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राहतः चंडीगढ़ में छह सालों में पहली बार डेंगू के मामले सबसे कम... पर सतर्क रहने की जरूरत
Mon, 05 Oct 2020 12:14 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2020 12:14 PM IST
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कोरोना महामारी के बीच मच्छरों से होने वाली बीमारियों से इस बार राहत मिली है। पिछले छह सालों वर्षों में इस बार डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के सबसे कम केस दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इस वर्ष अगस्त महीने तक डेंगू के सिर्फ 13 और मलेरिया के सिर्फ छह केस रिकार्ड किए गए हैं जबकि पिछले साल सीजन में डेंगू के करीब 286 केस आ चुके थे।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि कोरोना महामारी के दौरान भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लगातार डेंगू और मलेरिया के लिए जिम्मेदार ब्रीडिंग क्षेत्रों पर नजर बनाकर रखी हुई थी। लोगों में भी अब जागरूकता आई है। इसके अलावा कुछ दूसरे कारण भी हैं, जो डेंगू, मलेरिया को रोकने में सहायक बने हैं।
डेंगू मलेरिया व चिकनगुनिया का सीजन अगस्त से अक्तूबर के आखिरी सप्ताह तक रहता है। पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के पूर्व विभागाध्यक्ष राजेश कुमार का कहना है कि डेंगू के लिए सिर्फ एक फैक्टर जिम्मेदार नहीं होता। इसके फैलने व गिरावट में कई सारे फैक्टर काम करते हैं। साथ ही लगातार होने से लोगों में इसके प्रति इम्युनिटी विकसित होती है। यह भी देखा गया है कि अक्तूबर में केस बढ़ते हैं क्योंकि इस मौसम में दिन व रात के तापमान में काफी अंतर होता है।
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केसों की रिपोर्टिंग कितनी हो रही है, यह भी देखना होगा। अभी तो अक्तूबर की शुरुआत हुई है। डेंगू के केस अक्तूबर के आखिर तक आते हैं। ऐसे में इसका सटीक आकलन अक्तूबर के बाद भी हो सकेगा। इस क्षेत्र में मलेरिया काफी कम रहा है। आने वाले सालों में मलेरिया भी खत्म भी हो जाएगा। चिकनगुनिया को भी दोबारा आने में समय लगता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि एक सीजन में चिकनगुनिया होने के दस सालों तक नहीं आता है।
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स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि कोरोना महामारी के दौरान भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लगातार डेंगू और मलेरिया के लिए जिम्मेदार ब्रीडिंग क्षेत्रों पर नजर बनाकर रखी हुई थी। लोगों में भी अब जागरूकता आई है। इसके अलावा कुछ दूसरे कारण भी हैं, जो डेंगू, मलेरिया को रोकने में सहायक बने हैं।
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डेंगू मलेरिया व चिकनगुनिया का सीजन अगस्त से अक्तूबर के आखिरी सप्ताह तक रहता है। पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के पूर्व विभागाध्यक्ष राजेश कुमार का कहना है कि डेंगू के लिए सिर्फ एक फैक्टर जिम्मेदार नहीं होता। इसके फैलने व गिरावट में कई सारे फैक्टर काम करते हैं। साथ ही लगातार होने से लोगों में इसके प्रति इम्युनिटी विकसित होती है। यह भी देखा गया है कि अक्तूबर में केस बढ़ते हैं क्योंकि इस मौसम में दिन व रात के तापमान में काफी अंतर होता है।
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केसों की रिपोर्टिंग कितनी हो रही है, यह भी देखना होगा। अभी तो अक्तूबर की शुरुआत हुई है। डेंगू के केस अक्तूबर के आखिर तक आते हैं। ऐसे में इसका सटीक आकलन अक्तूबर के बाद भी हो सकेगा। इस क्षेत्र में मलेरिया काफी कम रहा है। आने वाले सालों में मलेरिया भी खत्म भी हो जाएगा। चिकनगुनिया को भी दोबारा आने में समय लगता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि एक सीजन में चिकनगुनिया होने के दस सालों तक नहीं आता है।
सितंबर की कम बारिश भी एक वजह है
इस बार सितंबर में बहुत कम बारिश हुई है। 44 सालों में सबसे कम बारिश रिकार्ड हुई है। बारिश कम होने से छतों, स्कूलों व अन्य जगहों पर पानी जमा नहीं हो सका। रुक-रुककर बारिश होने से पानी के जमा होने की ज्यादा संभावना रहती है। अगस्त में भी बारिश कम देखने को मिली है। सिर्फ तीन दिन तेज बारिश हुई। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस बार कालेजों के हास्टल बंद रहे हैं। यहां पर भी ब्रीडिंग की संभावना प्रबल रहती है।
अक्तूबर में सतर्क रहने की आवश्यकता
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि डेंगू के केस कम आएं तो लोगों को यह नहीं समझना चाहिए कि डेंगू कमजोर पड़ गया है। डेंगू का सीजन अक्तूबर के आखिर तक रहता है। ऐसे में लोगों को फुल बाजू की शर्ट पहननी चाहिए। कूलर चला रहे हैं तो हफ्ते में एक बार उसे रगड़कर साफ करें। एक बार सूखने के बाद ही उसका इस्तेमाल करें। कहीं पर भी पानी जमा न होने दें। गमलों और फ्रिज के ट्रे को भी चेक जरूर करें। इसके अलावा यदि बुखार हो तो जरूर जांच करवाएं।
किस साल कितने डेंगू के केस
साल केस
2015 966
2016 1246
2017 1125
2018 301
2019 286
2020 13
(नोट : 2020 के आंकड़े अगस्त माह तक हैं)
डेंगू से अभी सतर्क रहने की आवश्यकता है। अक्तूबर में संक्रमित होने का खतरा ज्यादा रहता है। इस समय दिन में गर्मी है और रात में ठंड। कहीं भी पानी जमा रह गया तो वहां मच्छर पनप सकते हैं। डेंगू को रोकने के लिए डिपार्टमेंट के साथ लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
- डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक, स्वास्थ्य विभाग चंडीगढ़
अक्तूबर में सतर्क रहने की आवश्यकता
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि डेंगू के केस कम आएं तो लोगों को यह नहीं समझना चाहिए कि डेंगू कमजोर पड़ गया है। डेंगू का सीजन अक्तूबर के आखिर तक रहता है। ऐसे में लोगों को फुल बाजू की शर्ट पहननी चाहिए। कूलर चला रहे हैं तो हफ्ते में एक बार उसे रगड़कर साफ करें। एक बार सूखने के बाद ही उसका इस्तेमाल करें। कहीं पर भी पानी जमा न होने दें। गमलों और फ्रिज के ट्रे को भी चेक जरूर करें। इसके अलावा यदि बुखार हो तो जरूर जांच करवाएं।
किस साल कितने डेंगू के केस
साल केस
2015 966
2016 1246
2017 1125
2018 301
2019 286
2020 13
(नोट : 2020 के आंकड़े अगस्त माह तक हैं)
डेंगू से अभी सतर्क रहने की आवश्यकता है। अक्तूबर में संक्रमित होने का खतरा ज्यादा रहता है। इस समय दिन में गर्मी है और रात में ठंड। कहीं भी पानी जमा रह गया तो वहां मच्छर पनप सकते हैं। डेंगू को रोकने के लिए डिपार्टमेंट के साथ लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
- डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक, स्वास्थ्य विभाग चंडीगढ़