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कोरोना/कर्फ्यूः पंजाब में मुलाजिमों के वेतन में लग सकता है कट, डीए फ्रीज करने पर चल रहा मंथन

Sat, 25 Apr 2020 02:42 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 25 Apr 2020 02:42 PM IST
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effect on salary of employees in Punjab, coronavirus, lockdown, curfew
सांकेतिक तस्वीर
कोविड-19 के खिलाफ जंग के दौरान आर्थिक तंगहाली का सामना कर रही पंजाब सरकार अपने मुलाजिमों के वेतन में बड़ा कट लगाने पर विचार करने लगी है। सरकार के लिए चालू माह का वेतन और पेंशन की अदायगी करना कठिन हो चुका है। इसे देखते हुए वित्त विभाग ने ही सरकार को कर्मचारियों के भत्तों की लंबी-चौड़ी रकम याद दिलाई है।
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केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए महंगाई भत्ते को अगले साल जुलाई तक फ्रीज कर दिए जाने के फैसले के बाद पंजाब सरकार ने भी इसी राह पर चलने का मन बना लिया है। फिलहाल वित्त विभाग इसका खाका तैयार कर रहा है जिससे यह भी साफ हो सके कि महंगाई भत्ता फ्रीज किए जाने से प्रदेश सरकार का कितना पैदा बचेगा। वैसे मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य सरकार कर्मचारियों की श्रेणी के अनुसार वेतनमान में 10, 20 और 30 फीसदी कटौती का प्रस्ताव पहले ही ला चुकी है, जिसका कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया है।
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सूत्रों के अनुसार, इस माह के अंत तक राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों का डीए फ्रीज करने संबंधी फरमान सुनाया जा सकता है। उधर, भारतीय मजदूर संघ ने जहां केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं पंजाब के कर्मचारी संगठन भी लामबंद होने लगे हैं। साझा मुलाजिम मंच के कनवीनर सुखचैन सिंह खैरा ने इस संबंध में कहा कि सभी कर्मचारी अपना एक-एक दिन का वेतन देने का एलान कर चुके हैं। यही नहीं, राज्य के वर्ग-ए अधिकारी अपनी सैलरी का 30 फीसदी तक अंश देने की घोषणा कर चुके हैं।
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कर्मचारियों के डीए की एक बहुत बड़ी रकम पहले ही सरकार की तरफ बकाया है। अगर इसके बाद भी सरकार ने डीए फ्रीज करने का फैसला लिया तो कर्मचारी संगठन इसका कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन में कटौती के संकेत पिछले महीने भी दिए थे और संभव है कि केंद्र सरकार के आदेश की आड़ में राज्य सरकार भी ऐसा कदम उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह का फैसला कर्मचारियों के साथ अन्याय होगा।

पंजाब सरकार के राजस्व प्राप्ति के सभी स्रोत बंद

कर्फ्यू और लॉकडाउन के चलते पंजाब सरकार के आय के सभी स्रोत बंद हैं। केंद्र सरकार से बार-बार मांगे जाने के बावजूद राज्य को कोई विशेष आर्थिक पैकेज नहीं मिल रहा। राज्य सरकार अपने साढ़े चार लाख कर्मचारियों को वेतन-भत्ते देने के लिए हर महीने 2000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करती है। इसी तरह राज्य के पेंशनधारकों के लिए हर महीने 700 करोड़ रुपये की राशि खर्च होती है।

इस साल मार्च में फरवरी माह के वेतन-भत्ते देने के लिए राज्य सरकार ने बाजार से 700 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। वहीं, जीएसटी में अपने हिस्से का 4400 करोड़ रुपया भी केंद्र सरकार की तरफ बकाया चल रहा है। इस बीच, पेट्रोल-डीजल और शराब जोकि सरकार की राजस्व प्राप्ति के मुख्य स्रोत रहे हैं, कर्फ्यू के कारण इनकी बिक्री ठप हो चुकी है।

सीएम सोमवार को पीएम के समक्ष रखेंगे मुद्दा
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को बताया कि वे सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान शराब के ठेके खोलने और चुनिंदा औद्योगिक इकाइयों में कामकाज शुरू करवाने का मुद्दा प्रधानमंत्री के समक्ष रखेंगे। दूसरी ओर, वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल राजस्व जुटाने के लिए कर्मचारियों का एक-एक सप्ताह का वेतन काटने की सिफारिश पहले ही मुख्यमंत्री से कर चुके हैं जिसे उन्होेंने टाल दिया था।
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