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नशे की लत ने किया तबाह : किसी की करोड़ों की दुकान बिकी तो किसी का परिवार टूटा
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माई सिटी रिपोर्टर पंचकूला/जीरकपुर। युवाओं की रगों में नशा दौड़ रहा है, जिंदगी मौत के मुहाने पर पहुंच रही है। नशे का कारोबार करने वालों पर पुलिस कार्रवाई भी कर रही है, जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, बावजूद इसके नशे की प्रवृत्ति कम नहीं हो रही है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब नशे ने जिंदगी छीन ली और परिवार को बर्बादी के कगार पर ला दिया। कुछ युवाओं ने नशे के चक्कर में अपनी दुकान तक बेच दी। कई जेल भी गए। इसका खुलासा ढकोली के हेल्थ कम्युनिटी सेंटर स्थित नशा मुक्ति केंद्र में आने वाले मरीजों के आंकड़ों से हो रहा है। इस छोटे से सेंटर में रोजाना नशा छुड़वाने के लिए करीब 50 से 60 लोग रोजाना दवा लेकर जाते हैं। केस स्टडी के साथ पेश है रिपोर्ट.........
केस नंबर एक
करोड़ों रुपये की बेच दी दुकान
जीरकपुर निवासी एक 25 साल के युवक ने कॉलेज में गलत संगत के चलते इंजेक्शन से चिट्टा लेने लगा। तीन से चार साल बाद हालात ऐसे बने कि उसने नशे के लिए चंडीगढ़ सेक्टर-17 में स्थित अपनी करोड़ों रुपये की दुकान बेच दी। पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी। मां को पता चला तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। किसी तरह बहला फुसलाकर उसकी मां 2020 में उसे नशा मुक्ति केंद्र लाई। तीन साल बाद उसने नशा बिल्कुल छोड़ दिया। अब वह नया गांव में दुकान लेकर चला रहा है।
केस नंबर दो
नशे के चक्कर में खानी पड़ी जेल की हवा
ढकोली निवासी करीब 25 साल के युवा ट्रक ड्राइवर नशे के चक्कर में जेल तक गया। उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई। पहले अफीम और भुक्की का सेवन करता था। पुलिस ने उसे नशे के साथ गिरफ्तार किया और वह चार से पांच साल जेल में रहा। इस बीच जेल में गलत संगत के चलते उसने चिट्टा लेना शुरू कर दिया। जेल से आने के बाद इसकी भनक घर वालों को लगी तो उन्होंने रेडक्रॉस वालों को बेटे के नशे के बारे में सूचना देकर उसे पकड़वाया और करीब 6 माह तक वह रेडक्रॉस में उपचार के लिए रहा। उसके बाद उसकी काउंसलिंग ढकोली के नशा मुक्ति केंद्र में की गई और प्रॉपर दवाएं लेने लगा है। अब उसकी सेहत में भी सुधार हो रहा है।
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केस नंबर तीन
नशा मुक्ति केंद्र में कांटेक्ट बढ़ाकर, करने लगा नशे का कारोबार
जीरकपुर निवासी एक बिजनेस मैन के बेटे को नशा की ऐसी लत लगी कि उसे हिमाचल स्थित नशा मुक्ति केंद्र में उसके पिता ने दाखिल करवाया। वहां उसे गलत संगत ने ज्यादा नशेड़ी बना दिया। वह पहले सिंपल नशा करता था। नशा मुक्ति केंद्र से आने के बाद इंजेक्शन के जरिए चिट्टा लेने लगा। घर वाले पैसे नहीं देते थे तो नशे का कारोबार शुरू कर दिया और अंबाला से नशा लेकर आने लगा। जब घर वालों को बेटे के नशा करने के बारे में पता चला तो उन्होंने उसे घर में बंद कर दिया। उसे काफी दिनों तक घर में रखा। काफी दिनों घर में बंद रहने के बाद काउंसलिंग के लिए तैयार हुआ और उसके पिता उसे ढकोली के हेल्थ कम्युनिटी सेंटर लेकर पहुंचे। उसमें सुधार है। अब उसने नशा भी छोड़ दिया है।
