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अफसरों के ढुलमुल रवैये से 1125 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि
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नोएडा के ध्यानार्थ...
कैग रिपोर्ट
अफसरों के ढुलमुल रवैये से 1125 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि
15 से अधिक विभागों के उचित कार्रवाई न करने से हुआ नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नियंत्रण महालेखापरीक्षक-कैग की जांच रिपोर्ट ने हरियाणा के सरकारी अफसरों के ढुलमुल रवैये की पोल खोल दी है। अफसरों की लापरवाही से सरकार को 1125 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि हुई है। 15 से अधिक विभागों के उचित कार्रवाई न करने पर यह नुकसान उठाया पड़ा।
कैग रिपोर्ट बुधवार को सरकार ने विधानसभा में सदन पटल पर रखी। चिकित्सा विभाग की मार्च 2020 तक की लेखा परीक्षा के निरीक्षण में पाया गया कि 484 करोड़ रुपये के 754 मामले लंबित थे। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ने भारतीय खाद्य निगम से 161 करोड़ के ब्याज दावे को 921 दिनों तक लेट किया जिससे 13 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा। करनाल के डीएफएससी ने मानकों से अधिक संख्या में हेमदा, लाठर व भाटिया प्लिंथ में निगरानी स्टाफ की तैनाती की, जिससे 2 करोड़ रुपये अधिक खर्च हुए।
खेल विभाग ने सात जिला खेल परिषद एक खेल शारीरिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को मार्च 2016 से जनवरी 2018 तक बिना तत्काल आवश्यकता के 10 करोड़ जारी किए, जिन्हें चार साल तक सरकारी खातों से बाहर रखने पर 3.38 करोड़ का नुकसान हुआ। नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग, श्रम विभाग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, हरियाणा बिजली खरीद केंद्रों, एचएसआईआईडीसी, कृषि उद्योग निगम लिमिटेड, राज्य भंडारण निगम व चिकित्सा सेवा निगम में भी वित्तीय चपत सरकार को लगी है।
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कैग रिपोर्ट
अफसरों के ढुलमुल रवैये से 1125 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि
15 से अधिक विभागों के उचित कार्रवाई न करने से हुआ नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नियंत्रण महालेखापरीक्षक-कैग की जांच रिपोर्ट ने हरियाणा के सरकारी अफसरों के ढुलमुल रवैये की पोल खोल दी है। अफसरों की लापरवाही से सरकार को 1125 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि हुई है। 15 से अधिक विभागों के उचित कार्रवाई न करने पर यह नुकसान उठाया पड़ा।
कैग रिपोर्ट बुधवार को सरकार ने विधानसभा में सदन पटल पर रखी। चिकित्सा विभाग की मार्च 2020 तक की लेखा परीक्षा के निरीक्षण में पाया गया कि 484 करोड़ रुपये के 754 मामले लंबित थे। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ने भारतीय खाद्य निगम से 161 करोड़ के ब्याज दावे को 921 दिनों तक लेट किया जिससे 13 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा। करनाल के डीएफएससी ने मानकों से अधिक संख्या में हेमदा, लाठर व भाटिया प्लिंथ में निगरानी स्टाफ की तैनाती की, जिससे 2 करोड़ रुपये अधिक खर्च हुए।
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खेल विभाग ने सात जिला खेल परिषद एक खेल शारीरिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को मार्च 2016 से जनवरी 2018 तक बिना तत्काल आवश्यकता के 10 करोड़ जारी किए, जिन्हें चार साल तक सरकारी खातों से बाहर रखने पर 3.38 करोड़ का नुकसान हुआ। नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग, श्रम विभाग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, हरियाणा बिजली खरीद केंद्रों, एचएसआईआईडीसी, कृषि उद्योग निगम लिमिटेड, राज्य भंडारण निगम व चिकित्सा सेवा निगम में भी वित्तीय चपत सरकार को लगी है।
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