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मृतक 60 वर्ष से ऊपर तो भी राजीव गांधी परिवार बीमा के तहत परिजन मुआवजे के अधिकारी: हाईकोर्ट
Fri, 03 Apr 2020 11:11 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Apr 2020 11:11 AM IST
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि मृतक की आयु 60 वर्ष से अधिक भी हो तो भी उसका परिवार राजीव गांधी परिवार बीमा योजना का लाभ पाने का पात्र है। हाईकोर्ट ने यह आदेश हरियाणा सरकार द्वारा लोक अदालत के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज करते हुए दी है।
याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा सरकार ने कहा कि संतोष के पति की मौत कुएं में गिरने से 22 मार्च 2012 को हो गई थी। इसके बाद लोक अदालत में केस पहुंचा तो लोक अदालत ने मृतक के परिजनों को 1 लाख रुपये मुआवजा जारी करने का आदेश दिया।
सरकार ने हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि मृतक 60 वर्ष से अधिक का था इसलिए बीमा राशि के लिए उसके परिजन पात्र नहीं हैं। हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए कहा कि योजना में मृतक की अधिकतम आयु का जिक्र ही नहीं है।
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इसमें यह शर्त है कि मृतक का बेटा 25 वर्ष से अधिक का न हो ओर यदि पत्नी हो तो वह क्लेम की राशि मिलने से पहले दूसरा विवाह न कर चुकी हो। हाईकोर्ट ने कहा कि यह दोनों स्थितियां इस मामले में लाभार्थियों के पक्ष में हैं और ऐसे में सरकार की अपील आधारविहीन है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए लोक अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी।
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याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा सरकार ने कहा कि संतोष के पति की मौत कुएं में गिरने से 22 मार्च 2012 को हो गई थी। इसके बाद लोक अदालत में केस पहुंचा तो लोक अदालत ने मृतक के परिजनों को 1 लाख रुपये मुआवजा जारी करने का आदेश दिया।
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सरकार ने हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि मृतक 60 वर्ष से अधिक का था इसलिए बीमा राशि के लिए उसके परिजन पात्र नहीं हैं। हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए कहा कि योजना में मृतक की अधिकतम आयु का जिक्र ही नहीं है।
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इसमें यह शर्त है कि मृतक का बेटा 25 वर्ष से अधिक का न हो ओर यदि पत्नी हो तो वह क्लेम की राशि मिलने से पहले दूसरा विवाह न कर चुकी हो। हाईकोर्ट ने कहा कि यह दोनों स्थितियां इस मामले में लाभार्थियों के पक्ष में हैं और ऐसे में सरकार की अपील आधारविहीन है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए लोक अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी।