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Panchkula News: सोलन में दफ्तरों और दुकानों में गंबूजिया मछली पालकर डेंगू को किया जाएगा नियंत्रित
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सोलन-पंचकूला क्रॉस बार्डर मीटिंग में सोमवार को गंबूजिया मछली का पालन कर कार्यालयों और घरों से लारवा दूर करने का प्लान बनाया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना था कि यह मछली डेंगू के लारवा को खा जाती है। मछली साफ पानी में लारवा पैदा नहीं होने देती है, इसलिए डेंगू फैलने का खतरा कम हो जाता है। पंचकूला की सीएमओ डॉ. मुक्ता कुमार ने कहा कि इसके पालन करने से डेंगू का खतरा कम हुआ है।
उन्होंने सोलन के सीएमओ डॉ. राजन उप्पल को क्रॉस बार्डर मीटिंग में चर्चा के दौरान कहा कि इस मछली का पालन दफ्तरों में किया जाए, जिससे कि डेंगू का खतरा कम हो जाए। इस पर डॉ. राजन उप्पल ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस मछली को सरकारी दफ्तरों के साथ प्राइवेट ऑफिस और दुकानदारों को पालने के लिए कहेंगे, जिससे कि डेंगू का खतरा कम हो जाए। डेंगू को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा के पंचकूला और हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बीच सीएमओ ने क्रॉस बार्डर मीटिंग सोमवार को सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में की। इसमें सोलन से आई टीम ने पंचकूला सिविल अस्पताल के दिए सुझाव को माना है।
डेंगू को नियंत्रित करने के लिए उठाए उचित कदम
पंचकूला की सीएमओ मुक्ता कुमार ने कहा कि डेंगू को नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचकूला में पिछले साल कालका में सबसे अधिक डेंगू के मामले सामने आए थे। अधिक मामले आने के बाद इस बार शुरू से ही 50 टीमों को लगाकर डोर टू डोर सर्वे कराया गया। इस दौरान पानी में लारवा की चेकिंग के दौरान टीमों के जाने की लाइव लोकेशन फोन से चेक की गई। लारवा की जांच करवाने के लिए ब्रीडर चेकर का इस्तेमाल किया गया। इस पर सोलन से आई टीम ने इस बात को मानने के लिए हामी भरदी। उन्होंने कहा कि डेंगू की जांच के लिए ब्रीडर चेकर का इस्तेमाल करेंगे। इसके लिए वह हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को लेटर लिखेंगे।
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हॉट स्पाट का हो डोर टू डोर सर्वे
सोलन से आई टीम को हाट स्पॉट बनी जगह का डोर टू डोर सर्वे करने के लिए कहा गया। बद्दी इस समय हॉट स्पॉट बन गया है। डेंगू के यहां 291 केस सामने आ चुके हैं। पंचकूला जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुरेश भोसले ने कहा कि कई टीमें लगाकर डोर टू डोर सर्वे कराएं। इसके साथ ही जिन जगहों पर डेंगू के केस आएं हैं, वहां पर फॉगिंग की जाए। अगर दोबारा वायलेशन मिलती है तो चालान काटे जाएं। इसमें टीम चेकिंग के दौरान लारवा मिलने पर बर्तनों को भी खाली कराए। इसमें विभाग की अन्य टीमें भी भाग लें। इससे भी डेंगू को रोकने में मदद मिलेगी।
समय पर साझा करें जानकारी
सोलन के सीएमओ डॉ. राजन उप्पल ने कहा कि डेंगू के केस अगर पंचकूला या सोलन जिले में आते हैं, तो उन्हें सही डाटा दिया जाए। इससे समय पर लोगों के घरों में फॉगिंग होने के साथ सभी के टेस्ट किए जा सकेंगे। पंचकूला जिले के लोग परवाणू, बद्दी में काम करते हैं। अगर इस दौरान डेंगू की बीमारी होती है या इससे कोई मौत होती है तो उसका डाटा भी एक दूसरे को आसानी से मिलना चाहिए। इस पर दोनों जिलों की टीमों ने सहमति जताई।
क्रॉस बार्डर मीटिंग में पंचकूला और सोलन जिले की टीमों ने अपने विचार रखे। डेंगू की रोकथाम के लिए सहमति बनी है। डेंगू को रेाकने के लिए काम किया जाएगा। -डॉ. मुक्ता कुमार, सीएमओ, पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर-6
