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शैक्षणिक योग्यता की झूठी जानकारी मामले में जल्द सुनवाई की मांग
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चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व मंत्री राव नरबीर द्वारा शैक्षणिक योग्यता की झूठी जानकारी देने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर अर्जी दाखिल कर जल्द सुनवाई की मांग की गई है। अर्जी में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें माननीयों के खिलाफ लंबित मामलों का 6 माह में निपटारा करने का आदेश जारी किया गया था।
आरटीआई कार्यकर्ता हरिंदर ढीगरा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि उन्होंने 2017 में मंत्री राव नरबीर की शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मांगी थी। उन्हें सूचना नहीं मिली और प्रथम अपील दाखिल करनी पड़ी। 1 दिसंबर 2018 को उन्हें राव नरबीर के शपथ पत्रों और शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया है कि राव नरबीर ने झूठे शैक्षणिक पत्र दाखिल किए है।
ढींगरा ने बताया कि राव नरबीर ने 2005, 2009 और 2014 में चुनाव लड़े और शपथ पत्र दाखिल किए। उन्होंने 2005 में शपथपत्र में बताया कि उन्होंने दसवीं 1976 में उत्तर प्रदेश से की है। 2009 के चुनाव में शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि उन्होंने दसवीं बिरला विद्या मंदिर, नैनीताल से की है। उन्होंने 1986 में हिंदी साहित्य में हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से ग्रेजुएशन करने की बात कही है। आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि हिंदी साहित्य सम्मेलन को विश्वविद्यालय या बोर्ड की मान्यता नहीं है और ऐसे में इससे डिग्री लेकर सरकारी नौकरी पर लगे लोगों को हटाया जाए। इससे पहले याचिकाकर्ता ने गुरुग्राम कोर्ट में भी यह याचिका दायर की थी लेकिन गुरुग्राम कोर्ट ने उसकी यह याचिका खारिज कर दी थी। याचिका पर आखिरी बार 2019 में सुनवाई हुई थी और कोरोना के चलते बार-बार सुनवाई टल रही थी। ऐसे में अब अर्जी दाखिल करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की गई है।
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आरटीआई कार्यकर्ता हरिंदर ढीगरा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि उन्होंने 2017 में मंत्री राव नरबीर की शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मांगी थी। उन्हें सूचना नहीं मिली और प्रथम अपील दाखिल करनी पड़ी। 1 दिसंबर 2018 को उन्हें राव नरबीर के शपथ पत्रों और शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया है कि राव नरबीर ने झूठे शैक्षणिक पत्र दाखिल किए है।
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ढींगरा ने बताया कि राव नरबीर ने 2005, 2009 और 2014 में चुनाव लड़े और शपथ पत्र दाखिल किए। उन्होंने 2005 में शपथपत्र में बताया कि उन्होंने दसवीं 1976 में उत्तर प्रदेश से की है। 2009 के चुनाव में शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि उन्होंने दसवीं बिरला विद्या मंदिर, नैनीताल से की है। उन्होंने 1986 में हिंदी साहित्य में हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से ग्रेजुएशन करने की बात कही है। आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि हिंदी साहित्य सम्मेलन को विश्वविद्यालय या बोर्ड की मान्यता नहीं है और ऐसे में इससे डिग्री लेकर सरकारी नौकरी पर लगे लोगों को हटाया जाए। इससे पहले याचिकाकर्ता ने गुरुग्राम कोर्ट में भी यह याचिका दायर की थी लेकिन गुरुग्राम कोर्ट ने उसकी यह याचिका खारिज कर दी थी। याचिका पर आखिरी बार 2019 में सुनवाई हुई थी और कोरोना के चलते बार-बार सुनवाई टल रही थी। ऐसे में अब अर्जी दाखिल करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की गई है।
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