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नगर निगम ने तैयार किया 1349 करोड़ का अनुमानित बजट

Thu, 23 Jan 2020 02:00 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2020 02:00 AM IST
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corporation made a budget of 1349 crores, only 302 crores is to be met
चंडीगढ़। नगर निगम इस वर्ष भी केंद्र सरकार के भरोसे है। निगम ने वर्ष 2020-21 के लिए 1349 करोड़ का बजट तो तैयार कर लिया है, लेकिन इसमें से महज 302 करोड़ की ग्रांट ही प्रशासन की ओर से मिलनी है। ऐसे में 1073 करोड़ के फंड के लिए निगम को केंद्र से उम्मीद है। यदि यह बजट नहीं मिला तो बीते वर्ष की तरह इस साल फिर नगर निगम को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ेगी। निगम ने वर्ष 2020-21 के बजट में 436 कैपिटल हेड और 912 करोड़ रेवेन्यू हेड रखा है। बजट में इस बार 303 करोड़ के रेवेन्यू का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 150 करोड़ रुपये पानी के बिलों से निकालने का लक्ष्य है।
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नगर निगम में बुधवार को कमिश्नर केके यादव की अध्यक्षता में वर्ष 2020-21 के वित्तीय बजट को लेकर बैठक आयोजित हुई। बैठक में साल भर में होने वाले खर्चों और रेवेन्यू के बारे में चर्चा हुई। पिछले साल निगम ने चौथे फाइनेंस की रिपोर्ट के भरोसे 1024 करोड़ का बजट तैयार किया था जबकि निगम को प्रशासन से मात्र 276 करोड़ की ग्रांट मिली थी। उसके बाद किसी तरह 375 करोड़ का पूरा फंड मिल सका था। इसके बाद स्थिति यह हो गई कि निगम के पास सड़क बनाने तक के पैसे नहीं थे। इस पर पार्षदों ने प्रशासक के पास जाकर मदद मांगी तब जाकर किसी तरह थोड़ा फंड मिला। केंद्र की नजर नहीं पड़ी तो निगम की वही हालत फिर से होगी। निगम को उम्मीद है कि चौथे फाइनेंस की रिपोर्ट के हिसाब से 1073 करोड़ रुपये मिलेंगे।
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गांवों के विकास पर निगम खर्च करेगा 27 करोड़
हाल ही में निगम में 9 गांव शामिल हुए हैं। नगर निगम ने गांव के विकास कार्यों के लिए भी खाका तैयार किया है। निगम में शामिल होने के बाद गांव में फिलहाल कोई भी सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं। वहीं सरपंचों के हटने के बाद ग्रामीणों को अपने काम के लिए भटकना पड़ रहा है। हालांकि निगम ने गांव की समस्याओं के लिए कमेटी गठित की है। इनका चेयरमैन मनोनीत पार्षदों को बनाया गया है। निगम ने गांवों में विकास कार्य के लिए 27 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है। कमेटी के सुझावों के बाद इन गांवों में विकास कार्य कराए जाएंगे। इसमें 18 करोड़ से पब्लिक हेल्थ के काम जबकि 9 करोड़ रुपये से बीएंडआर के काम कराए जाएंगे। वहीं 23.50 करोड़ रुपये से कालोनियों में विकास कार्य की योजना है।
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ई-ऑफिस के लिए 10 करोड़ का बजट
निगम अपने खर्चों में कटौती करना चाह रहा है। सदन की बैठक में भी कमिश्नर ने कहा था कि फिलहाल री-स्ट्रक्चरिंग की जरूरत है ताकि पता चले कि कौन सा कर्मचारी कहां काम कर रहा है। निगम ने ई-ऑफिस के लिए 10 करोड़ का बजट तैयार किया है। इससे कई काम मैनुअल ल होकर ऑनलाइन हो जाएंगे। इससे कर्मचारियों के कामकाज की जानकारी हो सकेगी। वहीं आउटसोर्स के कर्मचारियों को भी निगम कम कर सकेगा।
अब फील्ड ऑफिसर को मिलेंगी गाड़ियां
