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पंचकूला में गबनः 50 रुपये की जगह मर्जी से खर्च दिए 45 लाख

Thu, 11 Aug 2016 09:36 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो, अमर उजाला, पंचकूला Updated Thu, 11 Aug 2016 09:36 AM IST
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छात्रवृत्ति घोटाला
हरियाणा फार्मेसी काउंसिल ने पंचकूला के पुलिस उपायुक्त काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार एसएम नेहरा के खिलाफ लाखों रुपयों का दुरुपयोग करने पर एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश कर दी है। काउंसिल के प्रधान केसी गोयल ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 22 जुलाई 2007 को पूर्व रजिस्ट्रार के खिलाफ जांच करने के लिए राज्य चौकसी ब्यूरो को निर्देश दिए थे। विजिलेंस ने 2007 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के बाद पूर्व रजिस्ट्रार एसएम नेहरा के खिलाफ जांच शुरू की थी। जिसकी रिपोर्ट 2012 में विजिलेंस ब्यूरो ने सौंपी थी। इसमें सामने आया था कि पूर्व रजिस्ट्रार ने 1992 से 2007 तक काउंसिल का रजिस्ट्रार रहते लाखों रुपये का गबन किया है। साथ ही काउंसिल के नियम 131, 132, 134, 139, 141 की जमकर अवहेलना की।
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काउंसिल का कोई भी रजिस्ट्रार नियम 131 के तहत 100 रुपये से अधिक नहीं रख सकता, लेकिन विजिलेंस रिपोर्ट में सामने आया कि पूर्व रजिस्टार एसएम नेहरा ने 16 लाख से अधिक कैश अपने पास रखा। रूल नंबर 139 के तहत रजिस्ट्रार केवल 50 रुपये ही अपनी मर्जी से खर्च कर सकता है, लेकिन पूर्व रजिस्ट्रार ने 45 लाख रुपये से अधिक रुपये मर्जी से खर्च कर दिया। जबकि काउंसिल की आमदनी केवल 16 लाख रुपये दिखाई थी। सेक्शन 26 के तहत काउंसिल का स्टाफ केवल काउंसिल ही नियुक्त कर सकती है, लेकिन पूर्व रजिस्ट्रार एसएम नेहरा ने अपने विश्वासपात्र नौकरी पर रखे और संभावना है कि उन्हें कम वेतन देकर अधिक रुपये वसूलता रहा।
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विजिलेंस जांच में सामने आया कि पूर्व रजिस्ट्रार ने काउंसिल को घाटे में डालने का काम किया। हरियाणा सरकार ने पूर्व रजिस्टार को 2003 से 2005 में एक लाख 38 हजार रुपये रिकवरी के लिए नोटिस दिया। जिसकी आज तक रिकवरी नहीं की गई। 2007 में हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूर्व रजिस्ट्रार एसएम नेहरा ने काउंसिल का चार्ज सौंपने से इंकार कर दिया था, लेकिन हरियाणा सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी बना दी थी। जिसमें स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक (प्रशासनिक) को काउंसिल का कार्यभार दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिन्होंने काउंसिल का ताला खुलवाया तो अलमारी से 7 लाख 7 हजार 158 रुपये रिकवर हुए थे। जो उसी समय काउंसिल के खाते में जमा करा दिए गए थे।
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विजिलेंस ने 5 जनवरी को 2012 को सरकार से उचित कानूनी कार्रवाई को लिखा था। लेकिन हरियाणा सरकार ने फार्मेसी काउंसिल को ही कार्रवाई करवाने के लिए अधिकृत कर दिया है। कानूनी राय के बाद बुधवार को फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन केसी गोयल ने डीसीपी पंचकूला को नेहरा के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की सिफारिश कर दी है।
 
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