की गई थी। इसी के बाद हर देश में नाडा की स्थापना की जाने लगी। डोपिंग में 5 तरह की दवाएं आती हैं। ये हैं : स्टेरॉयड, पेप्टाइड हॉरमोन, नार्कोटिक्स, डाइयूरेटिक्स और ब्लड डोपिंग।
सजा का प्रावधान
पकड़े जाने पर इसके दोषियों को 2 या 4 साल सजा से लेकर आजीवन पाबंदी तक सजा का प्रावधान है। ‘ए’ टेस्ट में पॉजिटिव आने पर खिलाड़ी को बैन किया जा सकता है। खिलाड़ी चाहे तो ‘बी’ टेस्ट के लिए एंटी डोपिंग पैनल में अपील कर सकता है। इसके बाद फिर नमूने की जांच होती है। यदि ‘बी’ टेस्ट भी पॉजिटिव आए तो खिलाड़ी पर पाबंदी लग सकती है।