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पंचकूला। सोलन-पंचकूला क्रॉस बार्डर मीटिंग में सोमवार को गंबूजिया मछली का पालन कर कार्यालयों और घरों से लारवा दूर करने का प्लान बनाया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना था कि यह मछली डेंगू के लारवा को खा जाती है। मछली साफ पानी में लारवा पैदा नहीं होने देती है, इसलिए डेंगू फैलने का खतरा कम हो जाता है। पंचकूला की सीएमओ डॉ. मुक्ता कुमार ने कहा कि इसके पालन करने से डेंगू का खतरा कम हुआ है।
उन्होंने सोलन के सीएमओ डॉ. राजन उप्पल को क्रॉस बार्डर मीटिंग में चर्चा के दौरान कहा कि इस मछली का पालन दफ्तरों में किया जाए, जिससे कि डेंगू का खतरा कम हो जाए। इस पर डॉ. राजन उप्पल ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस मछली को सरकारी दफ्तरों के साथ प्राइवेट ऑफिस और दुकानदारों को पालने के लिए कहेंगे, जिससे कि डेंगू का खतरा कम हो जाए। डेंगू को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा के पंचकूला और हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बीच सीएमओ ने क्रॉस बार्डर मीटिंग सोमवार को सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में की। इसमें सोलन से आई टीम ने पंचकूला सिविल अस्पताल के दिए सुझाव को माना है।
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डेंगू को नियंत्रित करने के लिए उठाए उचित कदम
पंचकूला की सीएमओ मुक्ता कुमार ने कहा कि डेंगू को नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचकूला में पिछले साल कालका में सबसे अधिक डेंगू के मामले सामने आए थे। अधिक मामले आने के बाद इस बार शुरू से ही 50 टीमों को लगाकर डोर टू डोर सर्वे कराया गया। इस दौरान पानी में लारवा की चेकिंग के दौरान टीमों के जाने की लाइव लोकेशन फोन से चेक की गई। लारवा की जांच करवाने के लिए ब्रीडर चेकर का इस्तेमाल किया गया। इस पर सोलन से आई टीम ने इस बात को मानने के लिए हामी भरदी। उन्होंने कहा कि डेंगू की जांच के लिए ब्रीडर चेकर का इस्तेमाल करेंगे। इसके लिए वह हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को लेटर लिखेंगे।
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हॉट स्पाट का हो डोर टू डोर सर्वे
सोलन से आई टीम को हाट स्पॉट बनी जगह का डोर टू डोर सर्वे करने के लिए कहा गया। बद्दी इस समय हॉट स्पॉट बन गया है। डेंगू के यहां 291 केस सामने आ चुके हैं। पंचकूला जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुरेश भोसले ने कहा कि कई टीमें लगाकर डोर टू डोर सर्वे कराएं। इसके साथ ही जिन जगहों पर डेंगू के केस आएं हैं, वहां पर फॉगिंग की जाए। अगर दोबारा वायलेशन मिलती है तो चालान काटे जाएं। इसमें टीम चेकिंग के दौरान लारवा मिलने पर बर्तनों को भी खाली कराए। इसमें विभाग की अन्य टीमें भी भाग लें। इससे भी डेंगू को रोकने में मदद मिलेगी।
समय पर साझा करें जानकारी
सोलन के सीएमओ डॉ. राजन उप्पल ने कहा कि डेंगू के केस अगर पंचकूला या सोलन जिले में आते हैं, तो उन्हें सही डाटा दिया जाए। इससे समय पर लोगों के घरों में फॉगिंग होने के साथ सभी के टेस्ट किए जा सकेंगे। पंचकूला जिले के लोग परवाणू, बद्दी में काम करते हैं। अगर इस दौरान डेंगू की बीमारी होती है या इससे कोई मौत होती है तो उसका डाटा भी एक दूसरे को आसानी से मिलना चाहिए। इस पर दोनों जिलों की टीमों ने सहमति जताई।
क्रॉस बार्डर मीटिंग में पंचकूला और सोलन जिले की टीमों ने अपने विचार रखे। डेंगू की रोकथाम के लिए सहमति बनी है। डेंगू को रेाकने के लिए काम किया जाएगा। -डॉ. मुक्ता कुमार, सीएमओ, पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर-6