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खटौला नदी को खोदकर बना दिया पहाड़
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पंचकूला। माइनिंग माफिया दिन-रात नदियों का सीना छलनी कर रहा है और प्रशासनिक अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हैं। इसी का फायदा उठाकर माफिया ने नदी के बीच में रेत के पहाड़ खड़े कर दिए हैं। इतना ही नहीं रेत से ओवर लोडिड ट्रक बिना किसी खौफ के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इस कारण सड़कों की हालत भी जर्जर हो रही है। सड़क किनारे ट्रक से गिरने वाली रेत और बजरी हादसे का कारण बन रहे हैं। लेकिन माइनिंग अधिकारी हैं कि कुछ करने की जहमत ही नहीं उठा रहे हैं।
पंचकूला जिले में सबसे ज्यादा अवैध माइनिंग का कारोबार रत्तेवाली, गोविंदपुर, भुड्ड मंडलाय, खटौला उर्फ सुखदर्शनपुर में चल रहा है। यहां बिना किसी तोल यंत्र के ही एक के बाद एक ट्रक नदी से ओवरलोड होकर निकल रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के दावे की पड़ताल करने के लिए अमर उजाला टीम ने मंगलवार को रायपुररानी क्षेत्र का दौरा किया तो हैरान कर देने वाले दृश्य देखने को मिले।
एक तरफ से उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा आदेश जारी कर रहे हैं कि अवैध माइनिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, दूसरी ओर माफिया पोकलेन मशीन से नदियों की खुदाई कर रहा है। अवैध माइनिंग का खेल किसकी रहनुमाई में चल रहा है ये जांच का विषय है। लेकिन यदि उपायुक्त टीम के साथ स्वयं मौके का मुआयना करें तो सच्चाई खुद ही उनके सामने आ जाएगी।
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चार फुट की मंजूरी, खोद डाला 15 फुट
मोटी कमाई करने के लिए माइनिंग माफिया नियमों की परवाह न करते हुए नदियों की खुदाई कर रहा है। प्रशासन की ओर से मात्र चार फुट खुदाई की मंजूरी दी जाती है, लेकिन माफिया रेत और बजरी को निकालने के लिए 15 से 20 फुट तक खुदाई करते हैं। किसी बाहरी व्यक्ति को शक न हो इसके लिए वह जिस स्थान पर खुदाई करते हैं उसके सामने ही रेत और बजरी को इकट्ठा कर देते हैं। नियमानुसार ग्रेवल को करीब 20 फीसदी ही इकट्ठा किया जा सकता है, लेकिन मौके पर करीब 70 से 80 फीसदी पड़ा मिला।
जल संकट के लिए भी माफिया जिम्मेदारी
गिरते भूजल के लिए भी माइनिंग माफिया जिम्मेदार है। जितना ज्यादा वह नदियों की खुदाई करेगा भूजल उतना ही ज्यादा गिरेगा। एक तरफ से प्रशासनिक अधिकारी भूजल को बचाने के लिए किसानों को लुभा रहा है। वहीं दूसरी ओर माइनिंग की मंजूरी दे रहा है। यदि माइनिंग का खेल ऐसे ही चलता रहा तो कैसे भूजल स्तर को गिरने से रोका जा सकता है।
माइनिंग के लिए कुछ कंपनियों को मंजूरी दी गई है। यदि वह नियमों की अनदेखी कर खुदाई कर रहे हैं तो जांच के बाद उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अवैध माइनिंग को लेकर विभागीय अधिकारी सख्त हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को गलत कार्य नहीं करने दिया जाएगा। - सुनील कुमार, माइनिंग अधिकारी पंचकूला।
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पंचकूला जिले में सबसे ज्यादा अवैध माइनिंग का कारोबार रत्तेवाली, गोविंदपुर, भुड्ड मंडलाय, खटौला उर्फ सुखदर्शनपुर में चल रहा है। यहां बिना किसी तोल यंत्र के ही एक के बाद एक ट्रक नदी से ओवरलोड होकर निकल रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के दावे की पड़ताल करने के लिए अमर उजाला टीम ने मंगलवार को रायपुररानी क्षेत्र का दौरा किया तो हैरान कर देने वाले दृश्य देखने को मिले।
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एक तरफ से उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा आदेश जारी कर रहे हैं कि अवैध माइनिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, दूसरी ओर माफिया पोकलेन मशीन से नदियों की खुदाई कर रहा है। अवैध माइनिंग का खेल किसकी रहनुमाई में चल रहा है ये जांच का विषय है। लेकिन यदि उपायुक्त टीम के साथ स्वयं मौके का मुआयना करें तो सच्चाई खुद ही उनके सामने आ जाएगी।
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चार फुट की मंजूरी, खोद डाला 15 फुट
मोटी कमाई करने के लिए माइनिंग माफिया नियमों की परवाह न करते हुए नदियों की खुदाई कर रहा है। प्रशासन की ओर से मात्र चार फुट खुदाई की मंजूरी दी जाती है, लेकिन माफिया रेत और बजरी को निकालने के लिए 15 से 20 फुट तक खुदाई करते हैं। किसी बाहरी व्यक्ति को शक न हो इसके लिए वह जिस स्थान पर खुदाई करते हैं उसके सामने ही रेत और बजरी को इकट्ठा कर देते हैं। नियमानुसार ग्रेवल को करीब 20 फीसदी ही इकट्ठा किया जा सकता है, लेकिन मौके पर करीब 70 से 80 फीसदी पड़ा मिला।
जल संकट के लिए भी माफिया जिम्मेदारी
गिरते भूजल के लिए भी माइनिंग माफिया जिम्मेदार है। जितना ज्यादा वह नदियों की खुदाई करेगा भूजल उतना ही ज्यादा गिरेगा। एक तरफ से प्रशासनिक अधिकारी भूजल को बचाने के लिए किसानों को लुभा रहा है। वहीं दूसरी ओर माइनिंग की मंजूरी दे रहा है। यदि माइनिंग का खेल ऐसे ही चलता रहा तो कैसे भूजल स्तर को गिरने से रोका जा सकता है।
माइनिंग के लिए कुछ कंपनियों को मंजूरी दी गई है। यदि वह नियमों की अनदेखी कर खुदाई कर रहे हैं तो जांच के बाद उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अवैध माइनिंग को लेकर विभागीय अधिकारी सख्त हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को गलत कार्य नहीं करने दिया जाएगा। - सुनील कुमार, माइनिंग अधिकारी पंचकूला।