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डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया से जंग, कर्मचारी हैं कम, कैसे मिलेगी बीमारी से निजात

Wed, 06 Jul 2022 01:27 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 06 Jul 2022 01:27 AM IST
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Fight against dengue, malaria, chikungunya, workers are less, how to get rid of disease
कालका। बरसात के मौसम में एक तरफ जहां डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया समेत अन्य बीमारियाें के मरीज अस्पतालों में बढ़ने लगे हैं, वहीं कर्मचारियों की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। आलम यह है कि एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता पर अतिरिक्त दबाव है, जबकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि माइक्रो प्लान तैयार किया जा रहा है। विभाग में अगर एमपीएचडब्ल्यू (मल्टी पर्पज हेल्थ वर्कर) की बात की जाए तो कालका - पिंजौर में अधिकांश पद खाली पड़े हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया व अन्य जानलेवा बीमारियों को रोकने की जिम्मेदारी बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारियों को दिया है। जुलाई, अगस्त और सितंबर में डेंगू और मलेरिया के अधिक मरीज सामने आते हैं, ऐसे में बिना कर्मचारियों के स्वास्थ्य विभाग मच्छरों से जंग किस हद तक लड़ पाता है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
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अधिकांश पद पड़े हैं खाली
अधिकारियों के अनुसार कालका एसडीएच में बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी मेल के पांच पदों में से केवल तीन पदों पर ही कर्मचारी तैनात हैं जबकि दो पद खाली हैं। पिंजौर पीएचसी में भी मेल के पांच पदों के बावजूद तीन पदों पर ही कर्मचारी तैनात हैं। वहीं नानकपुर पीएचसी में मेल के तीन पद होने के बावजूद यहां पर एक भी कर्मचारी नहीं है। उधर सूरजपुर पीएचसी में मेल के लिए चार पद हैं। यहां भी केवल एक मेल ही कार्यरत है, जबकि तीन पद खाली हैं।
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देखरेख के लिए नहीं कोई अधिकारी
नानकपुर और सूरजपुर पीएचसी में देखरेख के लिए किसी भी अधिकारी की पोस्ट नहीं रखी गई है। ऐसे में लोगों ने सरकार से मांग की है कि निगरानी के लिए हेल्थ सुपरवाइजर की नियुक्ति की जाए।
जनसंख्या के लिहाज से बढ़ाए जाएं पद
जानकारी के अनुसार 5000 की जनसंख्या पर एक मेल और एक फीमेल बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी तैनात किया जाता है। वहीं कालका एसडीएच लगभग 70000 की जनसंख्या को कवर करता है। वर्तमान में कालका में पांच मेल और फीमेल के पद हैं, लेकिन जनसंख्या के लिहाज से करीब 14 मेल और 14 फीमेल बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों की आवश्यकता है।
सीजन में अस्थाई कर्मचारी किए जाएं नियुक्त
सीजन के दौरान मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया सहित अन्य बीमारी पैर पसारने लगती है। ऐसे में जब तक सरकार एमपीडब्ल्यू मेल और फीमेल की नई भर्ती नहीं करती तब तक अस्थाई तौर पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए ताकि इन बीमारियों के प्रति ज्यादा से ज्यादा संख्या में जनता जागरूक हो सके और इन बीमारियों से उनका बचाव हो सके।
मलेरिया, डेंगू से निपटने के लिए माइक्रो प्लान तैयार किया जा रहा है। एमपीएचडब्ल्यू मेल के खाली पदों की जानकारी उच्चाधिकारियों तक दी हुई है। पीक सीजन से निपटने के लिए चिह्नित एरिया में छिड़काव इत्यादि एहतियात को लेकर संबधित पार्षदों के साथ बातचीत की गई है। - डॉ. रूपिन्द्र सिंह सैनी, एसएमओ, कालका

एमपीएचडब्ल्यू के खाली पड़े पदों के बारे में हेड क्वार्टर को पहले ही अवगत करवा दिया गया है। पीक सीजन से निपटने के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए आशा वर्कर और स्वयंसेवकों से भी बात की जा रही है। वहीं क्षेत्र में फोगिंग के लिए नगर परिषद को रोस्टर जारी कर दिया गया है। - डॉ. राजीव नरवाल, डिप्टी सिविल सर्जन एवं डीएमओ पंचकूला
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