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Panchkula News: दिसंबर 2019 से नहीं मिला कर्मियों को वेतन, संस्थान की संपत्ति से भुगतान का आदेश
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चंडीगढ़। संगरूर के बाबा हीरा सिंह भट्ठल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके वेतन का भुगतान करने के लिए संस्थान की संपत्ति से वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए अजीत सिंह व अन्य ने बताया कि वह बाबा हीरा सिंह भट्ठल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में कार्यरत हैं। उन्हें दिसंबर 2019 से वेतन का भुगतान ही नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं को जानकारी मिली कि सरकार के आदेश पर संस्थान अपनी संपत्ति का निपटारा करने को जा रहा है जिसके चलते उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर कहा था कि संस्थान अपने कर्मचारियों के वेतन दावे का निपटारा करे बिना अपनी संपत्ति नहीं बेच सकता। ऐसे में कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। अब कोर्ट को बताया गया कि संस्थान के पास कुछ संपत्ति व बैंक खाते हैं। यह एक स्वयत्त संस्थान है और ऐसे में इसे याचिकाकर्ताओं को भुगतान करने का आदेश दिया जाए।
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कोर्ट ने कहा कि अब हमारे पास तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक विभाग के प्रधान सचिव व संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य को संस्थान की संपत्ति से कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने का निर्देश जारी करने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा है।
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याचिका दाखिल करते हुए अजीत सिंह व अन्य ने बताया कि वह बाबा हीरा सिंह भट्ठल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में कार्यरत हैं। उन्हें दिसंबर 2019 से वेतन का भुगतान ही नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं को जानकारी मिली कि सरकार के आदेश पर संस्थान अपनी संपत्ति का निपटारा करने को जा रहा है जिसके चलते उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
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कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर कहा था कि संस्थान अपने कर्मचारियों के वेतन दावे का निपटारा करे बिना अपनी संपत्ति नहीं बेच सकता। ऐसे में कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। अब कोर्ट को बताया गया कि संस्थान के पास कुछ संपत्ति व बैंक खाते हैं। यह एक स्वयत्त संस्थान है और ऐसे में इसे याचिकाकर्ताओं को भुगतान करने का आदेश दिया जाए।
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कोर्ट ने कहा कि अब हमारे पास तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक विभाग के प्रधान सचिव व संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य को संस्थान की संपत्ति से कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने का निर्देश जारी करने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा है।