{"_id":"61786339b95b022bc81d09d8","slug":"farming-best-time-for-sowing-of-wheat-from-october-25-to-november-15-pkl-office-news-pkl431258033","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेती बाड़ी : गेहूं की बिजाई का समय 25 अक्तूबर से 15 नवंबर तक उत्तम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेती बाड़ी : गेहूं की बिजाई का समय 25 अक्तूबर से 15 नवंबर तक उत्तम
विज्ञापन
पंचकूला। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र पंचकूला ने आज गांव खेड़ी में किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता केंद्र की प्रभारी डॉ. श्रीदेवी ने की। पौध रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रविंद्र चौहान ने किसानों को गेहूं की उन्नतशील किस्मों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गेहूं की बिजाई का उत्तम समय 25 अक्तूबर से 15 नवंबर है। इस समय पर गेहूं की अगेती और समय पर बिजाई वाली किस्मों जैसे डब्ल्यूएच 1105, डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 303, एचडी 2967 आदि का चयन करना चाहिए।
बीज उपचार के लिए सबसे पहले किसान कीड़े मार दवा उसके बाद बीमारी वाली दवा और सबसे बाद अजोटोबैक्टर व पीसबी से बीज को उपचारित करें। बीज उपचार का भरपूर लाभ लेने के लिए इसकी सही विधि को अपनाना बहुत ही जरूरी है, जिसके लिए किसानों को बिजाई के लगभग 12 घंटे पहले क्लोरोफिरोफोस दवा की 60 मिलीलीटर मात्रा से उपचारित करना चाहिए। गेहूं के बीज को पक्के फर्श या पॉलिथीन पर फैला लें तथा 60 मिलीलीटर क्लोरोफिरोफोस को 2 लीटर पानी में घोलकर बीज पर एक समान छिड़के तथा बीज को इकट्ठा कर दें या थैले में भरकर रख दें।
बिजाई के तुरंत पहले रिक्सिल की 40 ग्राम मात्रा या कार्बनडाजम की 80 ग्राम मात्रा से सूखा उपचार करें। इसके बाद बीज पर गुड़ का घोल व उसके बाद अजोटोबेक्टर प्लस पीएसबी की 400 मिली लीटर मात्रा से उपचारित करें। यह जैविक उपचार वातावरण की नाइट्रोजन व खेत में पड़े फास्फोरस को घुलंशील बनाकर पौधों को उपलब्ध कर देगा तथा किसान नाइट्रोजन फास्फोरस की कम मात्रा का प्रयोग कर सकते हैं। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को अजोटोबेक्टर प्लस पीएसबी के टीके भी बांटे। केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने कृषि विविधीकरण के तहत मछली पालन अपनाने पर बल दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीज उपचार के लिए सबसे पहले किसान कीड़े मार दवा उसके बाद बीमारी वाली दवा और सबसे बाद अजोटोबैक्टर व पीसबी से बीज को उपचारित करें। बीज उपचार का भरपूर लाभ लेने के लिए इसकी सही विधि को अपनाना बहुत ही जरूरी है, जिसके लिए किसानों को बिजाई के लगभग 12 घंटे पहले क्लोरोफिरोफोस दवा की 60 मिलीलीटर मात्रा से उपचारित करना चाहिए। गेहूं के बीज को पक्के फर्श या पॉलिथीन पर फैला लें तथा 60 मिलीलीटर क्लोरोफिरोफोस को 2 लीटर पानी में घोलकर बीज पर एक समान छिड़के तथा बीज को इकट्ठा कर दें या थैले में भरकर रख दें।
विज्ञापन
बिजाई के तुरंत पहले रिक्सिल की 40 ग्राम मात्रा या कार्बनडाजम की 80 ग्राम मात्रा से सूखा उपचार करें। इसके बाद बीज पर गुड़ का घोल व उसके बाद अजोटोबेक्टर प्लस पीएसबी की 400 मिली लीटर मात्रा से उपचारित करें। यह जैविक उपचार वातावरण की नाइट्रोजन व खेत में पड़े फास्फोरस को घुलंशील बनाकर पौधों को उपलब्ध कर देगा तथा किसान नाइट्रोजन फास्फोरस की कम मात्रा का प्रयोग कर सकते हैं। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को अजोटोबेक्टर प्लस पीएसबी के टीके भी बांटे। केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने कृषि विविधीकरण के तहत मछली पालन अपनाने पर बल दिया।
विज्ञापन