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Panchkula News: सेल्फ प्रोपेल्ड हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट के इंजन की बंगलूरु में हो रही जांच
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संवाद न्यूज एजेंसी
कालका। कालका-शिमला रेलमार्ग पर फरवरी में ट्रायल के दौरान फेल ट्रेन सेट (सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट) के इंजन की मरम्मत बंगलूरु में की जा रही है। ट्रेन सेट का निर्माण करने वाले इंजीनियर एक कोच से इंजन को निकालकर अपने साथ कंपनी ले गए हैं, जोकि वहां इंजन का विभिन्न पहलुओं से जांच कर रहे है। ट्रेनसेट कालका रेलवे स्टेशन पर सीनियर सेक्शन इंजीनियर कैरिज एवं वैगन कार्यालय के सामने बने ट्रैक पर खड़ा है।
बता दें कि उक्त ट्रेन सेट को फरवरी में कालका-शिमला रेलमार्ग पर ट्रायल के लिए उतारा गया था। 16 फरवरी को ट्रेन सेट का पहला ट्रायल किया गया था। सुबह करीब 10:50 बजे ट्रेन सेट को कालका से शिमला के लिए रवाना किया था। करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर तकनीकी खराबी आने के चलते ट्रेन सेट आगे न बढ़ सका। वहीं दूसरा ट्रायल 19 फरवरी को किया गया था। इस दौरान कालका से करीब 9:40 बजे ट्रेन सेट को कोटि के लिए रवाना किया गया, लेकिन इंजन गर्म होने के चलते ट्रेन सेट को टकसाल से वापस कालका भेज दिया गया। दूसरा ट्रायल फेल होने के बाद ट्रेनसेट के साथ बंगलूरु से आए इंजीनियर की टीम को बहुत उम्मीद थी की तीसरा ट्रायल सफल हो जाएगा। तीसरे ट्रायल के दौरान ट्रेन सेट दस किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ही हांफ गया था।
ट्रायल में 20 किमी भी तय नहीं कर पाया था ट्रेन सेट
तीनों ट्रायल के दौरान सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट 20 किलोमीटर की दूरी भी तय नहीं कर पाई थी। ट्रायल के पहले दिन ट्रेन सेट केवल आधा किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाया। दूसरे ट्रायल में ट्रेन सेट करीब 6 किलोमीटर चलकर हांफने लगा था। वहीं तीसरे ट्रायल के दौरान ट्रेन सेट का करीब दस किलोमीटर जाकर ही इंजन गर्म होने लगा था। ट्रायल के लिए (अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन) आईआरडीएसओ की टीम लखनऊ से कालका पहुंची थी जोकि करीब दस दिन कालका रही। ट्रेनसेट का तीसरा ट्रायल फेल होने के बाद उक्त टीम लौट गई थी।
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बेंगलुर की कंपनी जिसने इसका निर्माण किया है, वह ट्रेन सेट के एक कोच के इंजन को निकालकर अपने साथ ले गई है। जहां पर इसकी विभिन्न पहलुओं से जांच कर रहे हैं। फिलहाल ट्रेनसेट कालका रेलवे स्टेशन पर सीनियर सेक्शन इंजीनियर कैरिज एवं वैगन कार्यालय के सामने बने ट्रैक पर खड़ा हुआ है। - सीताराम मीणा, स्टेशन अधीक्षक कालका।
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कालका। कालका-शिमला रेलमार्ग पर फरवरी में ट्रायल के दौरान फेल ट्रेन सेट (सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट) के इंजन की मरम्मत बंगलूरु में की जा रही है। ट्रेन सेट का निर्माण करने वाले इंजीनियर एक कोच से इंजन को निकालकर अपने साथ कंपनी ले गए हैं, जोकि वहां इंजन का विभिन्न पहलुओं से जांच कर रहे है। ट्रेनसेट कालका रेलवे स्टेशन पर सीनियर सेक्शन इंजीनियर कैरिज एवं वैगन कार्यालय के सामने बने ट्रैक पर खड़ा है।
बता दें कि उक्त ट्रेन सेट को फरवरी में कालका-शिमला रेलमार्ग पर ट्रायल के लिए उतारा गया था। 16 फरवरी को ट्रेन सेट का पहला ट्रायल किया गया था। सुबह करीब 10:50 बजे ट्रेन सेट को कालका से शिमला के लिए रवाना किया था। करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर तकनीकी खराबी आने के चलते ट्रेन सेट आगे न बढ़ सका। वहीं दूसरा ट्रायल 19 फरवरी को किया गया था। इस दौरान कालका से करीब 9:40 बजे ट्रेन सेट को कोटि के लिए रवाना किया गया, लेकिन इंजन गर्म होने के चलते ट्रेन सेट को टकसाल से वापस कालका भेज दिया गया। दूसरा ट्रायल फेल होने के बाद ट्रेनसेट के साथ बंगलूरु से आए इंजीनियर की टीम को बहुत उम्मीद थी की तीसरा ट्रायल सफल हो जाएगा। तीसरे ट्रायल के दौरान ट्रेन सेट दस किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ही हांफ गया था।
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ट्रायल में 20 किमी भी तय नहीं कर पाया था ट्रेन सेट
तीनों ट्रायल के दौरान सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट 20 किलोमीटर की दूरी भी तय नहीं कर पाई थी। ट्रायल के पहले दिन ट्रेन सेट केवल आधा किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाया। दूसरे ट्रायल में ट्रेन सेट करीब 6 किलोमीटर चलकर हांफने लगा था। वहीं तीसरे ट्रायल के दौरान ट्रेन सेट का करीब दस किलोमीटर जाकर ही इंजन गर्म होने लगा था। ट्रायल के लिए (अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन) आईआरडीएसओ की टीम लखनऊ से कालका पहुंची थी जोकि करीब दस दिन कालका रही। ट्रेनसेट का तीसरा ट्रायल फेल होने के बाद उक्त टीम लौट गई थी।
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बेंगलुर की कंपनी जिसने इसका निर्माण किया है, वह ट्रेन सेट के एक कोच के इंजन को निकालकर अपने साथ ले गई है। जहां पर इसकी विभिन्न पहलुओं से जांच कर रहे हैं। फिलहाल ट्रेनसेट कालका रेलवे स्टेशन पर सीनियर सेक्शन इंजीनियर कैरिज एवं वैगन कार्यालय के सामने बने ट्रैक पर खड़ा हुआ है। - सीताराम मीणा, स्टेशन अधीक्षक कालका।