निगम ने हाल ही में वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया है। वहीं स्वच्छता अभियान में अव्वल आने के लिए भी पूरा प्रयास कर रहा है, लेकिन गाड़ी न होने के कारण इंफोर्समेंट विंग के सब इंस्पेक्टर और एमओएच के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर अभी क्षेत्र में ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं इसलिए इंफोर्समेंट विंग के 12 सब इंस्पेक्टर और एमओएच के आठ सीएसआई को गाड़ी देने की तैयारी है। गाड़ी में लाउड स्पीकर, माइक सहित अन्य सुविधाएं भी होंगी ताकि आसानी से लोगों तक सूचना पहुंचाई जा सके। इन गाड़ियों की लगभग 38 करोड़ का एस्टीमेट बनेगा।
100 करोड़ से सड़कों की हालत सुधारने का लक्ष्य
शहर की सड़कों की हालत किसी से छिपी नहीं है। जर्जर सड़कों से गुजरना जैसे लोगों के लिए दुश्वार हो गया है। निगम जल्द ही इनकी मरम्मत की बात कह रहा है। निगम ने इस साल सड़क के निर्माण कार्य व मरम्मत के लिए 100 करोड़ का बजट तैयार किया है। इसमें 55 करोड़ से खस्ताहाल सड़कों के निर्माण कार्य का एस्टीमेट तैयार किया है। निगम ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर से अनुबंध किया है। सेंटर की रिपोर्ट के आधार पर निगम शहर की सड़कों को बेहतर बनाने का दावा कर रहा है।
स्वच्छता अभियान बेहतर रैंकिंग के लिए बदलेंगे शौचालयों की दशा
चंडीगढ़ लगातार स्वच्छता अभियान में पिछड़ रहा है। इस बार निगम ने ओडीएफ प्लस प्लस के लिए भी आवेदन किया था, लेकिन बड़ी बात यह है कि शहर में सार्वजनिक शौचालयों की हालत ठीक नहीं है जबकि ओडीएफ प्लस प्लस में इस बात का सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाता है। वहीं दिव्यांगों के लिए भी अलग शौचालय है। फंड न होने के कारण निगम शौचालयों की सूरत भी नहीं बदल पा रहा था। निगम ने इस बार शौचालयों की दशा सुधारने के लिए 6 करोड़ रुपये का बजट रखा है।
रेवेन्यू में इजाफे के लिए बढ़ाएंगे टीटी वाटर की क्षमता
अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए निगम इस बार सबसे ज्यादा पानी सप्लाई पर निर्भर है। हालांकि अगस्त माह में आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि निगम को हर साल 82 करोड़ का घाटा पानी सप्लाई में हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 में नगर निगम ने पानी पर 160.63 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि पानी से नगर निगम को मात्र 78.74 करोड़ रुपये का ही रेवेन्यू मिला। अब निगम ने टर्सरी ट्रीटेड वाटर की क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है। निगम ने 10.50 करोड़ की लागत से पाइप लाइनों की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
प्रॉपर्टी टैक्स से 48 करोड़ का रेवेन्यू लाने का लक्ष्य
नगर निगम ने इस बार प्रॉपर्टी टैक्स से 48 करोड़ रुपये का रेवेन्यू लाने का लक्ष्य रखा है। इसमें 13 करोड़ रेजिडेंशियल और 35 करोड़ रुपये कामर्शियल प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने की तैयारी है। कुछ दिन पहले ही निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स में इजाफा किया है। ऐसे में निगम को इस विभाग से सबसे ज्यादा रेवेन्यू आने की उम्मीद है।

कचरा उठाने के लिए खरीदेंगे 350 गाड़ियां
शहर में घर-घर से कचरा उठाने के लिए निगम का 350 गाड़ियां खरीदने का भी प्रस्ताव है। हालांकि इसे स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी खरीदने पर विचार है। चूंकि गारबेज कलेक्टरों से समझौते के अनुसार निगम को ही गाड़ियां खरीदना है। स्वच्छता अभियान में बेहतर रैंकिंग के लिए यह कदम भी महत्वपूर्ण है। वहीं सेक्टर 39 स्थित वाटर वर्क्स पर भी निगम 36 करोड़ रुपये खर्च करेगा ताकि पेयजल व्यवस्था को और मजबूती मिल सके।
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