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विकास : लैंड पूलिंग पॉलिसी अपनाकर नगर निगम विकसित करेगा 24 नए सेक्टर

Tue, 08 Mar 2022 01:08 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 01:08 AM IST
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Development: By adopting land pooling policy, the Municipal Corporation will develop 24 new sectors
पंचकूला। नगर निगम गुजरात और मोहाली की तर्ज पर लैंड पूलिंग नीति अपनाकर पंचकूला का विकास करेगा। इस आशय का प्रस्ताव सोमवार को निगम की बैठक में सर्वसम्मति से पास किया गया। डीएमसी दीपक सुरा ने बैठक में यह प्रस्ताव रखा। इसके बारे में मेयर कुलभूषण गोयल ने विस्तृत जानकारी दी। पार्षदों ने इस प्रस्ताव पर जल्द काम शुरू करने की सहमति दी। मेयर कुलभूषण गोयल ने बताया कि मोहाली में लैंड पूलिंग पॉलिसी के चलते ही बड़ी तेजी से विकास हुआ है।
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इसका अनुसरण कर पंचकूला में भी नए सेक्टर बनाकर विकास किया जाएगा। कुलभूषण गोयल ने बताया कि नगर निगम अधिनियम 1994 के अधिकारों के अनुसार 42ए के क्लॉज 42 (1) के अनुसार शहरी क्षेत्र का विकास नगर निगम के अधीन आता है। कोट बिल्ला अर्बन कांप्लेक्स (पंचकूला एक्सटेंशन पार्ट-2) का मास्टर प्लान वर्ष-2013 में बना था। जिसमें 1 से 24 सेक्टर बनाए जाने थे, उन सभी सेक्टरों का विकास नगर निगम द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। सभी सेक्टरों को मोहाली (गमाडा) की तर्ज पर लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत भूमि मालिकों से जमीन के इकरारनामा किया जाएगा, ताकि इन सेक्टरों का विकास किया जा सके। कई वर्षों से पंचकूला का विकास केवल 32 सेक्टर तक ही सीमित है। लैंड पूलिंग पॉलिसी के लिए कंसलटेेंट भी नियुक्त किए जाएंगे।
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मेयर कुलभूषण गोयल ने बताया कि प्रस्ताव पास होने के बाद लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीनों का इकरारनामा करके सबसे पहले सड़कों को विकसित किया जाएगा। पंजाब और गुजरात राज्य में लैंड पूलिंग स्कीम के तहत कई प्रोजेक्ट विकसित किए गए हैं, लेकिन हरियाणा में कभी इस पर गंभीरता से काम नहीं हुआ। इस पॉलिसी के बाद जमीनों की कीमतों में भी काफी उछाल देखने को मिलेगा। इस स्कीम के तहत प्रोजेक्ट विकसित होने पर किसानों एवं जमीन मालिकों को मिलने वाली जमीन की कीमत प्रति वर्ग गज में मिलने का बड़ा फायदा होगा।
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लैंड पूलिंग स्कीम के तहत किसी भी जमीन मालिक को एक एकड़ जमीन के बदले उसी रिहायशी सेक्टर के विकसित होने पर 500 से 1000 वर्ग गज तक का रिहायशी प्लाट और एक कामर्शियल प्लाट (प्लान के हिसाब से) देने का प्रावधान है। इसमें नगर निगम को पैसे देकर जमीन का अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा और न ही कोर्ट से एन्हांसमेंट आने का कोई चक्कर होगा। इसके अलावा सेक्टर विभाजित सड़कों में जमीन दिए जाने पर निगम की तरफ से टीडीआर (ट्रांसफर डेवलपमेंट अधिकार) का फायदा, सड़क के आसपास के सेक्टरों में रिहायशी प्लाट या फिर कामर्शियल यूनिट पर अतिरिक्त एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) का लाभ दिया जा सकता है।

लैंड पूलिंग स्कीम के तहत प्रस्ताव पास करके अर्बन लोकल बॉडिज को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद ही प्रोजेक्ट को धरातल पर शुरू करने की दिशा में काम होगा। इसमें सरकार के नियमानुसार इडब्ल्यूएस के मकान भी बनाए जाएंगे।
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