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नगर काउंसिल में फैले भ्रष्टाचार की और भी हैं कई पर्तें, मामला प्राप्रर्टी टैक्स के लिए 55 हजार, रटसीद दी 11 हजार 400 की

Panchkula bureau Updated Sun, 16 Sep 2018 10:20 PM IST
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गहरी हैं नगर काउंसिल में भ्रष्टाचार की जड़ें
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और भी हैं कई पर्तें, जांच में सामने आ सकता है करोड़ों का है प्रापर्टी टैक्स घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला। नगर काउंसिल के दो अधिकारियों की ओर से बरनाला के समाज सेवी दीवान चंद का प्रापर्टी टैक्स एक लाख 70 हजार रुपये से कम करके 55 हजार रुपये करने फिर रसीद सिर्फ 11 हजार 400 रुपये देने का उजागर होने के बाद काउंसिल में फैले भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं। नगर काउंसिल के ठेकेदार, जो 20 वर्षों से नगर काउंसिल के जुडे़ हैं, उनका कहना है कि नगर काउंसिल में प्रापर्टी टैक्स का घोटाला करोड़ों का है। अगर कोई निष्पक्ष एजेंसी जांच करे तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। यहां हर छोटे से लेकर बड़ा काम दो बड़े अधिकारियों की सहमति से ही होता। इसके अलावा नगर काउंसिल के अधिकारी कई वर्षों से तमाम सरकारी कार्यों जैसे, सड़कों व बिल्डिंग के ठेके वर्षों से दो ही ठेकेदारों दिए जाते हैं। जिनसे इन अधिकारियों का पक्का कमीशन बांधा है। नगर काउंसिल के एक ठेकेदार हितअभिलाषी ने बताया कि अगर नगर काउंसिल सही तरीके से प्रापर्टी टैक्स एकत्रित करना शुरू कर दे तो सरकारी ग्रांट की तो विकास कार्यों के लिए जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रापर्टी टैक्स से ही बरनाला का रिकार्ड तोड़ विकास हो सकता है। अफसोस है कि प्रापर्टी टैक्स वसूली में भारी घोटाला हो रहा है।

बड़ी फर्मों से नाम मात्र का टैक्स लिया जता है
ठेकेदार हितअभिलाषी ने बताया कि शहर की रसूखदार बड़ी फर्मों, बडे़ बडे़ डाक्टरों, क्लीनिक, बडे़ फैक्टरी मालिकों और उद्योगपतियों से नाम मात्र का प्रापर्टी टैक्स वसूला जाता है। नगर काउंसिल के अधिकारियों की हिम्मत नहीं कि इनसे पूरा टैक्स ले सकें, क्योंकि वह इनको सीधे तौर पर रिश्वत भेजते हैं। यही नहीं कई अन्य कार्यों में नियमों को तक पर रख मदद करते हैं। उनकी पहुंच से भी नगर काउंसिल के अधिकारी डरते हैं। इस तरह नगर काउंसिल के अधिकारी सिर्फ प्रापर्टी टैक्स में ही सरकार से करोड़ों का घोटाला कर रहे हैं। शहर में प्रापर्टी टैक्स की असेसमेंट कराई जाए तो कई खुलासे हो सकते हैं। जिसके लिए नगर काउंसिल के उच्च अधिकारी सीधे तौर पर जिमेदार हैं।

टैक्स लगभग चार लाख, जमा हुए सिर्फ 26 हजार
इसके अलावा बरनाला निवासी दीवान चंद ने प्रापर्टी टैक्स घोटाले में एक केस का उदाहरण देते हुए कहा कि एक फर्म को तीन लाख 85 हजार रुपये प्रापर्टी टैक्स भेजा गया, लेकिन नगर काउंसिल के अधिकारियों ने उस फर्म से दो लाख रुपये ही लिए। जिसमें से 26 हजार रुपये नगर काउंसिल के टैक्स में भरे और बाकी रुपये बांट लिए। ऐसे सैकड़ों केस हैं।

शिकायतकर्ता ने कभी शिकायत नहीं दी
इस संबंध में नगर काउंसिल के ईओ परविंदर सिंह भट्टी व प्रधान संजीव कुमार शोरी ने कहा कि शिकायतकर्ता दीवान चंद ने कभी उन तक पहुंच नहीं की। उनको तो अखबारों से खबर पढ़कर ही पता चला है। जहां तक बड़ी फर्मों से नाममात्र टैक्स लेने की बात है, यह सब वह गलत हैं। इन बातों में कोई दम नहीं है। सभी को उनकी प्रापर्टी की कीमत के मुताबिक स्क्वेयर फुट के हिसाब से प्रापर्टी टैक्स बनाकर भेजा जाता है। जबकि व्यापार महासंघ से पंजाब प्रधान ललित गर्ग ने लोकल बाडी मंत्री नवजोत सिद्धू व राज्य सरकार से घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।

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