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अपराध : मातृ वंदना योजना की आईडी हैक कर 21.95 लाख रुपये हड़पे, फर्जी गर्भवती महिलाओं के 439 एकाउंट बनाकर खातों में ठगों ने डाले पांच-पांच हजार रुपये

Sun, 03 Oct 2021 01:39 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 03 Oct 2021 01:39 AM IST
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Crime: Rs 21.95 lakh was stolen by hacking the ID of Matri Vandana Yojana, by creating 439 accounts of fake pregnant women, thugs put five thousand rupees in the accounts
पिंजौर। ठगों ने आईडी हैक कर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के खाते से 21.95 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। धोखाधड़ी की जानकारी मिलते ही महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी पिंजौर ने शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत दर्ज जांच शुरू कर दी है। ठगों ने अलग-अलग आंगनबाड़ी केंद्रों के 439 फेक एकाउंट बनाकर पांच-पांच हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की है। गर्भवती महिलाओं के फर्जी मामले बनाकर फार्म-3 सात दिन के अंदर रात 12.30 से सुबह चार बजे तक अपलोड किए गए।
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महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी पिंजौर आरू वशिष्ठ ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत डाटा एंट्री ऑपरेटर एवं महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी को ईमेल आईडी प्रदान की गई है। इसके तहत गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का ऑनलाइन पोर्टल पर फार्म भरा जाता है। इसके बाद महिलाओं को तीन किस्तों में 1000, 2000, 2000 करके कुल पांच हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। ऑनलाइन फार्म भरने के उपरांत फार्म को चेक कर महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी द्वारा मंजूर किया जाता है। इसके बाद पीएफएमएस के माध्यम से राशि गर्भवती महिलाओं के खाते में भेज दी जाती है। उपरोक्त दोनों आईडी हैैक कर पोर्टल पर गर्भवती महिलाओं के फेक केस फीड कर उनके खातों में राशि डाल दी गई।
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अधिकारी ने बताया कि उपरोक्त फेक केस की स्टेटस की जानकारी ली गई तो पता चला कि अलग-अलग आंगनबाड़ी केंद्र से 439 फेक केस महीने के 20 से 30 तारीख के बीच भरे गए हैं। उपरोक्त केस संबधित केंद्रों के नहीं हैं और न ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा भरे गए हैं। उस दौरान डाटा एंट्री ऑपरेटर छुट्टी पर थी। इसके अलावा इन केसों को वेरिफाई भी नहीं किया गया है, न ही अधिकारी लेवल पर उनको मंजूर किया गया है। अधिकारी ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद इसकी शिकायत आला अधिकारियों को भी दी गई बावजूद इन केसों की पेमेंट हो गई। इसके अलावा इस स्कीम के तहत लाभार्थी को लाभ तीन किस्तों में दिया जाता है। परंतु इन केसों में तीन किस्तों का लाभ एक साथ दिया गया है। ब्लॉक स्तर पर जो केस भरे जाते हैं उनमें कुछ ऑनलाइन कमी होने के कारण वापस करेक्शन के लिए आ जाते हैं लेकिन इस मामले में एक भी केस करेक्शन के लिए नहीं आया। इन तथ्यों से साफ जाहिर है कि विभाग की आईडी शातिर ठगों द्वारा हैक कर वारदात को अंजाम दिया गया है। पिंजौर थाना प्रभारी रामपाल का कहना है कि पुलिस ने शिकायत के आधार आईपीसी की धारा 420, 468, 471 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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