नशा मुक्ति केंद्र के दवा सेंटर पर रोजाना काफी लोग दवा और काउंसलिंग के लिए आते हैं। करीब चार साल से काम कर रहा हूं। अब तक 60 से 70 लोगों को काउंसलिंग और डॉक्टर द्वारा लिखे दवा से नशा छुड़वा चुका हूं। - नगिंदर सिंह, नर्सिंग अधिकारी नशा मुक्ति केंद्र, ढकोली।
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केस नंबर एक
करोड़ों रुपये की बेच दी दुकान
जीरकपुर निवासी एक 25 साल के युवक ने कॉलेज में गलत संगत के चलते इंजेक्शन से चिट्टा लेने लगा। तीन से चार साल बाद हालात ऐसे बने कि उसने नशे के लिए चंडीगढ़ सेक्टर-17 में स्थित अपनी करोड़ों रुपये की दुकान बेच दी। पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी। मां को पता चला तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। किसी तरह बहला फुसलाकर उसकी मां 2020 में उसे नशा मुक्ति केंद्र लाई। तीन साल बाद उसने नशा बिल्कुल छोड़ दिया। अब वह नया गांव में दुकान लेकर चला रहा है।
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केस नंबर दो
नशे के चक्कर में खानी पड़ी जेल की हवा
ढकोली निवासी करीब 25 साल के युवा ट्रक ड्राइवर नशे के चक्कर में जेल तक गया। उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई। पहले अफीम और भुक्की का सेवन करता था। पुलिस ने उसे नशे के साथ गिरफ्तार किया और वह चार से पांच साल जेल में रहा। इस बीच जेल में गलत संगत के चलते उसने चिट्टा लेना शुरू कर दिया। जेल से आने के बाद इसकी भनक घर वालों को लगी तो उन्होंने रेडक्रॉस वालों को बेटे के नशे के बारे में सूचना देकर उसे पकड़वाया और करीब 6 माह तक वह रेडक्रॉस में उपचार के लिए रहा। उसके बाद उसकी काउंसलिंग ढकोली के नशा मुक्ति केंद्र में की गई और प्रॉपर दवाएं लेने लगा है। अब उसकी सेहत में भी सुधार हो रहा है।
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केस नंबर तीन
नशा मुक्ति केंद्र में कांटेक्ट बढ़ाकर, करने लगा नशे का कारोबार
जीरकपुर निवासी एक बिजनेस मैन के बेटे को नशा की ऐसी लत लगी कि उसे हिमाचल स्थित नशा मुक्ति केंद्र में उसके पिता ने दाखिल करवाया। वहां उसे गलत संगत ने ज्यादा नशेड़ी बना दिया। वह पहले सिंपल नशा करता था। नशा मुक्ति केंद्र से आने के बाद इंजेक्शन के जरिए चिट्टा लेने लगा। घर वाले पैसे नहीं देते थे तो नशे का कारोबार शुरू कर दिया और अंबाला से नशा लेकर आने लगा। जब घर वालों को बेटे के नशा करने के बारे में पता चला तो उन्होंने उसे घर में बंद कर दिया। उसे काफी दिनों तक घर में रखा। काफी दिनों घर में बंद रहने के बाद काउंसलिंग के लिए तैयार हुआ और उसके पिता उसे ढकोली के हेल्थ कम्युनिटी सेंटर लेकर पहुंचे। उसमें सुधार है। अब उसने नशा भी छोड़ दिया है।
नशा मुक्ति केंद्र के दवा सेंटर पर रोजाना काफी लोग दवा और काउंसलिंग के लिए आते हैं। करीब चार साल से काम कर रहा हूं। अब तक 60 से 70 लोगों को काउंसलिंग और डॉक्टर द्वारा लिखे दवा से नशा छुड़वा चुका हूं। - नगिंदर सिंह, नर्सिंग अधिकारी नशा मुक्ति केंद्र, ढकोली।