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बच्चा बदलने का आरोप लगाकर परिजनों ने काटा बवाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2016 01:14 AM IST
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परिजन हंगामा करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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सेक्टर-5 एमडीसी के एक निजी अस्पताल प्रबंधन पर एक दंपति ने बच्चा बदलने का आरोप लगाते कर जमकर हंगामा किया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पीड़ित रूप किशोर ने बताया कि उसने पत्नी मुन्नी को दर्द के चलते पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती करवाया था। वहां दो दिन तक इलाज चलने के बाद भी आराम नहीं मिला। अस्पताल के एक कर्मचारी ने निजी अस्पताल के बारे में बताया और कहा कि वहां इलाज ठीक होगा और खर्च भी कम आएगा। उसने कर्मचारी की बात मान ली।
पीजीआई के कर्मचारी ने निजी अस्पताल की एंबुलेंस मंगवा दी। एंबुलेंस पत्नी को निजी अस्पताल ले आई। जहां पत्नी की हालत देख डाक्टरों ने ऑपरेशन कर डिलीवरी करने की बात कही। रूप किशोर का कहना है कि डिलीवरी के दौरान पत्नी कते जुड़वां बच्चे हुए थे।
अस्पताल प्रबंधन ने उसे दोनों बच्चे दिखाए थे और दोनों स्वस्थ थे। प्रबंधन ने इसके कुछ देर बाद करीब डेढ़ लाख रुपये जमा करवाने के लिए कहा। आरोप है कि जब वह रुपयों का इंतजाम करके लौटे तो अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि एक बच्चे की मौत हो गई है और दूसरे की हालत नाजुक है।
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रूप किशोर का आरोप लगाया कि उनके बच्चे की मौत नहीं हुई, बल्कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा बच्चा बदला गया है। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल का घेराव कर कर हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल प्रबंधन ने बवाल की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर लोगों को शांत किया।
गंभीर हालत में महिला को किया था रेफर
निजी अस्पताल के सेंटर प्रमुख और प्रवक्ता ने का कहना है कि यह हाई रिस्क प्रेगनेंसी की गंभीर हालत में मरीज को पीजीआई से 7 मई को रेफर किया गया था, क्योंकि उसका गर्भ पांचवें महीने में पहुंच गया था। यहां दाखिल कराने के तत्काल बाद ही मरीज और परिजनों को इस मामले से जुड़ी हाई रिस्क स्थितियों के बारे में जानकारी दी गई थी।
महिला ने समय से पहले और बहुत कम वजन वाले जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था, जिनका वजन 650 ग्राम और 460 ग्राम था। इन बच्चों को तत्काल नियोनैटल इंटेंसिव केयर यूनिट में भेजा गया और उन्हें वेंटिलेटर स्पोर्ट पर रखा गया। दोनों बच्चों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। बच्चे के परिजन डॉक्टरों के इस प्रयास और देखभाल से काफी खुश थे। प्रयासों के बावजूद 10 मई की शाम को एक बच्चे की स्थिति बिगड़ने लगी और बुधवार सुबह उसने दम तोड़ दिया।
मरीज के कुछ रिश्तेदार उन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, जो बेबुनियाद है। वहीं, पुलिस जांच अधिकारी आत्मा राम ने बताया कि बच्चे की मौत की सूचना मिली थी, जिसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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पीजीआई के कर्मचारी ने निजी अस्पताल की एंबुलेंस मंगवा दी। एंबुलेंस पत्नी को निजी अस्पताल ले आई। जहां पत्नी की हालत देख डाक्टरों ने ऑपरेशन कर डिलीवरी करने की बात कही। रूप किशोर का कहना है कि डिलीवरी के दौरान पत्नी कते जुड़वां बच्चे हुए थे।
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अस्पताल प्रबंधन ने उसे दोनों बच्चे दिखाए थे और दोनों स्वस्थ थे। प्रबंधन ने इसके कुछ देर बाद करीब डेढ़ लाख रुपये जमा करवाने के लिए कहा। आरोप है कि जब वह रुपयों का इंतजाम करके लौटे तो अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि एक बच्चे की मौत हो गई है और दूसरे की हालत नाजुक है।
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रूप किशोर का आरोप लगाया कि उनके बच्चे की मौत नहीं हुई, बल्कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा बच्चा बदला गया है। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल का घेराव कर कर हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल प्रबंधन ने बवाल की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर लोगों को शांत किया।
गंभीर हालत में महिला को किया था रेफर
निजी अस्पताल के सेंटर प्रमुख और प्रवक्ता ने का कहना है कि यह हाई रिस्क प्रेगनेंसी की गंभीर हालत में मरीज को पीजीआई से 7 मई को रेफर किया गया था, क्योंकि उसका गर्भ पांचवें महीने में पहुंच गया था। यहां दाखिल कराने के तत्काल बाद ही मरीज और परिजनों को इस मामले से जुड़ी हाई रिस्क स्थितियों के बारे में जानकारी दी गई थी।
महिला ने समय से पहले और बहुत कम वजन वाले जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था, जिनका वजन 650 ग्राम और 460 ग्राम था। इन बच्चों को तत्काल नियोनैटल इंटेंसिव केयर यूनिट में भेजा गया और उन्हें वेंटिलेटर स्पोर्ट पर रखा गया। दोनों बच्चों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। बच्चे के परिजन डॉक्टरों के इस प्रयास और देखभाल से काफी खुश थे। प्रयासों के बावजूद 10 मई की शाम को एक बच्चे की स्थिति बिगड़ने लगी और बुधवार सुबह उसने दम तोड़ दिया।
मरीज के कुछ रिश्तेदार उन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, जो बेबुनियाद है। वहीं, पुलिस जांच अधिकारी आत्मा राम ने बताया कि बच्चे की मौत की सूचना मिली थी, जिसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।