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पंचकूला में रोडवेज के ठेकाकर्मियों पर लाठीचार्ज के बाद केस दर्ज
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पंचकूला। नौकरी बहाली की मांग को लेकर शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा का घेराव करने जाते हरियाणा रोडवेज के ठेका कर्मियों पर लाठियां भांजने के बाद अब पुलिस ने उनके खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया है। सेक्टर-14 थाने में प्रिवेंशन ऑफ डमैज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट-1984 समेत सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी में बाधा डालना और सरकारी कर्मचारी को बलपूर्वक ड्यूटी से रोक उससे मारपीट करने के तहत केस दर्ज किया गया है। हालांकि, पुलिस ने मामले में फिलहाल किसी को नामजद नहीं किया है। लेकिन केस की आगामी जांच में पुलिस विरोध प्रदर्शन में शामिल ठेका कर्मियों को नामजद कर उन्हें अरेस्ट कर सकती है। पुलिस ने यह केस सब-इंस्पेक्टर सुखबीर सिंह की शिकायत पर दर्ज किया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक ठेका कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान बलपुर्वक विधानसभा की तरफ कूच करने के प्रयास के दौरान बैरिकेड्स तोड़े, सड़क किनारे लगी लोहे की ग्रिल उखाड़ी और पुलिसकर्मियों से धक्का मुक्की कर उनसे मारपीट की। बकौल शिकायतकर्ता हमले में घायल हुए पुलिसकर्मियों में एसपीओ ईरशाद अली, एसपीओ श्रवण कुमार, होमगार्ड वॉलंटियर पवन कुमार और हेड कांस्टेबल निर्मल सिंह शामिल हैं। उनका ासिविल अस्पताल-6 में मेडिकल करवाया गया था।
वहीं, पुलिस के लाठीचार्ज में दो ठेका कर्मी भी गंभीर रूप से घायल हुए थे। उनके अलावा 10 कर्मचारी चोटिल हुए थे। सभी घायलों को सिविल अस्पताल-6 में भर्ती करवाया गया था। लाठीचार्ज के बाद पुलिस ने करीब एक सौ से अधिक ठेका कर्मियों को राउंड-अप कर बाद में छोड़ दिया था। हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान हरियाणा सरकार ने बस संचालन के लिए चालक और परिचालकों को संविदा पर नौकरी दी थी। लेकिन हड़ताल खत्म होने पर सभी संविदा कर्मियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। जबकि सरकार ने भर्ती के दौरान हड़ताल खत्म होने पर उन्हें दूसरे विभागों में स्थानांतरित करने का आश्वासन दिया था।
लाठीचार्ज में भाग सिंह, सुरजीत, विजयपाल, संतोष कुमार, सतपाल, गुरपाल समेत कुल 12 लोग घायल हुए थे। हरियाणा रोडवेज यूनियन के नेता बलवान सिंह ने बताया था कि हरियाणा रोडवेज की 18 दिन हड़ताल चली थी। लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, इसके मद्देनजर सरकार ने लोगों को कॉंट्रेक्ट पर भर्ती किया था। लेकिन हड़ताल खत्म होने पर उन्हें नौकरी से बाहर निकाल दिया गया। अब वह नौकरी बाहली की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार उनकी सुनवाई को तैयार नहीं है।
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वहीं, पुलिस के लाठीचार्ज में दो ठेका कर्मी भी गंभीर रूप से घायल हुए थे। उनके अलावा 10 कर्मचारी चोटिल हुए थे। सभी घायलों को सिविल अस्पताल-6 में भर्ती करवाया गया था। लाठीचार्ज के बाद पुलिस ने करीब एक सौ से अधिक ठेका कर्मियों को राउंड-अप कर बाद में छोड़ दिया था। हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान हरियाणा सरकार ने बस संचालन के लिए चालक और परिचालकों को संविदा पर नौकरी दी थी। लेकिन हड़ताल खत्म होने पर सभी संविदा कर्मियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। जबकि सरकार ने भर्ती के दौरान हड़ताल खत्म होने पर उन्हें दूसरे विभागों में स्थानांतरित करने का आश्वासन दिया था।
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लाठीचार्ज में भाग सिंह, सुरजीत, विजयपाल, संतोष कुमार, सतपाल, गुरपाल समेत कुल 12 लोग घायल हुए थे। हरियाणा रोडवेज यूनियन के नेता बलवान सिंह ने बताया था कि हरियाणा रोडवेज की 18 दिन हड़ताल चली थी। लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, इसके मद्देनजर सरकार ने लोगों को कॉंट्रेक्ट पर भर्ती किया था। लेकिन हड़ताल खत्म होने पर उन्हें नौकरी से बाहर निकाल दिया गया। अब वह नौकरी बाहली की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार उनकी सुनवाई को तैयार नहीं है।
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